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Mahendragarh-Narnaul News: किसानों पर पाले की मार, 3.60 लाख एकड़ में खड़ी फसलों में नुकसान की आशंका

Tue, 13 Jan 2026 02:32 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 13 Jan 2026 02:32 AM IST
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Farmers hit by frost, damage feared to standing crops in 3.60 lakh acres.
फोटो संख्या:61 गेहूं की फसल पर जमा पाला। संवाद
महेंद्रगढ़। दो दिनों से लगातार पड़ रहे पाले से जिले में करीब 3.60 लाख एकड़ में खड़ी फसलों में नुकसान की आशंका बढ़ गई है। सोमवार सुबह फसलों पर जमीं कोहरे की सफेद चादर देख किसान भी फसलों में नुकसान की आशंका जता रहे हैं।
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इस समय 2.72 लाख एकड़ में खड़ी सरसों की फलियों में दाना बनना आरंभ हो चुका है। किसानों का कहना है कि अगर दो-तीन दिन पाला जमने की स्थिति बनती है तो फसलों में अधिक नुकसान होगा। विशेषकर छह हजार एकड़ में खड़ी सब्जियों पर इसका प्रभाव अधिक पड़ सकता है।
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रविवार सुबह हल्की पाले की परत जमीं थी लेकिन सोमवार सुबह फसलें सफेद चादर में ढकी नजर आई। सुबह किसानों के खेतों में लगे पाइपों व सिंचाई उपकरणों पर भी पाले की परत चढ़ी। वहीं 70 हजार एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल में भी बढ़वार व फुटाव प्रभावित होगा।
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गांव पाथेड़ा निवासी किसान बीर सिंह, अगिहार निवासी देवेंद्र, मालड़ा बास निवासी जयपाल सहित क्षेत्र के किसानों का कहना है कि इस समय पाला जमने से विशेषकर फलियों में दाना मरने से नुकसान होगा। हालांकि इसकी मार का प्रभाव दो-तीन दिन बाद ही फसलों पर दिखाई देता है।
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जिले में फसलों का अनुमानित रकबा
फसल रकबा एकड़ में
सरसों 2.72 लाख
गेहूं 70 हजार
जौ 300 एकड़
चना 8 हजार
बरसीम 1175 एकड़
जई 1420 एकड़
कासनी 800 एकड़
मटर 5000 एकड़
तरबूज 500 एकड़
चप्पन टींडा 500 एकड़
कद्दु, लौकी 500 एकड़
गेंदा 100 एकड़
टमाटर 100 एकड़
बैंगन 50 एकड़
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हल्की सिंचाई व धुआं करने की सलाह
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग महेंद्रगढ़ के उपमंडल अधिकारी डॉ. अजय कुमार यादव ने बताया कि इस समय सरसों की फलियों में दाना बनना शुरू हो चुका है अगर अधिक समय तक पाले की स्थिति बनती है तो फसलों में नुकसान हो सकता है। किसान फसलों में हल्की सिंचाई कर पाले के प्रभावों को कम कर सकते हैं। साथ ही हल्का धुआं करने से भी पाले के प्रभावों को कम किया जा सकता है।

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पोटेशियम नाइट्रेट का छिड़काव करें : कृषि विशेषज्ञ
कनीना। कृषि विशेषज्ञ डॉ. योगेश ने बताया कि जब तापमान बहुत नीचे चला जाता है तो पौधों की कोशिकाओं में मौजूद पानी जमकर फैलता है और कोशिका भित्ति को फाड़ देता है। इससे पौधा कमजोर हो जाता है या सूख जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर चौड़ी पत्ती वाली और फूल वाली फसलों पर पड़ता है। अधिक समय तक पाला जमने से फूल वाली फसलों में परागकण नष्ट हो जाते हैं जिससे पैदावार पर सीधा असर पड़ता है। फसलों पर पोटेशियम नाइट्रेट (13:0:45) का 1 किलो प्रति 100 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें, इससे पौधों की सहनशक्ति बढ़ती है। संवाद

फोटो संख्या:61 गेहूं की फसल पर जमा पाला। संवाद

फोटो संख्या:61 गेहूं की फसल पर जमा पाला। संवाद

फोटो संख्या:61 गेहूं की फसल पर जमा पाला। संवाद

फोटो संख्या:61 गेहूं की फसल पर जमा पाला। संवाद

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