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वकालक के साथ दीपक प्रतिमाह 60 क्विंटल मशरूम उगाकर कमा रहे 4.80 लाख रुपये

Sun, 20 Mar 2022 11:51 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 20 Mar 2022 11:51 PM IST
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Deepak is earning Rs 4.80 lakhs by growing 60 quintals of mushrooms per month with advocate
मशरूम यूनिट में जांच करते दीपक कुमार। संवाद - फोटो : Narnol
पेश से वकील गांव दुलोठ अहीर निवासी दीपक कुमार ने छह माह पहले 65 बैग की यूनिट लगाकर मशरूम का उत्पादन शुरू किया था, जो आज 2 हजार बैग पहुंच चुका है। इससे वे 60 क्विंटल मशरूम उत्पाद कर प्रतिमाह 4.80 लाख रुपये कमा रहे हैं। दीपक कुमार ने अपने पिता राजेश कुमार से प्रेरणा लेकर छह माह पहले वकालत के साथ मशरूम का उत्पादन शुरू किया था। इसके लिए दीपक ने कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार व मशरूम अनुसंधान केंद्र मुरथल से 18 दिन का प्रशिक्षण लिया था। इसके उपरांत कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा उपलब्ध कराए गए 65 बैग यूनिट से काम शुरू किया था। समय के साथ-साथ बैग यूनिट में बढ़ोतरी करते गए और आज वह 2 हजार पहुंच चुकी है। इन यूनिटों से प्रतिमाह 60 क्विंटल मशरूम का उत्पादन होता है। दीपक द्वारा उगाए गए मशरूम की गुणवत्ता इतनी अच्छी है कि गुरुग्राम और रेवाड़ी के बाजार में इसकी लगातार मांग बढ़ रही है।
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दीपक यादव ने बताया कि एक बैग यूनिट पर करीब 120 रुपये का खर्च आता है। इसके बाद एक बैग से औसतन 3 किलोग्राम मशरूम का उत्पादन किया जा सकता है। इसका बाजार में औसतन भाव 120 से 150 रुपये तक होता है। दो हजार बैग खरीदने के लिए औसतन 2.40 रुपये खर्च आता है। इसके बाद एक बैग से औसतन 3 किलोग्राम मशरूम लिया जा सकता है, जिसका बाजार भाव 120 से 150 तक होता है। इस तरह से करीब 4.80 लाख रुपये कमाया जा सकता है। दीपक ने बताया कि छह माह में 35 लाख रुपये की लागत से चार हजार बैग की यूनिट तैयार करने वाला हूं। यह यूनिट वातानुकूलित होगी, जिससे पूरे साल मशरूम का उत्पादन किया जा सकेगा।
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बेेरोजगारों के लिए वरदान
मशरूम उत्पादन को कोई भी भूमिहीन एवं बेरोजगार युवा व्यवसाय के रूप में अपनाकर अपनी आजीविका का साधन बना सकता है। इसमें भूमि की आवश्यकता नहीं होती। एक हजार बैग की यूनिट के लिए 40 बाई 20 फुट जगह की आवश्यकता होती है तथा इसमें रैक लगाकर स्वयं भी यूनिट तैयार कर सकते हैं। कंपोस्ट बैग स्वयं तैयार किए जाएं तो इसमें और अधिक बचत हो सकती है। कोई भी इसे सहायक व्यवसाय के रूप में अपना सकता है। डॉ. नरेंद्र सिंह, मशरूम विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र, महेंद्रगढ़।
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