नारनौल: गलत तरीके से कराया वाहनों का पुनर्पंजीकरण, एएसपी ने अधिकारियों, कर्मचारियों व वाहन मालिकों पर दर्ज कराए केस
एएसपी ने स्वयं शिकायत देकर पंजीकरण अथॉरिटी के अधिकारियों एवं कर्मचारियों और मालिकों के खिलाफ नारनौल, महेंद्रगढ़ तथा कनीना थानों में मामले दर्ज करवाएं हैं। पुलिस ने केस दर्ज जांच शुरू कर दी है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नारनौल में वाहनों के पुनर्पंजीकरण में फर्जीवाड़ा हो रहा है। स्वयं सहायक पुलिस अधीक्षक महेंद्रगढ़ सिद्धांत जैन ने इनकी जांच की तो पाया कि 22 वाहनों का गलत तरीके से पंजीकृत किया गया है। एएसपी ने स्वयं शिकायत देकर पंजीकरण अथॉरिटी के अधिकारियों एवं कर्मचारियों और मालिकों के खिलाफ नारनौल, महेंद्रगढ़ तथा कनीना थानों में मामले दर्ज करवाएं हैं। अब तक 22 वाहन मालिकों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं।
बता दें कि परिवहन उपायुक्त हरियाणा चंडीगढ़ की ओर से पुनर्पंजीकरण फर्जीवाड़े के मामले में 26 नवंबर को एक पत्र जारी किया था। जिसमें कुछ वाहनों की लिस्ट जारी कर उनका पुनर्पंजीकरण जांचने का आदेश दिया था। जब महेंद्रगढ़ एएसपी ने नारनौल, महेंद्रगढ़ एवं कनीना की पंजीकरण अथॉरिटी से रिकॉर्ड मंगवा कर जांच की तो 24-25 वाहनों का फर्जी तरीके से पुनर्पंजीकरण किया हुआ मिला।
इसमें 14 गाड़ियां नारनौल, 4 कनीना तथा पांच महेंद्रगढ़ की थीं। एएसपी ने इसकी शिकायत तीनों स्थानों के पुलिस स्टेशन में दी। उनकी शिकायत के आधार पर वाहन मालिकों तथा कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
इन स्थानों पर हुआ फर्जीवाड़ा
किसी भी वाहन को खरीदने-बेचने के लिए एनओसी की आवश्यकता होती है। यह एनओसी संबंधित जगह की पंजीकरण अथॉरिटी से ही मिलती है। उक्त गाड़ियों की गुरुग्राम, टोहाना, सिवानी, खरखौदा, पानीपत, जगाधरी आदि से एनओसी के बारे में पता किया तो उस स्थान पर ही पहले फ्राड किया हुआ था।
संबंधित अथॉरिटी ने एनओसी के अंदर गाड़ी के चेसिस नंबर पर स्टार लगाकर दिया था, जबकि वास्तविकता यह है कि गाड़ियों के चेसिस नंबर पर स्टार लिखा नहीं होता। जब नारनौल, कनीना, महेंद्रगढ़ में उक्त गाड़ियों का पंजीकरण करवाया तो यहां के कर्मचारियों ने भी उसी एनओसी के आधार पर दस्तावेज में स्टार लगाकर री पंजीकरण कर दिया, जोकि गलत है।
स्टार लगाकर छुपाया गया पुराना पंजीकरण
जांच में एएसपी ने सभी वाहनों का रिकॉर्ड निकलवाया तो तीनों गाड़ियों का पुराना नंबर मिला। साथ ही फीस डिटेल में चेसिस नंबर में (*) लगाया हुआ है। एक अलग अंक (*) स्टार जोड़ने से ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में पुराने असली चेसिस नंबर पकड़ में नहीं आ पाते हैं। इससे पंजीकरण वैध लगता है। साथ ही तीनों गाड़ियों की एनओसी भी नहीं ली गई। फाइल पर गाड़ियों के इंजन व चेसिस नंबर की ट्रेसिंग नहीं की गई है। साथ ही कार मालिकों के पता का सत्यापन नहीं करवाया गया। अवैध पंजीकरण करके गाड़ियों की दूसरे जिलों के लिए एनओसी जारी कर दी गई।