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Mahendragarh-Narnaul News: रामकथा में राम व भरत के चरित्र का वर्णन करते हुए आपसी भाईचारे का दिया संदेश
Sun, 01 Sep 2024 11:52 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 01 Sep 2024 11:52 PM IST
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नारनौल। मोहल्ला चौधरियान स्थित चौधरी शिवदयाल चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा रामकथा में रविवार को कथा व्यास ने भरत चरित्र, शूर्पणखा नासिका, खर-दूषण वध, सीता हरण, हनुमान चरित्र, सुग्रीव मिलन व बाली वध लीला का वर्णन किया।
कथा व्यास लक्ष्मण दास जी महाराज कहा कि भरत जी को जब पता चला कि मेरी माता ने राम जी को वन भेज दिया है तो उनपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। भरत जी ने चित्रकूट जाने के लिए सबको तैयार किया और चित्रकूट में जाकर राम जी से मिले। भरत जी को देखकर राम जी के धनुष बाण गिर पड़े । भरत जी ने भगवान राम से वापस लौटने की प्रार्थना की। राम जी ने कहा यदि मैं अयोध्या लौट चलूंगा तो शबरी माता को दर्शन कैसे दे पाउंगा। भगवान ने अपनी चरण पादुका देकर भरत जी को अयोध्या लौटाया। इस दौरान भगवान राम नाम कहा कि भरत के समान भाई कोई दूसरा नहीं हो सकता। महाराज जी ने कहा कि भरत चरित्र को नियम से सुनने से राम जी के चरणों में प्रेम उत्पन्न हो जाता है । महाराज जी ने भरत चरित्र की विस्तृत व्याख्या करते हुए कहा कि आजकल एक इंच ज़मीन के लिए कोर्ट तक लड़ाई होती है। राम जी ने भरत जी के लिए अपने अधिकार का राज्य छोड़ दिया और भरत जी ने भी उस राज्य को अपने बड़े भाई को वापस लौटा दिया।
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कथा व्यास लक्ष्मण दास जी महाराज कहा कि भरत जी को जब पता चला कि मेरी माता ने राम जी को वन भेज दिया है तो उनपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। भरत जी ने चित्रकूट जाने के लिए सबको तैयार किया और चित्रकूट में जाकर राम जी से मिले। भरत जी को देखकर राम जी के धनुष बाण गिर पड़े । भरत जी ने भगवान राम से वापस लौटने की प्रार्थना की। राम जी ने कहा यदि मैं अयोध्या लौट चलूंगा तो शबरी माता को दर्शन कैसे दे पाउंगा। भगवान ने अपनी चरण पादुका देकर भरत जी को अयोध्या लौटाया। इस दौरान भगवान राम नाम कहा कि भरत के समान भाई कोई दूसरा नहीं हो सकता। महाराज जी ने कहा कि भरत चरित्र को नियम से सुनने से राम जी के चरणों में प्रेम उत्पन्न हो जाता है । महाराज जी ने भरत चरित्र की विस्तृत व्याख्या करते हुए कहा कि आजकल एक इंच ज़मीन के लिए कोर्ट तक लड़ाई होती है। राम जी ने भरत जी के लिए अपने अधिकार का राज्य छोड़ दिया और भरत जी ने भी उस राज्य को अपने बड़े भाई को वापस लौटा दिया।
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