{"_id":"5887a2fa4f1c1bde3bcf43c8","slug":"coach-distric-5-turnament-stadium","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना ‘द्रोणाचार्य’ कैसे तैयार होंगे अर्जुन ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना ‘द्रोणाचार्य’ कैसे तैयार होंगे अर्जुन
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 25 Jan 2017 12:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश सरकार ने खेलों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाकर खिलाड़ियों को प्रोत्साहित कर रही है, लेकिन महेंद्रगढ़ जिले के ‘अर्जुनों’ को अब ‘द्रोणाचार्यों’ की तलाश है। अपने खेल में बेहतर निखार हो और कामयाबी मिले, इसके लिए जिले के खिलाड़ी कई वर्षों से कोच की आस लगाए बैठे हैं। यहीं नहीं, नए स्टेडियम भी बिना कोच सुनसान हो चले है। ऐसे में देश में सर्वश्रेष्ठ खेलनीति का बखान करने वाला प्रदेश का खेल विभाग की असली परतें जिले में साफ दिखाई दे रही हैं।
वर्ष 2010 में तत्कालीन कांग्रेस की सरकार ने प्रदेश में स्पैट योजना आरंभ की थी। इससे युवाओं में खेल के प्रति कुछ रुझान बढ़ा था लेकिन मौजूदा भाजपा की प्रदेश सरकार ने स्पैट योजना को बंद कर प्रदेश के सभी जिलों में खेल नर्सरियां खोलने की योजना बनाई है। इसके लिए सरकार द्वारा प्रत्येक जिले से खेल नर्सरियां खोलने के आवेदन भी मांगे गए थे लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी सरकार की यह योजना भी सिरे नहीं चढ़ पाई है।
जिले में खुलेंगी 20 नर्सरियां
प्रदेश सरकार की योजना के प्रत्येक जिले के स्कूलों में खेल नर्सरियां खोली जाएंगी। इस योजना के तहत जिला महेंद्रगढ़ में भी 20 नर्सरियां खुलनी है। इसमें 10 लड़कियों व 10 लड़कों नर्सरियां शामिल है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है लेकिन अभी तक योजना अधर में लटकी हुई है।
विज्ञापन
पांच कोच के सहारे विभाग
खेल विभाग में फिलहाल पांच कोच हैं। इसमें दो वॉलीबाल कोच जोकि धानौता व महरमपुर में तैनात किए गए है, जबकि दो कुश्ती कोच बाघोत व सतनाली क्षेत्र में प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसके अलावा एक एथलेटिक्स कोच महेंद्रगढ़ में खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण दे रहा है। जबकि जिले में विभिन्न खेलों के लिए 25 कोचों की जरूरत है।
कहां कितने है स्टेडियम
नारनौल मुख्यालय में नेताजी सुभाषचंद बोस स्टेडियम व महेंद्रगढ़ में मुख्य स्टेडियम स्थापित है। स्टेडियम में तैयार किया गया बैडमिंटन कोट भी कोच का इंतजार कर रहा है। इसके अलावा राजीव गांधी के नाम से मिनी स्टेडियम डोहरकलां, सीहमा, धौलेड़ा, पाली व छितरोली में है।
छह माह में 15 से हुए पांच कोच
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से खेलों की ओर विशेष ध्यान देते हुए प्रदेश के सभी जिलों में प्रशिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। इसमें महेंद्रगढ़ को भी 15 कोच मिले थे। जिनकी नियुक्ति के बाद छह माह बाद ही किसी की बदली हो गई और किसी ने राजनीतिक अप्रोच लगवाकर अपना तबादला करवा लिया। इस तरह जिला महेंद्रगढ़ में वर्तमान में केवल 5 कोच बचे हैं।
मैं एथलीट का खिलाड़ी हूं। पिछले काफी वर्षों से स्टेडियम में प्रैक्टिस कर रहा हूं। इस दौरान एक भी कोच एथलीट का नहीं आया। स्टेडियम में बैडमिंटन कोट तो सदा ही बंद रहता है। कोच आने पर ही शायद इसको खोला जाएगा।---जयप्रकाश
कई वर्षों से सुभाष स्टेडियम में बास्केटबाल खेल रहा हूं। ग्राउंड में भी गई जगह गड्ढे को चुके हैं। खेल नियम कम ही पता होने के कारण अपने ही नियम बनाकर खेल रहे हैं। पता नहीं खेल विभाग कब कोच भेजेगा।--- अश्वनी कुमार
बिना कोच आगे बढ़ना बहुत मुश्किल है। फिर भी अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। खेल सामान की डिमांड करते हैं तो उच्चाधिकारी कोच के बिना सामान नहीं देने की बात कहते हैं। -हरपाल सेन
जिले में कोच नहीं होने के कारण खिलाड़ी सही से प्रक्टिस नहीं कर पा रहे हैं। खिलाड़ियों की कमी दूर हो तो यहां की खेल प्रतिभाएं निखरें।- हिमांशु, खिलाड़ी
महेंद्रगढ़ में वॉलीबाल, कुश्ती व एथलेटिक्स खेल के पांच कोच है। जबकि अन्य खेलों व खिलाड़ियों के हिसाब से जिले को 25 कोचों की जरूरत है। इसके लिए विभाग को पत्र भेजा गया है।--जय सिंह पिलानियां, जिला खेल अधिकारी नारनौल
विज्ञापन
वर्ष 2010 में तत्कालीन कांग्रेस की सरकार ने प्रदेश में स्पैट योजना आरंभ की थी। इससे युवाओं में खेल के प्रति कुछ रुझान बढ़ा था लेकिन मौजूदा भाजपा की प्रदेश सरकार ने स्पैट योजना को बंद कर प्रदेश के सभी जिलों में खेल नर्सरियां खोलने की योजना बनाई है। इसके लिए सरकार द्वारा प्रत्येक जिले से खेल नर्सरियां खोलने के आवेदन भी मांगे गए थे लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी सरकार की यह योजना भी सिरे नहीं चढ़ पाई है।
विज्ञापन
जिले में खुलेंगी 20 नर्सरियां
प्रदेश सरकार की योजना के प्रत्येक जिले के स्कूलों में खेल नर्सरियां खोली जाएंगी। इस योजना के तहत जिला महेंद्रगढ़ में भी 20 नर्सरियां खुलनी है। इसमें 10 लड़कियों व 10 लड़कों नर्सरियां शामिल है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है लेकिन अभी तक योजना अधर में लटकी हुई है।
विज्ञापन
पांच कोच के सहारे विभाग
खेल विभाग में फिलहाल पांच कोच हैं। इसमें दो वॉलीबाल कोच जोकि धानौता व महरमपुर में तैनात किए गए है, जबकि दो कुश्ती कोच बाघोत व सतनाली क्षेत्र में प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसके अलावा एक एथलेटिक्स कोच महेंद्रगढ़ में खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण दे रहा है। जबकि जिले में विभिन्न खेलों के लिए 25 कोचों की जरूरत है।
कहां कितने है स्टेडियम
नारनौल मुख्यालय में नेताजी सुभाषचंद बोस स्टेडियम व महेंद्रगढ़ में मुख्य स्टेडियम स्थापित है। स्टेडियम में तैयार किया गया बैडमिंटन कोट भी कोच का इंतजार कर रहा है। इसके अलावा राजीव गांधी के नाम से मिनी स्टेडियम डोहरकलां, सीहमा, धौलेड़ा, पाली व छितरोली में है।
छह माह में 15 से हुए पांच कोच
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से खेलों की ओर विशेष ध्यान देते हुए प्रदेश के सभी जिलों में प्रशिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। इसमें महेंद्रगढ़ को भी 15 कोच मिले थे। जिनकी नियुक्ति के बाद छह माह बाद ही किसी की बदली हो गई और किसी ने राजनीतिक अप्रोच लगवाकर अपना तबादला करवा लिया। इस तरह जिला महेंद्रगढ़ में वर्तमान में केवल 5 कोच बचे हैं।
मैं एथलीट का खिलाड़ी हूं। पिछले काफी वर्षों से स्टेडियम में प्रैक्टिस कर रहा हूं। इस दौरान एक भी कोच एथलीट का नहीं आया। स्टेडियम में बैडमिंटन कोट तो सदा ही बंद रहता है। कोच आने पर ही शायद इसको खोला जाएगा।---जयप्रकाश
कई वर्षों से सुभाष स्टेडियम में बास्केटबाल खेल रहा हूं। ग्राउंड में भी गई जगह गड्ढे को चुके हैं। खेल नियम कम ही पता होने के कारण अपने ही नियम बनाकर खेल रहे हैं। पता नहीं खेल विभाग कब कोच भेजेगा।--- अश्वनी कुमार
बिना कोच आगे बढ़ना बहुत मुश्किल है। फिर भी अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। खेल सामान की डिमांड करते हैं तो उच्चाधिकारी कोच के बिना सामान नहीं देने की बात कहते हैं। -हरपाल सेन
जिले में कोच नहीं होने के कारण खिलाड़ी सही से प्रक्टिस नहीं कर पा रहे हैं। खिलाड़ियों की कमी दूर हो तो यहां की खेल प्रतिभाएं निखरें।- हिमांशु, खिलाड़ी
महेंद्रगढ़ में वॉलीबाल, कुश्ती व एथलेटिक्स खेल के पांच कोच है। जबकि अन्य खेलों व खिलाड़ियों के हिसाब से जिले को 25 कोचों की जरूरत है। इसके लिए विभाग को पत्र भेजा गया है।--जय सिंह पिलानियां, जिला खेल अधिकारी नारनौल