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Mahendragarh-Narnaul News: दावे फीके और पानी काला

Wed, 07 Jan 2026 11:33 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 07 Jan 2026 11:33 PM IST
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Claims are pale and the water is black
साहबी बैराज में प्रदूषित पानी। संवाद
रेवाड़ी। साहबी बैराज में एसटीपी प्लांट से दूषित जल छोड़े जाने के कारण आसपास के गांवों का भूजल प्रदूषित हो गया है। डुंगरवास, मसानी, खलियावास, रसगन, खरखड़ा, निखरी, ततारपुर खालसा और भटसाना के भूजल में आयरन, मैग्नीशियम और फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने के कारण इसका सेवन खतरनाक साबित हो सकता है।
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लोग अनजाने में सालों से इस प्रदूषित पानी का सेवन कर रहे हैं जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यहां नल के पानी में टीडीएस और कुल क्षारीयता की मात्रा वांछनीय सीमाओं से कहीं अधिक पाई जा चुकी है।
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यह स्थिति न केवल पानी के स्वाद और गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है बल्कि इसे पीने के लिए पूरी तरह से अनुपयुक्त बना रही है। खरखड़ा और निखरी गांवों के हैंडपंपों के पानी में मैग्नीशियम की मात्रा 30 पीपीएम से अधिक पाई जा चुकी है जबकि रसगन के नल के पानी में भी यह स्तर सुरक्षित सीमा से अधिक है।
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भटसाना और निखरी के हैंडपंपों के पानी में लौह की मात्रा 0.3 पीपीएम से अधिक पाई गई जो डुंगरवास, मसानी, खलियावास, और रसगन के नल के पानी में भी पाई गई। भटसाना के हैंडपंप और मसानी व खलियावास के नल के पानी में फ्लोराइड की मात्रा 1.0 पीपीएम से अधिक है।
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औद्योगिक अपशिष्ट में सीओडी और बीओडी का स्तर 9 गुना है अधिक

2025 में एनजीटी में सुनवाई के दौरान जामिया मिलिया इस्लामिया की रिपोर्ट में बताया गया था कि घरेलू सीवरेज के मुकाबले औद्योगिक अपशिष्ट में सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) और बीओडी (बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड) के स्तर 9 गुना तक अधिक थे। औद्योगिक प्रदूषण से प्रभावित 5 मुख्य स्थानों पर जल की गुणवत्ता गंभीर रूप से खराब पाई गई थी। एसटीपी के आउटलेट्स पर पानी की गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में असफल रही।
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एनजीटी कोर्ट में चल रहा है मामला
याचिकाकर्ता गांव खरखड़ा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश यादव ने बताया कि साहबी बैराज में एसटीपी प्लांट की तरफ से वर्षों से छोड़े जा रहे प्रदूषित पानी की वजह से आसपास के दर्जनों गांवों का भूमिगत जलस्तर और पीने का पानी भी अपनी गुणवत्ता खो चुका है। पिछले वर्ष जिले के डुंगरवास, मसानी, खलियावास, रसगन, खरखड़ा, निखरी, ततारपुर खालसा और भटसाना गांवों में पेयजल की गुणवत्ता पर रिपोर्ट में बड़ी कमी पाई गई थी। सभी क्षेत्र साहबी बैराज के आसपास के लगते हैं। हजारों की संख्या में मछलियां भी मरी थीं। मामला एनजीटी कोर्ट में चल रहा है।
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दूषित पानी का सेवन करने से हो सकती हैं विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं
दूषित पानी का सेवन करने से विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। उच्च टीडीएस और मैग्नीशियम का स्तर किडनी और लीवर को प्रभावित कर सकता है जिससे किडनी स्टोन, लीवर की बीमारियां और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। मैग्नीशियम और लौह की अधिकता से हृदय संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं जिनमें उच्च रक्तचाप और हृदय रोग प्रमुख हैं। फ्लोराइड की अधिक मात्रा दांतों और हड्डियों की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है जिसमें दांतों का क्षय, दांतों का झड़ना, और हड्डियों की कमजोरी शामिल है। लौह की अधिकता से त्वचा में खुजली, दाने, लालिमा और बालों का झड़ना जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
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बावल खंड के भी कई गांवों की स्थिति खराब
बावल खंड के भी कई गांवों की स्थिति खराब है। बनीपुर, आसलवास, पातुहेड़ा, ड्योढई, सुठानी, जलियावास व इब्राहिमपुर इन जगहों पर पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं है। साल 2006 में आईएमटी बावल की स्थापना के बाद पानी में इतना फ्लोराइड घोल दिया गया कि बनीपुर में 3500 की आबादी में से 70 प्रतिशत लोग गठिया, जोड़ों के दर्द और फ्लोरोसिस से अपंगता की ओर धकेल दिए गए हैं। यहां हर घर में कोई न कोई टूटी हुई चाल, मुड़े हुए हाथ-पैर या धीमे-धीमे झुकती रीढ़ के साथ जी रहा है। शुरुआत में जब लोगों को गठिया और जोड़ों में दर्द उठा तो डॉक्टरों से पता लगा कि गांव के पानी में फ्लोराइड है। फैक्टरियों का खतरनाक रसायन युक्त पानी जमीन में डालने से यह जहर हो गया है। साल 2007 में इस पानी का टीडीएस 1000 से अधिक मिला था। इसके बाद सक्षम लोगों ने घरों में आरओ लगवा लिया।

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धारूहेड़ा और बावल में हमने समय-समय पर कार्रवाई की है। अगर फिर से कोई शिकायत आती है तो जरूर कार्रवाई की जाएगी।
-अजय कुमार, एसडीओ, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड।


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दूषित पानी की समस्या को लेकर 219 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बन चुका है जिसका काम सिंचाई विभाग को करना है। पहले चरण में 125 करोड़ रुपये की लागत से साहबी बराज पर पंप हाउस बनाया जाएगा। यहां के पानी को रिफिलिंग किया जाएगा। इसके बाद लाइन बिछाकर इस पानी को ड्रेन नंबर आठ में छोड़ा जाएगा। तीन विभाग आपस में मिलकर प्रोजेक्ट की कुल राशि का वहन करेंगे। -वीके बाघोतिया, एक्सइएन, सिंचाई विभाग।

साहबी बैराज में प्रदूषित पानी। संवाद

साहबी बैराज में प्रदूषित पानी। संवाद

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