{"_id":"64f0db56a56c00c7b805140b","slug":"cleanliness-survey-work-completed-but-budget-not-received-for-publicity-narnol-news-c-196-1-nnl1001-3809-2023-08-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahendragarh-Narnaul News: स्वच्छता सर्वेक्षण का काम पूरा, लेकिन प्रचार के लिए बजट नहीं मिला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahendragarh-Narnaul News: स्वच्छता सर्वेक्षण का काम पूरा, लेकिन प्रचार के लिए बजट नहीं मिला
Thu, 31 Aug 2023 11:56 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Thu, 31 Aug 2023 11:56 PM IST
विज्ञापन
नारनौल। शहरी एवं आवासीय मंत्रालय की टीम की ओर से नगर परिषद व पालिकाओं में हर साल कराए जाने वाला स्वच्छता सर्वेक्षण का काम पूरा हो गया है, लेकिन सर्वेक्षण से पहले जाने वाली प्रचार गतिविधियों के लिए बजट तक नहीं मिल सका है। यह बजट हर साल सर्वेक्षण से पहले नगर परिषद व पालिकाओं को जारी कर दिया जाता है। ताकि वह गतिविधियां करवा सकें।
प्रचार गतिविधियों के लिए बजट न आने के कारण इस साल जारी होने वाली रैंकिंग पर असर पडे़गा, क्योंकि टीम की ओर से गतिविधियों को भी गिना जाता है। इस बार सर्वेक्षण से संबंधित प्रचार गतिविधि नहीं हुई। इसके चलते रैंकिंग पर असर पड़ना लाजमी है। शहरों में होर्डिंग, बैनर लगवाने के अलावा वॉल पेंटिंग का काम, स्कूल, कॉलेजों में जागरूकता का काम कराया जाता है, लेकिन बजट न आने के कारण इस बार ऐसा कोई जागरूकता कार्यक्रम नहीं हो सका है। प्रचार गतिविधियों के लिए हर साल लगभग साढ़े तीन से चार लाख रुपये का बजट जारी किया जाता है, जो सीधा खातों में डाला जाता है। इसके चलते नगर परिषद व पालिकाएं भी ऑनलाइन कागजात जमा कराने के लिए ऐसी कोई गतिविधियां नहीं दिखा सके।
इसी माह आई थीं टीमें
स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर अगस्त में शहरी एवं आवासीय मंत्रालयों की टीमों ने नारनौल नगर परिषद के अलावा महेंद्रगढ़, अटेली, नांगल चौधरी, कनीना की नगर पालिकाओं का दौरा किया था। यहां टीम ने लोगों से फीडबैक भी ली थी। इसके अलावा शहरों का निरीक्षण कर वहां की सफाई व्यवस्था, शौचालयों, नालों की सफाई, अतिक्रमण, पानी निकासी का प्रबंध सहित अन्य जानकारी एकत्रित की थी। अब इसका परिणाम जारी होना बाकी है।
विज्ञापन
शहर में जगह-जगह गंदगी के लगे ढेर, लोग परेशान
शहर में सफाई को लेकर लोगों में रोष रहता है। शहर में बाजार व अन्य जगहों पर समय पर सफाई न होने के कारण लोग गलियों के कॉर्नर पर ही कूड़ा फेंक देते हैं। लोगों की मानें तो कई बार कई-कई दिन तक कूड़ा नहीं उठ पाता है।
वर्जन
प्रचार गतिविधियों के लिए हर साल बजट आता है, लेकिन इस बार अब तक नहीं आया है। इसके चलते गतिविधियां नहीं करवाई जा सकी है।
-दीपक दुबे, सिटी टीम लीडर, स्वच्छ भारत अभियान, नारनौल
विज्ञापन
प्रचार गतिविधियों के लिए बजट न आने के कारण इस साल जारी होने वाली रैंकिंग पर असर पडे़गा, क्योंकि टीम की ओर से गतिविधियों को भी गिना जाता है। इस बार सर्वेक्षण से संबंधित प्रचार गतिविधि नहीं हुई। इसके चलते रैंकिंग पर असर पड़ना लाजमी है। शहरों में होर्डिंग, बैनर लगवाने के अलावा वॉल पेंटिंग का काम, स्कूल, कॉलेजों में जागरूकता का काम कराया जाता है, लेकिन बजट न आने के कारण इस बार ऐसा कोई जागरूकता कार्यक्रम नहीं हो सका है। प्रचार गतिविधियों के लिए हर साल लगभग साढ़े तीन से चार लाख रुपये का बजट जारी किया जाता है, जो सीधा खातों में डाला जाता है। इसके चलते नगर परिषद व पालिकाएं भी ऑनलाइन कागजात जमा कराने के लिए ऐसी कोई गतिविधियां नहीं दिखा सके।
विज्ञापन
इसी माह आई थीं टीमें
स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर अगस्त में शहरी एवं आवासीय मंत्रालयों की टीमों ने नारनौल नगर परिषद के अलावा महेंद्रगढ़, अटेली, नांगल चौधरी, कनीना की नगर पालिकाओं का दौरा किया था। यहां टीम ने लोगों से फीडबैक भी ली थी। इसके अलावा शहरों का निरीक्षण कर वहां की सफाई व्यवस्था, शौचालयों, नालों की सफाई, अतिक्रमण, पानी निकासी का प्रबंध सहित अन्य जानकारी एकत्रित की थी। अब इसका परिणाम जारी होना बाकी है।
विज्ञापन
शहर में जगह-जगह गंदगी के लगे ढेर, लोग परेशान
शहर में सफाई को लेकर लोगों में रोष रहता है। शहर में बाजार व अन्य जगहों पर समय पर सफाई न होने के कारण लोग गलियों के कॉर्नर पर ही कूड़ा फेंक देते हैं। लोगों की मानें तो कई बार कई-कई दिन तक कूड़ा नहीं उठ पाता है।
वर्जन
प्रचार गतिविधियों के लिए हर साल बजट आता है, लेकिन इस बार अब तक नहीं आया है। इसके चलते गतिविधियां नहीं करवाई जा सकी है।
-दीपक दुबे, सिटी टीम लीडर, स्वच्छ भारत अभियान, नारनौल