{"_id":"68f3dca11a672f49890ab5f4","slug":"despite-the-demand-there-is-no-profit-due-to-high-costs-and-hard-work-narnol-news-c-196-1-nnl1004-131223-2025-10-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahendragarh-Narnaul News: डिमांड के बावजूद लागत ज्यादा होने से नहीं हो रहा मुनाफा, मेहनत भी ज्यादा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahendragarh-Narnaul News: डिमांड के बावजूद लागत ज्यादा होने से नहीं हो रहा मुनाफा, मेहनत भी ज्यादा
Sat, 18 Oct 2025 11:59 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 18 Oct 2025 11:59 PM IST
विज्ञापन
फोटो 3 गुवानी में मिट्टी के घड़ो को तैयार करता मनीष छैला प्रजापत।संवाद
सिहमा। दीपावली पर दीपक मांग को देखते हुए कारीगर दिन-रात बनाने में जुटे थे। ज्यादा लागत होने से मुनाफा कम हो रहा है।
यह काम पारंपरिक रूप से दीपावली से कुछ महीने पहले शुरू हो जाता है ताकि त्योहार तक लाखों दीपक तैयार हो सकें। हालांकि आजकल बिजली के झालर से मिट्टी के दीयों की मांग कम हुई है फिर भी लोग पारंपरिक तरीके से मिट्टी के दीये खरीद रहे हैं।
गुवानी के मनीष छैला प्रजापत ने बताया कि वह प्रतिदिन 10 से 15 घड़े एवं मटकों के साथ रोजाना करीब एक हजार मिट्टी के दीये तैयार कर रहे थे। इस बार मिट्टी के दीपकों के साथ-साथ मिट्टी से बनी अन्य वस्तुओं की भी अच्छी मांग है। हालांकि कारीगरों को मेहनत और लागत के अनुपात में उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
प्रजापति महासभा के राष्ट्रीय सचिव एवं जिला प्रधान विजय सिंह ने सरकार से पारंपरिक कला को जीवित रखने के लिए आर्थिक सहयोग या विशेष योजनाएं शुरू करने की अपील की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
यह काम पारंपरिक रूप से दीपावली से कुछ महीने पहले शुरू हो जाता है ताकि त्योहार तक लाखों दीपक तैयार हो सकें। हालांकि आजकल बिजली के झालर से मिट्टी के दीयों की मांग कम हुई है फिर भी लोग पारंपरिक तरीके से मिट्टी के दीये खरीद रहे हैं।
गुवानी के मनीष छैला प्रजापत ने बताया कि वह प्रतिदिन 10 से 15 घड़े एवं मटकों के साथ रोजाना करीब एक हजार मिट्टी के दीये तैयार कर रहे थे। इस बार मिट्टी के दीपकों के साथ-साथ मिट्टी से बनी अन्य वस्तुओं की भी अच्छी मांग है। हालांकि कारीगरों को मेहनत और लागत के अनुपात में उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन
प्रजापति महासभा के राष्ट्रीय सचिव एवं जिला प्रधान विजय सिंह ने सरकार से पारंपरिक कला को जीवित रखने के लिए आर्थिक सहयोग या विशेष योजनाएं शुरू करने की अपील की है।
विज्ञापन