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Mahendragarh-Narnaul News: अच्छाई के सामने बुराई टिक नहीं सकती
Wed, 20 Nov 2024 11:39 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 20 Nov 2024 11:39 PM IST
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फोटो संख्या:78- सतनाली के जमुवाय माता मंदिर में श्रीराम कथा के दौरान श्रीराम दरबार का दृश्य--स्
सतनाली। जमुवाय माता मंदिर में राम राज्याभिषेक के साथ नौ दिवसीय श्रीराम कथा राम राज्याभिषेक के साथ कथा का समापन किया गया। बुधवार को कथा का शुभारंभ गणेश वंदना के साथ शुरू किया गया।
कथावाचक महाराज कृष्ण ने कहा कि संसार में बुराई चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न बन जाए। वह अच्छाई के सामने अधिक दिनों तक टिक नहीं सकती है। अच्छाई और सच्चाई की हमेशा ही जीत के साथ होते हैं। पापियों के पाप का घड़ा एक दिन अवश्य भरता है। जिस वजह से उसका अंत बड़ा ही दुखद तरीके से होता है। उन्होंने कहा कि रावण वध के बाद प्रभु श्रीराम अयोध्या लौट गए। जहां उनका विधि-विधान पूर्वक राज्याभिषेक किया गया।
न्याय की उम्मीद लेकर आने वाले सभी इंसान को इंसाफ मिलता था। जहां दोषी पाए जाने वाले लोगों को सजा दी जाती थी। निर्दोष को सम्मान और आदर प्रदान किए जाते थे। आज भी इस संसार में लोग राम राज्य की कल्पना करते हैं। क्योंकि राम के शासन काल में किसी भी इंसान के साथ नाइंसाफी नहीं हुई। इनके दरबार में जो भी व्यक्ति पहुंचे। उनके साथ इंसाफ अवश्य हुआ। मानव जीवन को साकार करने का एक मात्र सहारा राम का नाम है। इनके नाम का स्मरण मात्र ही लोगों को जीवन के संमार्ग पर ले जाते हैं।
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कथा के अंत में श्रीराम नाम का स्मरण लोगों ने किया गया। कथा के अंत में भक्तों के बीच प्रसाद वितरण किए गए। इस मौके पर शांति देवी, जमुना देवी, इंद्रा देवी, संता, अंशु, आयना, हेमलता, सीमा ओर कृष्ण श्यामपुरा आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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कथावाचक महाराज कृष्ण ने कहा कि संसार में बुराई चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न बन जाए। वह अच्छाई के सामने अधिक दिनों तक टिक नहीं सकती है। अच्छाई और सच्चाई की हमेशा ही जीत के साथ होते हैं। पापियों के पाप का घड़ा एक दिन अवश्य भरता है। जिस वजह से उसका अंत बड़ा ही दुखद तरीके से होता है। उन्होंने कहा कि रावण वध के बाद प्रभु श्रीराम अयोध्या लौट गए। जहां उनका विधि-विधान पूर्वक राज्याभिषेक किया गया।
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न्याय की उम्मीद लेकर आने वाले सभी इंसान को इंसाफ मिलता था। जहां दोषी पाए जाने वाले लोगों को सजा दी जाती थी। निर्दोष को सम्मान और आदर प्रदान किए जाते थे। आज भी इस संसार में लोग राम राज्य की कल्पना करते हैं। क्योंकि राम के शासन काल में किसी भी इंसान के साथ नाइंसाफी नहीं हुई। इनके दरबार में जो भी व्यक्ति पहुंचे। उनके साथ इंसाफ अवश्य हुआ। मानव जीवन को साकार करने का एक मात्र सहारा राम का नाम है। इनके नाम का स्मरण मात्र ही लोगों को जीवन के संमार्ग पर ले जाते हैं।
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कथा के अंत में श्रीराम नाम का स्मरण लोगों ने किया गया। कथा के अंत में भक्तों के बीच प्रसाद वितरण किए गए। इस मौके पर शांति देवी, जमुना देवी, इंद्रा देवी, संता, अंशु, आयना, हेमलता, सीमा ओर कृष्ण श्यामपुरा आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।