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Mahendragarh-Narnaul News: पहले पानी से लबालब रहते थे तालाब, आज उग आईं झाड़ियां और बन गए मकान
Fri, 03 May 2024 03:50 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Fri, 03 May 2024 03:50 AM IST
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नारनौल। जिले में लोग एक समय तालाब पानी से लबालब रहते थे। लोग तालाब के पानी को अपनी दैनिक जरूरतों में उपयोग करते थे। आज संरक्षण के अभाव में अधिकतर तालाब बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। कुछ तालाबों पर तो लोगों ने कब्जा कर मकान खड़े कर लिए हैं और कुछ में झाड़ियां तक भी उग आई हैं।
करीब तीन दशक पहले जो तालाब गर्मी के मौसम में नहाने वाले से गुलजार रहा करते थे, उनमें कुछ तो लुप्त होने की कगार पर है, कुछ पानी के अभाव में सूखे पड़े हैं। वहीं जिन एक दो तालाब में पानी है, उनमें इतनी गंदगी है कि उनके अंदर नहाना तो दूर पास बैठना भी मुश्किल है।
नारनौल शहर अपने अंदर कई तालाब व बावड़ियों को संजोए हुए हैं। परंतु सही देखरेख न होने के कारण इनकी स्थित दिन प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है। इस ऐतिहासिक नगर में सन 1950 तक 9 मोहल्ले हुआ करते थे और प्रत्येक मोहल्ले में तालाब बना हुआ था। सही देखरेख न होने के कारण कई तालाब अपना अस्तित्व खोते जा रही है। शहर में बने 14 तालाबों में केवल एक-दो तालाब ही ऐसे हैं, जिसको नहरी पानी से भरा जा रहा है। इस तरह एक दो तालाब ऐसे हैं, जिनकी छटाई नहीं होने के कारण उनका पानी इतना गंदा हो रहा है जो किसी भी प्रकार से उपयोग में नहीं आ रहा है। कुछ तालाब पानी के अभाव में सूखे पड़े हैं, जिनमें झाड़ियां उग है और गंदगी से अटे पड़े हैं। वर्तमान में कुछ तालाब तो ऐसे हैं जिनका नाम मात्र ही अस्तित्व बचा है। इनमें एक तालाब मोहल्ला सलामपुरा में सोमेश्वर तालाब है। इस तालाब के पास जाकर ही पता चलता है कि यहां कोई तालाब था। क्योंकि चार दीवारी में दो तरफ की ही दीवारें सही बची हुई है। इसके आसपास बनी कालोनियों व मकानों के बीच यह तालाब दबकर रह गया। इस तालाब में सन 1950 तक पानी था और लोग नहाते भी थे। शहर के इन तालाबों की दयनीय स्थिति उस दिन से शुरू हो गई जबसे राजस्थान व शहर के समीपवर्ती गांव जोरासी में बांध बन गए।
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तालाब व इसके आसपास सुधार करने के लिए बैठक में मांग रखी जाए व इसके लिए बजट तैयार किया जा सकता है। जिस मोहल्लों में तालाब है, उनके सुधार के लिए वहां के पार्षद मांग रखे तो हम बजट तैयार करके इस पर कार्य करवा सकते हैं।
सुंदर सिंह श्योराण, एक्सईएन नगर परिषद, नारनौल।
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करीब तीन दशक पहले जो तालाब गर्मी के मौसम में नहाने वाले से गुलजार रहा करते थे, उनमें कुछ तो लुप्त होने की कगार पर है, कुछ पानी के अभाव में सूखे पड़े हैं। वहीं जिन एक दो तालाब में पानी है, उनमें इतनी गंदगी है कि उनके अंदर नहाना तो दूर पास बैठना भी मुश्किल है।
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नारनौल शहर अपने अंदर कई तालाब व बावड़ियों को संजोए हुए हैं। परंतु सही देखरेख न होने के कारण इनकी स्थित दिन प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है। इस ऐतिहासिक नगर में सन 1950 तक 9 मोहल्ले हुआ करते थे और प्रत्येक मोहल्ले में तालाब बना हुआ था। सही देखरेख न होने के कारण कई तालाब अपना अस्तित्व खोते जा रही है। शहर में बने 14 तालाबों में केवल एक-दो तालाब ही ऐसे हैं, जिसको नहरी पानी से भरा जा रहा है। इस तरह एक दो तालाब ऐसे हैं, जिनकी छटाई नहीं होने के कारण उनका पानी इतना गंदा हो रहा है जो किसी भी प्रकार से उपयोग में नहीं आ रहा है। कुछ तालाब पानी के अभाव में सूखे पड़े हैं, जिनमें झाड़ियां उग है और गंदगी से अटे पड़े हैं। वर्तमान में कुछ तालाब तो ऐसे हैं जिनका नाम मात्र ही अस्तित्व बचा है। इनमें एक तालाब मोहल्ला सलामपुरा में सोमेश्वर तालाब है। इस तालाब के पास जाकर ही पता चलता है कि यहां कोई तालाब था। क्योंकि चार दीवारी में दो तरफ की ही दीवारें सही बची हुई है। इसके आसपास बनी कालोनियों व मकानों के बीच यह तालाब दबकर रह गया। इस तालाब में सन 1950 तक पानी था और लोग नहाते भी थे। शहर के इन तालाबों की दयनीय स्थिति उस दिन से शुरू हो गई जबसे राजस्थान व शहर के समीपवर्ती गांव जोरासी में बांध बन गए।
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तालाब व इसके आसपास सुधार करने के लिए बैठक में मांग रखी जाए व इसके लिए बजट तैयार किया जा सकता है। जिस मोहल्लों में तालाब है, उनके सुधार के लिए वहां के पार्षद मांग रखे तो हम बजट तैयार करके इस पर कार्य करवा सकते हैं।
सुंदर सिंह श्योराण, एक्सईएन नगर परिषद, नारनौल।