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Mahendragarh-Narnaul News: पूर्व मुख्यमंत्री के बयान पर भड़के कर्मचारी नेता
Sat, 01 Jun 2024 12:09 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 01 Jun 2024 12:09 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
महेंद्रगढ़। हरियाणा मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन से संबद्ध सर्व कर्मचारी संघ ने पूर्व मुख्यमंत्री मनोहरलाल के उस बयान पर आपत्ति जताई है जिसमें उन्होंने कहा है कि सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों ने लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों को फायदा पहुंचाया है। इसलिए ऐसे कर्मचारियों और अधिकारियों की सूची बनाकर चार जून के बाद कार्रवाई की जाएगी। हेमसा के प्रदेश प्रेस प्रवक्ता सुजान मालड़ा ने कहा कि कर्मचारियों के बारे में पूर्व मुख्यमंत्री का इस तरह बयान शोभा नहीं देता है। मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन इसकी घोर निंदा करता है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2014 के बाद से मनोहरलाल ने प्रदेश का मुख्यमंत्री पद संभाला था। 2014 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में लिपिकों को पंजाब की तर्ज पर वेतनमान देने की बात कही थी। इसी मांग को लेकर प्रदेश के कर्मचारियों ने भाजपा को समर्थन दिया था।
लेकिन सत्ता मिलने पर भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री से लेकर महकमों के मंत्रियों ने कर्मचारियों की लंबित मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया। अगर वह मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान अपने ही वायदे को पूरा कर देते तो इस तरह की बयानबाजी नहीं करनी पड़ती।े
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महेंद्रगढ़। हरियाणा मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन से संबद्ध सर्व कर्मचारी संघ ने पूर्व मुख्यमंत्री मनोहरलाल के उस बयान पर आपत्ति जताई है जिसमें उन्होंने कहा है कि सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों ने लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों को फायदा पहुंचाया है। इसलिए ऐसे कर्मचारियों और अधिकारियों की सूची बनाकर चार जून के बाद कार्रवाई की जाएगी। हेमसा के प्रदेश प्रेस प्रवक्ता सुजान मालड़ा ने कहा कि कर्मचारियों के बारे में पूर्व मुख्यमंत्री का इस तरह बयान शोभा नहीं देता है। मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन इसकी घोर निंदा करता है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2014 के बाद से मनोहरलाल ने प्रदेश का मुख्यमंत्री पद संभाला था। 2014 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में लिपिकों को पंजाब की तर्ज पर वेतनमान देने की बात कही थी। इसी मांग को लेकर प्रदेश के कर्मचारियों ने भाजपा को समर्थन दिया था।
लेकिन सत्ता मिलने पर भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री से लेकर महकमों के मंत्रियों ने कर्मचारियों की लंबित मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया। अगर वह मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान अपने ही वायदे को पूरा कर देते तो इस तरह की बयानबाजी नहीं करनी पड़ती।े
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