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Mahendragarh-Narnaul News: बागेश्वर धाम बाघोत में मेला आज, हजारों श्रद्धालु करेंगे जलाभिषेक
Thu, 01 Aug 2024 11:57 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Thu, 01 Aug 2024 11:57 PM IST
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फोटो संख्या:68- गांव बाघोत के बाघेश्वर धाम मंदिर में लगी श्रद्धालुओं की भीड़--संवाद
कनीना। ऐतिहासिक बाघेश्वरी धाम बाघोत में शिवरात्रि पर्व पर श्रद्धालुओं व कांवड़ियों की भीड़ रहेगी। धाम में वीरवर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।
श्रद्धालुओं ने बम भोले की गूंज के शिवालय गूंज रहा हैं। बाघेश्वर धाम के मठाधीश महंत रोशन पुरी महाराज ने बताया कि इस वर्ष सावन में अब तकरीबन एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं द्वारा जल चढ़ाया जा चुका है। ढाई लाख कांवड़ व पांच लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। मंदिर की सुरक्षा व श्रद्धालुओं की पूरी सुरक्षा का इंतजाम किया हुआ है। कांवडीयों के लिए धर्मशाला का बनाई हुई है। पूरे सावन माह में यहां पर मेला लगता है। मंदिर एवं शिवलिंग अपने अंदर इतिहास व पौराणिक महत्व समेटे हुए है। इसे ऋषि मुनियों की तप स्थली एवं शिव के दृष्टांत के रूप में जाना जाता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु गोमुख, गंगोत्री और हरिद्वार से पैदल चलकर कावड़ लाकर बाघोत स्थित स्वयं-भू शिवलिंग पर गंगा जल चढ़ाते हैं। यह मंदिर कनीना-चरखी दादरी मार्ग पर 15 किमी दूरी पर और कनीना से करीब 17 किलोमीटर दूरी पर स्थित बाघोत गांव में मुख्य सड़क मार्ग के पास ही स्थित है।
बाघोत स्थित शिवालय ग्रामीणों के अनुसार बाघोत का मंदिर करीब 1685 वर्ष पुराना है। इस शिवालय के पास खड़े कदंब के पेड़, तालाब एवं स्वयंभू शिवलिंग ऋषि मुनियों की तप स्थली होने की याद दिलाते हैं। तत्कालीन समय में राजा दलीप को शिव ने बाघ के रूप में दर्शन दिए थे, जिसके चलते गांव का मंदिर बाघेश्वरी धाम कहलाया। शिवालय का निर्माण कणाणा के राजा कल्याण सिंह ने करवाया था।
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मेले को लेकर सभी तैयारियां हुई पूर्ण, सुरक्षा की दृष्टि से लगाए गए सीसीटीवी कैमरे
बाघोत में शिवरात्रि पर्व पर लगने वाला मेला क्षेत्र के साथ-साथ देशभर के श्रद्धालुओं के लिए विशेष है। मंदिर को भव्य तरीके से सजाया गया है। वहीं सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। मेला कमेटी द्वारा सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद की गई हैं। विभिन्न कावड़ सेवा संघ यहां आकर भक्तों की सेवा करते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से मेले में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना पर काबू पाया जा सके व लोगों पर नजर रखी जा सके।
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श्रद्धालुओं ने बम भोले की गूंज के शिवालय गूंज रहा हैं। बाघेश्वर धाम के मठाधीश महंत रोशन पुरी महाराज ने बताया कि इस वर्ष सावन में अब तकरीबन एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं द्वारा जल चढ़ाया जा चुका है। ढाई लाख कांवड़ व पांच लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। मंदिर की सुरक्षा व श्रद्धालुओं की पूरी सुरक्षा का इंतजाम किया हुआ है। कांवडीयों के लिए धर्मशाला का बनाई हुई है। पूरे सावन माह में यहां पर मेला लगता है। मंदिर एवं शिवलिंग अपने अंदर इतिहास व पौराणिक महत्व समेटे हुए है। इसे ऋषि मुनियों की तप स्थली एवं शिव के दृष्टांत के रूप में जाना जाता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु गोमुख, गंगोत्री और हरिद्वार से पैदल चलकर कावड़ लाकर बाघोत स्थित स्वयं-भू शिवलिंग पर गंगा जल चढ़ाते हैं। यह मंदिर कनीना-चरखी दादरी मार्ग पर 15 किमी दूरी पर और कनीना से करीब 17 किलोमीटर दूरी पर स्थित बाघोत गांव में मुख्य सड़क मार्ग के पास ही स्थित है।
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बाघोत स्थित शिवालय ग्रामीणों के अनुसार बाघोत का मंदिर करीब 1685 वर्ष पुराना है। इस शिवालय के पास खड़े कदंब के पेड़, तालाब एवं स्वयंभू शिवलिंग ऋषि मुनियों की तप स्थली होने की याद दिलाते हैं। तत्कालीन समय में राजा दलीप को शिव ने बाघ के रूप में दर्शन दिए थे, जिसके चलते गांव का मंदिर बाघेश्वरी धाम कहलाया। शिवालय का निर्माण कणाणा के राजा कल्याण सिंह ने करवाया था।
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मेले को लेकर सभी तैयारियां हुई पूर्ण, सुरक्षा की दृष्टि से लगाए गए सीसीटीवी कैमरे
बाघोत में शिवरात्रि पर्व पर लगने वाला मेला क्षेत्र के साथ-साथ देशभर के श्रद्धालुओं के लिए विशेष है। मंदिर को भव्य तरीके से सजाया गया है। वहीं सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। मेला कमेटी द्वारा सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद की गई हैं। विभिन्न कावड़ सेवा संघ यहां आकर भक्तों की सेवा करते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से मेले में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना पर काबू पाया जा सके व लोगों पर नजर रखी जा सके।

फोटो संख्या:68- गांव बाघोत के बाघेश्वर धाम मंदिर में लगी श्रद्धालुओं की भीड़--संवाद