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Mahendragarh-Narnaul News: सावन में पर्यटन स्थल बन जाती है महर्षि च्यवन की तपोस्थली
Sun, 13 Jul 2025 12:04 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 13 Jul 2025 12:04 AM IST
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फोटो नंबर-01ढोसी धाम की चढ़ाई करते भोलेनाथ ग्रुप के सदस्य। संवाद
नारनौल। सावन का पावन महीना शुरू होते ही शहर से करीब पांच किलो मीटर दूर स्थित महर्षि च्यवन की तपोस्थली ढोसी धाम पर्यटन स्थल बन जाता है।
सावन के महीने में रिमझिम बरसात के बीच ढोसी धाम के पर्वत पर चढ़ाई करने में अलग ही आनंद की अनुभूति होती है। पर्वत पर चारों तरफ फैली हरियाली लोगों के अंदर जहां एक नई उर्जा का संचार करती है, वहीं यहां भगवान शंकर के मंदिर सहित अन्य मंदिरों में दर्शन कर मन को शांति प्राप्त होती है।
सतयुग से महर्षि च्यवन की यादों के साथ यह ढोसी पर्वत पांडवों तक की यादों को संजोए हुए हैं। महर्षि च्यवन ने यहां च्यवनप्राश बनाया। वहीं पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान कुछ समय बिताया। इस ऐतिहासिक पर्वत पर चढ़ाई करने के लिए लोग पहले कुलताजुपर गांव में पहुंचते हैं और फिर यहां से शिवकुंड की चढ़ाई करते हैं।
शिवकुंड पर एक तालाब, मंदिर व एक झिलेरी बनी हुई। इसमें हर समय पहाड़ों से पानी बहकर आता रहता है। शिवकुंड से ऊपर करीब चार किलोमीटर ढोसी धाम की चढ़ाई की जाती है। ढोसी धाम की चढ़ाई पूरी होने के बाद यहां महर्षि च्यवन का मंदिर, भगवान शिव का मंदिर व चंद्रकूप बना हुआ है। जहांं सोमवती अमावस्या के स्नान का विशेष महत्व होता है।
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इन दिनों बरसात के साथ यह पूरा क्षेत्र हरा-भरा बना हुआ है। यहां आकर लोगों को ऐसा लगता है मानों वे हिमालय की वादियों में घूम रहे हो। अब सावन के साथ जहां भारी संख्या में लोग यहां आते है वहीं जय भोलेनाथ ग्रुप सहित अन्य संस्थाओं के लोग रोज सुबह भोलेनाथ के जयकारों के साथ ढोसी की चढ़ाई कर भगवान शंकर का जलाभिषेक करते हैं।
इसके अलावा इन संस्था के लोगों द्वारा शिवकुंड व ढोसी धाम पर लोगों के लिए चाय, नाश्ता व खाने आदि की भी व्यवस्था की जाती है। ढोसी धाम पर सावन में लोगों की भीड़ को देखते हुए शुक्रवार शाम जिला पुलिस पूजा वशिष्ठ ने भी दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।
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सावन के महीने में रिमझिम बरसात के बीच ढोसी धाम के पर्वत पर चढ़ाई करने में अलग ही आनंद की अनुभूति होती है। पर्वत पर चारों तरफ फैली हरियाली लोगों के अंदर जहां एक नई उर्जा का संचार करती है, वहीं यहां भगवान शंकर के मंदिर सहित अन्य मंदिरों में दर्शन कर मन को शांति प्राप्त होती है।
सतयुग से महर्षि च्यवन की यादों के साथ यह ढोसी पर्वत पांडवों तक की यादों को संजोए हुए हैं। महर्षि च्यवन ने यहां च्यवनप्राश बनाया। वहीं पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान कुछ समय बिताया। इस ऐतिहासिक पर्वत पर चढ़ाई करने के लिए लोग पहले कुलताजुपर गांव में पहुंचते हैं और फिर यहां से शिवकुंड की चढ़ाई करते हैं।
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शिवकुंड पर एक तालाब, मंदिर व एक झिलेरी बनी हुई। इसमें हर समय पहाड़ों से पानी बहकर आता रहता है। शिवकुंड से ऊपर करीब चार किलोमीटर ढोसी धाम की चढ़ाई की जाती है। ढोसी धाम की चढ़ाई पूरी होने के बाद यहां महर्षि च्यवन का मंदिर, भगवान शिव का मंदिर व चंद्रकूप बना हुआ है। जहांं सोमवती अमावस्या के स्नान का विशेष महत्व होता है।
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इन दिनों बरसात के साथ यह पूरा क्षेत्र हरा-भरा बना हुआ है। यहां आकर लोगों को ऐसा लगता है मानों वे हिमालय की वादियों में घूम रहे हो। अब सावन के साथ जहां भारी संख्या में लोग यहां आते है वहीं जय भोलेनाथ ग्रुप सहित अन्य संस्थाओं के लोग रोज सुबह भोलेनाथ के जयकारों के साथ ढोसी की चढ़ाई कर भगवान शंकर का जलाभिषेक करते हैं।
इसके अलावा इन संस्था के लोगों द्वारा शिवकुंड व ढोसी धाम पर लोगों के लिए चाय, नाश्ता व खाने आदि की भी व्यवस्था की जाती है। ढोसी धाम पर सावन में लोगों की भीड़ को देखते हुए शुक्रवार शाम जिला पुलिस पूजा वशिष्ठ ने भी दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।