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विदेशी संस्कृति का त्योहार है क्रिसमस, ग्रामीण अंचल में संस्कृति खराब न करें निजी स्कूल: महेश बोहरा
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कनीना(महेंद्रगढ़)। क्रिसमस विदेशी संस्कृति का त्योहार है। ऐसे में जिले के निजी स्कूल इसको न मनाए। हमारे ग्रामीण आंचल में इस प्रकार से विदेशी संस्कृति को बढ़ावा देना सरासर गलत है। अगर मनाना ही है तो फिर राम नवमी और शिवरात्रि जैसे पर्वों को मनाया जाना चाहिए। यह बात हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक महेश बोहरा ने कही।
संयोजक महेश बोहरा ने कहा कि इस बार वे सभी निजी स्कूल से आह्वान किया है कि इस बार ये विदेशी संस्कृति का त्योहार न मनाए। अगर निजी स्कूलों ने इस बार क्रिसमस का त्योहार मनाया तो इन स्कूलों का विरोध भी किया जाएगा और बहिष्कार भी होगा। वे इस विषय पर गांवों के लोगों को भी जागरूक करेंगे कि वे अपने बच्चों को इस विदेशी संस्कृति की गिरफ्त में न आने दे।
उन्होंने कहा कि इस विषय पर उनकी बात हिंदू जागरण मंच के युवा कार्य प्रांत प्रमुख संदीप मालड़ा से भी हुई है। संदीप मालड़ा ने कहा है कि जिले के सभी कस्बों एवं शहरों के स्कूलों की निगरानी के लिए युवाओं की टोलियां बनाई जाएंगी जो जरूरत पड़ने पर स्कूल प्रशासन को चेताएगी। हालांकि इस बार 25 दिसंबर को रविवार होने की वजह से अवकाश रहेगा पर अगर स्कूलों ने 24 दिसंबर को भी क्रिसमस पर कोई कार्यक्रम आयोजित किए तो विरोध होगा। गांव के लोगों से भी आह्वान किया जाएगा कि ऐसे स्कूलों का बहिष्कार करें और अपनी संस्कृति को सहेजने में सक्रिय भूमिका निभायें। सभी स्कूल संचालकों को भी चेताया कि क्रिसमस पर कार्यक्रम आयोजित किए गये तो विरोध और सामाजिक बहिष्कार के लिए स्कूल तैयार रहें।
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संयोजक महेश बोहरा ने कहा कि इस बार वे सभी निजी स्कूल से आह्वान किया है कि इस बार ये विदेशी संस्कृति का त्योहार न मनाए। अगर निजी स्कूलों ने इस बार क्रिसमस का त्योहार मनाया तो इन स्कूलों का विरोध भी किया जाएगा और बहिष्कार भी होगा। वे इस विषय पर गांवों के लोगों को भी जागरूक करेंगे कि वे अपने बच्चों को इस विदेशी संस्कृति की गिरफ्त में न आने दे।
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उन्होंने कहा कि इस विषय पर उनकी बात हिंदू जागरण मंच के युवा कार्य प्रांत प्रमुख संदीप मालड़ा से भी हुई है। संदीप मालड़ा ने कहा है कि जिले के सभी कस्बों एवं शहरों के स्कूलों की निगरानी के लिए युवाओं की टोलियां बनाई जाएंगी जो जरूरत पड़ने पर स्कूल प्रशासन को चेताएगी। हालांकि इस बार 25 दिसंबर को रविवार होने की वजह से अवकाश रहेगा पर अगर स्कूलों ने 24 दिसंबर को भी क्रिसमस पर कोई कार्यक्रम आयोजित किए तो विरोध होगा। गांव के लोगों से भी आह्वान किया जाएगा कि ऐसे स्कूलों का बहिष्कार करें और अपनी संस्कृति को सहेजने में सक्रिय भूमिका निभायें। सभी स्कूल संचालकों को भी चेताया कि क्रिसमस पर कार्यक्रम आयोजित किए गये तो विरोध और सामाजिक बहिष्कार के लिए स्कूल तैयार रहें।
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