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नगर परिषद के ईओ पर 25 हजार जुर्माना

Wed, 01 Jun 2016 11:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
ब्यूरो/अमर उजाला Updated Wed, 01 Jun 2016 11:50 PM IST
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आरटीआई कानून भले ही सच सामने लाने का आम आदमी का हथियार हो लेकिन लेकिन कुछ अधिकारियों के लिए यह कानून एक मजाक बनकर रह गया है। नगर परिषद नारनौल में जो भी आरटीआई लगाता है उसे जवाब नहीं मिलता। इसी का नतीजा है कि बार-बार राज्य  सूचना आयुक्त नगर परिषद के अधिकारियों पर आरटीआई नहीं देने पर जुर्माना लगा रहे हैं।  बता दें के कुछ दिन पहले भी एक मामला आया था। जिसमें  नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी पर राज्य सूचना आयुक्त ने समय पर आरटीआई नहीं देने पर जुर्माना और हर्जाना लगाया था। अब एक अन्य मामला सामने आया है जिसके तहत राज्य सूचना आयुक्त ने नगर परिषद ईओ के द्वारा आरटीआई नहीं देने और कारण बताओ नोटिस का जवाब नहीं देने के चलते उन पर  25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। मामला शहर के शिवाजी नगर निवासी बाबूलाल वर्मा द्वारा आरटीआई मांगने के दस मास बाद तक उन्हें जानकारी नहीं देने का है।
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दस मास तक नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी द्वारा कोई संतोषजनक जवाब नहीं देने पर राज्य सूचना आयुक्त ने अब जुर्माना के अलावा कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई करने को कहा है। आरटीआई कार्यकर्ता बाबूलाल वर्मा ने बताया कि उसने 20 जुलाई 2015 को नगर परिषद से एक आरटीआई मांगी थी। जिसके लिए वे राज्य सूचना आयुक्त तक जा चुके हैं लेकिन आज तक उसे आरटीआई नहीं मिली है। इस दौरान वे प्रथम अपील 31 अगस्त 2015 को नगराधीश को दी। इसके बाद भी उसे आरटीआई नहीं मिली तो उन्होंने राज्य सूचना आयुक्त को अपनी व्यथा बताई। राज्य सूचना आयुक्त ने इस शिकायत की सुनवाई करते हुए नगर परिषद के ईओ को नोटिस जारी कर 8 फरवरी 2016 को अपने  चंडीगढ़ स्थित कार्यालय में बुलाया था। साथ ही अधिकारी को चेतावनी दी कि यदि 4 मई तक प्रार्थी को अभी भी आरटीआई मुहैया नहीं करवाई तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। 4 मई तक भी ईओ राज्य सूचना आयुक्त के कार्यालय में नहीं पहुंचे। उनके स्थान पर भवन निरीक्षक आए और बताया गया कि  ईओ बीमार हैं। इस दिन भी प्रार्थी को आरटीआई नहीं देने और नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं देने पर राज्य सूचना आयुक्त ने इसे गंभीरता से लेते हुए  शहर के नगराधीश को आदेश दिया कि ईओ बीएन भारती के वेतन से जुर्माने के रूप में 25 हजार रुपये काटे जाएं, उक्त राशि बराबर लगातार पांच किस्तों में वसूली जाए। यह राशि जुलाई 2016 से काटनी शुरू की जाए।
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