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Mahendragarh-Narnaul News: जिले के 734 सरकारी स्कूलों में भेजी गईं ज्ञानवर्धक पुस्तकें

Tue, 06 May 2025 11:52 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Tue, 06 May 2025 11:52 PM IST
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Educational books were sent to 734 government schools in the district
फोटो नंबर-08नारनौल सरकारी स्कूल के पुस्तकालय में किताबों को पढ़ते विद्यार्थी। संवाद
नारनौल। जिले के सभी प्राइमरी, मिडिल, हाई और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल सहित जिले के सात पीएमश्री विद्यालयों में विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन करने के लिए स्कूलों में रचनात्मक पुस्तकें भेज दी गई हैं। अब इन किताबों को स्कूल के पुस्तकालयों में पहुंचाने का कार्य शुरू हो चुका है।
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शिक्षा विभाग की ओर से जिले के 734 सरकारी स्कूलों के पुस्तकालयों में यह किताबें पहुंचाई जाएंगी। सरकारी स्कूलों के सभी पुस्तकालयों के लिए एक लाख 22 हजार 610 पुस्तकें आई हैं। इन्हें विभाग सभी स्कूलों के पुस्तकालयों में पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। सरकारी स्कूलों के लिए इन पुस्तकों पर 33 लाख 75 हजार रुपये खर्च किए गए हैं। शिक्षा विभाग का उद्देश्य इन किताबों के माध्यम से विद्यार्थियों का ज्ञानवर्धन करना है, जिससे शैक्षणिक स्तर को बेहतर किया जा सके।
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इस योजना के तहत भारत सरकार के नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया को इस प्रोजेक्ट का आर्डर दिया गया था। यह कदम अब छात्रों के ज्ञान को बढ़ाने में मदद करेगा। इस योजना के तहत 734 सरकारी स्कूलों के पुस्तकालयों को अब नई किताबों से लैस किया जा रहा है। इन किताबों के आने से न केवल छात्रों को पढ़ाई के लिए अतिरिक्त संसाधन मिलेंगे, बल्कि उनकी रचनात्मकता और सोचने की क्षमता भी विकसित होगी। पाठ्यक्रम के साथ-साथ सामान्य ज्ञान, साहित्य, विज्ञान और कला जैसे गुण भी विकसित किए जाएगें। स्कूल के पुस्तकालयों में इन किताबों के माध्यम से सरकार का उद्देश्य है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का सर्वांगीण विकास हो। पाठ्यपुस्तकों के साथ उन्हें अन्य सामान्य ज्ञान सहित व्यावहारिक जीवन के बारे में पता चले। इसलिए पुस्तकालयों में आई इन किताबों के पढ़ने से बच्चों को बहुत सा ज्ञान प्राप्त होगा और खाली समय में इन्हें पढ़ने के लिए छात्रों को प्रेरित भी किया जाएगा।
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वर्जन-
सरकारी स्कूलों में भेजी गईं किताबों का आर्डर नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया को दिया गया था। सभी स्कूलों में ये किताबें पहुंचा दी गई हैं। विद्यार्थी अब अपनी मनपसंद की पुस्तक पढ़कर अपना ज्ञानवर्धन कर सकेंगे।-हरमेंद्र सिंह, एपीसी, समग्र शिक्षा विभाग
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