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Mahendragarh-Narnaul News: शोध पत्रों में स्पष्टता और आलोचनात्मक सोच के महत्त्व पर दिया जोर
Sat, 03 Aug 2024 12:57 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 03 Aug 2024 12:57 AM IST
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फोटो संख्या:51- विश्वविद्यालय कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार को स्मृति चिह्न भेंट करते डॉ. राजेंद्र
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) महेंद्रगढ़ के वाणिज्य विभाग द्वारा आयोजित किए जा रहे संकाय क्षमता निर्माण कार्यक्रम में शोध व अकादमिक लेखन पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसमें आईआईटी रुड़की के प्रो. संजीत कुमार मिश्रा ने शोध और अकादमिक, क्रॉस-कल्चर कम्युनिकेशन के लिए लेखन विषय पर केंद्रित व्याख्यान प्रस्तुत किया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार व सम कुलपति प्रो. सुषमा यादव ने युवा संकाय सदस्यों के कौशल व ज्ञान को बढ़ाने के लिए इस तरह के आयोजन के लिए वाणिज्य विभाग की सराहना की है।
विश्वविद्यालय में वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद मीना कार्यक्रम के निदेशक एवं सहायक आचार्य डॉ. दिव्या सह-निदेशक की भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। कार्यक्रम में प्रो. संजीत कुमार मिश्रा ने उच्च गुणवत्ता वाले अकादमिक लेखन के निर्माण पर अपने सुझाव साझा किए। उन्होंने शोध पत्रों में स्पष्टता और आलोचनात्मक सोच के महत्त्व पर भी जोर दिया। प्रो. कुमार ने अकादमिक सहयोग में सांस्कृतिक मतभेदों को समझने और प्रभावी ढंग से नेविगेट करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के डॉ. अजीत साहू ने सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान पद्धति व उसकी कार्यप्रणाली के महत्त्व पर विस्तार से प्रतिभागियों को अवगत कराया। उन्होंने मूल्यांकन के लिए प्राथमिक सर्वेक्षणों के महत्त्व पर भी चर्चा की।
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विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार व सम कुलपति प्रो. सुषमा यादव ने युवा संकाय सदस्यों के कौशल व ज्ञान को बढ़ाने के लिए इस तरह के आयोजन के लिए वाणिज्य विभाग की सराहना की है।
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विश्वविद्यालय में वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद मीना कार्यक्रम के निदेशक एवं सहायक आचार्य डॉ. दिव्या सह-निदेशक की भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। कार्यक्रम में प्रो. संजीत कुमार मिश्रा ने उच्च गुणवत्ता वाले अकादमिक लेखन के निर्माण पर अपने सुझाव साझा किए। उन्होंने शोध पत्रों में स्पष्टता और आलोचनात्मक सोच के महत्त्व पर भी जोर दिया। प्रो. कुमार ने अकादमिक सहयोग में सांस्कृतिक मतभेदों को समझने और प्रभावी ढंग से नेविगेट करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के डॉ. अजीत साहू ने सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान पद्धति व उसकी कार्यप्रणाली के महत्त्व पर विस्तार से प्रतिभागियों को अवगत कराया। उन्होंने मूल्यांकन के लिए प्राथमिक सर्वेक्षणों के महत्त्व पर भी चर्चा की।
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