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Mahendragarh-Narnaul News: बाल विवाह से बच्चों को शारीरिक परेशानी होती है
Wed, 04 Dec 2024 11:49 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 04 Dec 2024 11:49 PM IST
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फोटो नंबर-19कार्यक्रम को संबोधित करती सरिता शर्मा। स्रोत-प्रशासन
नारनौल। राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल सिहमा और हुडीना में घरेलू हिंसा व बाल विवाह रोकने के लिए जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम संरक्षण अधिकारी एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी सरिता शर्मा व वन स्टॉप सेंटर प्रशासक वंदना की अध्यक्षता में हुआ। इस मौके पर जागरूकता रैली भी निकाली गई।
संरक्षण अधिकारी एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी सरिता शर्मा ने घरेलू हिंसा अधिनियम व बाल विवाह से होने वाले नुकसान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि बाल विवाह से बच्चों को शारीरिक व मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के को नाबालिग माना जाता है।
यदि कम आयु में विवाह किया जाता है तो यह संज्ञेय और गैर जमानती अपराध है। ऐसा कोई भी व्यक्ति जो बाल विवाह करवाता है, उसको बढ़ावा देता है या उसकी सहायता करता है। तो 2 साल तक की सजा और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
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बाल विवाह के आयोजन से संबंधित जानकारी देने के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी, पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112, मजिस्ट्रेट या चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 व 181 पर संपर्क कर सूचना दे सकते हैं। इस मौके पर वन स्टॉप सेंटर प्रशासक वंदना ने वन स्टॉप सेंटर के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि अगर किसी महिला के साथ हिंसा होती है तो उसकी सूचना हेल्पलाइन नंबर 181 पर दें, उसको तुरंत सहायता मुहैया करवाई जाएगी। उन्होंने बताया कि वन स्टाप सेंटर में एक ही छत के नीचे महिलाओं को निशुल्क विधिक परामर्श व अधिकतम पांच दिन आश्रय देने का प्रावधान है।
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संरक्षण अधिकारी एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी सरिता शर्मा ने घरेलू हिंसा अधिनियम व बाल विवाह से होने वाले नुकसान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि बाल विवाह से बच्चों को शारीरिक व मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के को नाबालिग माना जाता है।
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यदि कम आयु में विवाह किया जाता है तो यह संज्ञेय और गैर जमानती अपराध है। ऐसा कोई भी व्यक्ति जो बाल विवाह करवाता है, उसको बढ़ावा देता है या उसकी सहायता करता है। तो 2 साल तक की सजा और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
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बाल विवाह के आयोजन से संबंधित जानकारी देने के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी, पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112, मजिस्ट्रेट या चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 व 181 पर संपर्क कर सूचना दे सकते हैं। इस मौके पर वन स्टॉप सेंटर प्रशासक वंदना ने वन स्टॉप सेंटर के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि अगर किसी महिला के साथ हिंसा होती है तो उसकी सूचना हेल्पलाइन नंबर 181 पर दें, उसको तुरंत सहायता मुहैया करवाई जाएगी। उन्होंने बताया कि वन स्टाप सेंटर में एक ही छत के नीचे महिलाओं को निशुल्क विधिक परामर्श व अधिकतम पांच दिन आश्रय देने का प्रावधान है।