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राम का चला खेल, इंद्र और संतोष फेल
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Thu, 28 Apr 2016 12:11 AM IST
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जिला प्रमुख चुनाव
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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दो बार स्थगित होने के बाद बुधवार को जिला परिषद के चुनाव में शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा समर्थित वार्ड नंबर-पांच की पार्षद राजेश देवी जिला प्रमुख चुनी गई हैं। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत और डिप्टी स्पीकर संतोष यादव समर्थित राजेश मांदी को हार का मुंह देखना पड़ा है। राजेश देवी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी राजेश यादव मांदी को दो वोटों से मात दी। उपप्रधान पद पर कांग्रेस समर्थित वार्ड नंबर-एक की पार्षद सुशीला देवी ने विजय प्राप्त की। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी विनोद यादव भील को दो वोटों से शिकस्त दी। इस चुनाव में शिक्षामंत्री के खेल में इंद्र और संतोष दोनो फेल हो गए। प्रधान और उपप्रधान की कुर्सियों पर इस बार महिला पार्षदों का कब्जा हो गया। अब जिले की कमान दो महिलाओं के हाथ में आ गई है।
जनवरी में जिला पार्षद के चुनाव के बाद फरवरी माह में प्रधान और उपप्रधान के चुनाव की घोषणा हुई। मगर उस समय बैठक में एक भी पार्षद नहीं पहुंचा। ऐसे में बैठक स्थगित कर दी गई। इसके बाद करीब दो माह बाद 23 अप्रैल को फिर से प्रधान और उपप्रधान पद के चुनाव के लिए तिथि घोषित की गई। इस दिन सभी 20 पार्षद पंचायत भवन में निर्धारित समय पर पहुंच गए। उस दिन चुनाव अधिकारी एडीसी आरएस वर्मा बीमार हो गए। इस कारण चुनाव स्थगित कर दिया गया। प्रशासन ने फिर से दो दिन पूर्व सोमवार को नई तिथि की घोषणा की। इसके बाद बुधवार को सुबह साढ़े दस बजे पंचायत भवन में चुनाव होने तय हुए।
सुबह सवा दस बजे से आने शुरू हो गए थे पार्षद
चुनाव के लिए बैठक साढ़े दस बजे शुरू होनी थी। इसके चलते सुबह करीब दस बजकर 25 मिनट पर 13 पार्षद राजेश मांदी के नेतृत्व में आए। ये सभी पार्षद एक निजी स्कूल की बस में आए थे। इस बार बस को गेट के बाहर ही रुकवा लिया गया था। इसके बाद एक पार्षद आया। वहीं शिक्षा मंत्री के मीडिया प्रभारी राजेश यादव के साथ छह पार्षद भी करीब दस मिनट बाद पहुंचे। सभी पार्षद पंचायत भवन स्थित मीटिंग हाल में चले गए। यहां पर पहले से ही एडीसी और एसडीएम बैठे मौजूद थे। करीब दस मिनट बाद चुनावी प्रक्रिया शुरू हुई थी।
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डीसी और एसपी ने भी किया दौरा
पंचायत भवन में करीब 11 बजे उपायुक्त संजीव कुमार और एसपी हामिद अख्तर ने भी दौरा किया। एसपी सुरक्षा व्यवस्था का जायज लेकर बाहर से ही चले गए थे, जबकि डीसी मीटिंग हाल के अंदर जाकर बैठ गए। इसके बाद पहले प्रधान पद के लिए चुनाव कराया गया। इसमें राजेश देवी और राजेश मांदी ने अपना नामांकन किया। इसके बाद ईवीएम से चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई। सबसे पहले वार्ड नंबर एक से मत डालने शुरू किए गए। सभी 20 पार्षदों के मत डालने के बाद रिजल्ट की घोषणा की गई। इसमें राजेश देवी को 11 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी राजेश यादव को नौ मतों से ही संतोष करना पड़ा। इसी के साथ ही राजेश देवी ने राजेश मांदी को दो वोटों से मात दे दी।
प्रधान के बाद हुआ उपप्रधान का चुनाव
प्रधान चुने जाने के बाद जिला उपप्रमुख का चुनाव कराया गया। जिसमें तीन लोगों ने अपना नामांकन किया। इनमें सुशीला देवी, विनोद यादव भील और सुरेश कुमार मैदान में थे। इसमें वोटिंग कराई गई, पूर्व जिला उपप्रमुख सुनीता वर्मा ने उपप्रधान पद के चुनाव का बायकाट कर दिया। इस कारण 19 लोगों ने वोटिंग की। इसमें सुशीला देवी को नौ, विनोद यादव भील को सात और सुरेश कुमार को तीन मत मिले। इस प्रकार सुशीला देवी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी विनोद यादव भील को दो मतों से शिकस्त दी।
चुनाव के समय चाक चौबंद थी सुरक्षा
जिला परिषद के चुनाव के लिए पंचायत भवन में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता थी। पंचायत भवन के अंदर पार्षदों और अधिकारियों के सिवाय किसी को भी प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा था। पंचायत भवन के अंदर, बाहर और गेट पर पुलिस के जवानों की ड्यूटी लगाई गई थी। डीएसपी राजेश यादव के नेतृत्व में कई पुलिस कर्मचारी सुरक्षा की कमान संभाले हुए थे।
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जनवरी में जिला पार्षद के चुनाव के बाद फरवरी माह में प्रधान और उपप्रधान के चुनाव की घोषणा हुई। मगर उस समय बैठक में एक भी पार्षद नहीं पहुंचा। ऐसे में बैठक स्थगित कर दी गई। इसके बाद करीब दो माह बाद 23 अप्रैल को फिर से प्रधान और उपप्रधान पद के चुनाव के लिए तिथि घोषित की गई। इस दिन सभी 20 पार्षद पंचायत भवन में निर्धारित समय पर पहुंच गए। उस दिन चुनाव अधिकारी एडीसी आरएस वर्मा बीमार हो गए। इस कारण चुनाव स्थगित कर दिया गया। प्रशासन ने फिर से दो दिन पूर्व सोमवार को नई तिथि की घोषणा की। इसके बाद बुधवार को सुबह साढ़े दस बजे पंचायत भवन में चुनाव होने तय हुए।
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सुबह सवा दस बजे से आने शुरू हो गए थे पार्षद
चुनाव के लिए बैठक साढ़े दस बजे शुरू होनी थी। इसके चलते सुबह करीब दस बजकर 25 मिनट पर 13 पार्षद राजेश मांदी के नेतृत्व में आए। ये सभी पार्षद एक निजी स्कूल की बस में आए थे। इस बार बस को गेट के बाहर ही रुकवा लिया गया था। इसके बाद एक पार्षद आया। वहीं शिक्षा मंत्री के मीडिया प्रभारी राजेश यादव के साथ छह पार्षद भी करीब दस मिनट बाद पहुंचे। सभी पार्षद पंचायत भवन स्थित मीटिंग हाल में चले गए। यहां पर पहले से ही एडीसी और एसडीएम बैठे मौजूद थे। करीब दस मिनट बाद चुनावी प्रक्रिया शुरू हुई थी।
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डीसी और एसपी ने भी किया दौरा
पंचायत भवन में करीब 11 बजे उपायुक्त संजीव कुमार और एसपी हामिद अख्तर ने भी दौरा किया। एसपी सुरक्षा व्यवस्था का जायज लेकर बाहर से ही चले गए थे, जबकि डीसी मीटिंग हाल के अंदर जाकर बैठ गए। इसके बाद पहले प्रधान पद के लिए चुनाव कराया गया। इसमें राजेश देवी और राजेश मांदी ने अपना नामांकन किया। इसके बाद ईवीएम से चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई। सबसे पहले वार्ड नंबर एक से मत डालने शुरू किए गए। सभी 20 पार्षदों के मत डालने के बाद रिजल्ट की घोषणा की गई। इसमें राजेश देवी को 11 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी राजेश यादव को नौ मतों से ही संतोष करना पड़ा। इसी के साथ ही राजेश देवी ने राजेश मांदी को दो वोटों से मात दे दी।
प्रधान के बाद हुआ उपप्रधान का चुनाव
प्रधान चुने जाने के बाद जिला उपप्रमुख का चुनाव कराया गया। जिसमें तीन लोगों ने अपना नामांकन किया। इनमें सुशीला देवी, विनोद यादव भील और सुरेश कुमार मैदान में थे। इसमें वोटिंग कराई गई, पूर्व जिला उपप्रमुख सुनीता वर्मा ने उपप्रधान पद के चुनाव का बायकाट कर दिया। इस कारण 19 लोगों ने वोटिंग की। इसमें सुशीला देवी को नौ, विनोद यादव भील को सात और सुरेश कुमार को तीन मत मिले। इस प्रकार सुशीला देवी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी विनोद यादव भील को दो मतों से शिकस्त दी।
चुनाव के समय चाक चौबंद थी सुरक्षा
जिला परिषद के चुनाव के लिए पंचायत भवन में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता थी। पंचायत भवन के अंदर पार्षदों और अधिकारियों के सिवाय किसी को भी प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा था। पंचायत भवन के अंदर, बाहर और गेट पर पुलिस के जवानों की ड्यूटी लगाई गई थी। डीएसपी राजेश यादव के नेतृत्व में कई पुलिस कर्मचारी सुरक्षा की कमान संभाले हुए थे।