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Mahendragarh-Narnaul News: 50 हजार एकड़ में कपास और एक हजार एकड़ में सब्जियों को बचाना चुनौती

Tue, 28 May 2024 02:09 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Tue, 28 May 2024 02:09 AM IST
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Challenge to save cotton in 50 thousand acres and vegetables in one thousand acres
भीषण गर्मी के चलते मुरझाई ज्वार की फसल। संवाद
महेंद्रगढ़। पिछले एक माह से लगातार बढ़ रहे तापमान के कारण अब किसानों के समक्ष करीब 50 हजार एकड़ में कपास व एक हजार एकड़ में सब्जियों को बचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। एक माह से क्षेत्र का तापमान लगातार 45 डिग्री से अधिक चल रहा है। बढ़ते तापमान और दिनभर चलने वाली गर्म हवा के कारण फसल और सब्जियों की पत्तियां झुलसनी शुरू हो चुकी हैं। किसानों की ओर से पशुओं के लिए बिजाई किए गए हरे चारे के रूप में ज्वार, बाजर, मक्खन घास भी मुरझाने लगी हैं। इससे हरे चारे का संकट खड़ा हो सकता है। मौसम विभाग की ओर से अभी आगामी पांच दिनों में तापमान और अधिक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, ऐसे में किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
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42 डिग्री तापमान तक झेल सकती हैं फसलें
विशेषज्ञों की मानें तो कपास व सब्जियों की विभिन्न फसलें केवल 42 डिग्री तापमान तक ही कुछ समय के लिए झेल सकती हैं। वहीं अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह के बाद लगातार तापमान वृद्धि पर चल रहा है। इस समय कपास की फसल में पत्तियां झुलसनी आरंभ हो चुकी हैं। दोपहर के समय पौधे बेजान नजर आने लगे हैं। इस बार जिले में करीब 50 हजार एकड़ में कपास की बिजाई की गई है। वहीं एक हजार एकड़ में खड़ी तरबूज, घीया, खरबूजा, मिर्ची, भिंडी, बैंगन की बढ़वार (बढ़ोतरी) रुकने के साथ-साथ आधी से अधिक पत्तियां झुलस चुकी हैं। भीषण गर्मी के कारण सब्जियों के पौधों में नया फूल व फल आना भी बंद हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान में बढ़ोतरी का क्रम जारी रहा तो फसलों में नुकसान की आशंका रहेगी।
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कपास की फसल में जरूरत के अनुसार सिंचाई कर सकते हैं लेकिन किसान इस बात का ध्यान रखें कि सिंचाई रात का सुबह-शाम के समय ही करें। दोपहर के समय में सिंचाई करने से कपास व सब्जियों की फसलों में नुकसान की आशंका रहेगी। जब मिट्टी का तापमान सामान्य हो तो सिंचाई का लाभ फसलों को मिलता है। पशुओं की विशेष देखभाल करें तथा पशु को सीधे गर्म हवा के प्रभाव से बचाएं तथा पर्याप्त पानी पिलाएं।
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- डॉ. अजय यादव, उपमंडल अधिकारी कृषि एवं किसान कल्याण विभाग
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