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Mahendragarh-Narnaul News: कैप्टन दादा ने दिए हौसलों के पंख तो पोते ने लेफ्टिनेंट बनकर पूरा किया सपना
Tue, 28 May 2024 01:37 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 28 May 2024 01:37 AM IST
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गांव अगिहार में दादा कैप्टन रामेश्वर दयाल व दादी कृष्णा देवी से आशीर्वाद लेते लेफ्टिनेंट यश कौ
महेंद्रगढ़। गांव अगिहार निवासी कैप्टन रामेश्वर दयाल ने अपने पौते को हौसलों के पंख दिए तो पौते यश कौशिक ने भी आसमान छूकर दादा के सपनों को साकार कर दिया। भारतीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट चयनित हुए यश कौशिक का बचपन से ही भारतीय सेना में अधिकारी बनकर देश सेवा का जज्बा था। यश कौशिक की ओर से एसएसबी के माध्यम से गत वर्ष दिसंबर माह में परीक्षा दी गई थी। वह अब 15 जुलाई से केरला आईएनए में प्रशिक्षण शुरू करेंगे। यह उपलब्धि हासिल करने वाले वह गांव के पहला युवा हैं। बेटे की सफलता पर गांव में खुशी का माहौल है।
यश कौशिक ने बताया कि भारतीय सेना में 30 वर्षों तक सेवाएं देने के उपरांत बतौर कैप्टन सेवानिवृत्त हुए उनके दादा रामेश्वर दयाल की प्रेरणा से शुरू से ही भारतीय सेना में शामिल होने की इच्छा जागृत हो गई थी। दादा से लगातार मार्गदर्शन एवं उत्साह मिलता रहा और उसके हौसले बढ़ते गए। भारतीय सेना से जुड़े परिवार में चाचा ललित पैरा कमांडो तथा हवलदार जयभगवान का भी लगातार मार्गदर्शन मिलता रहा। देशभर से आठ हजार युवाओं ने आवेदन किया था तथा दो हजार ने परीक्षा दी थी। इस परीक्षा में प्रदेशभर से केवल उसी का चयन हुआ था।
यश कौशिक के पिता शिव कुमार भी गांव के पहले डिप्लोमा इंजीनियर थे जो मुंबई में एक बड़ी कंपनी में कार्यरत थे। यश की सफलता पर कर्नल श्रीकिशन सिंह, सरपंच दलबीर सिंह, वीर चक्र सम्मानित बुध सिंह, हरिराम शर्मा, सूबेदार जगदीश शर्मा, देवेंद्र नंबरदार, धर्मबीर सिंह चौहान, सुबेदार भागीरथ साहब, जवाहर सिंह ने बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
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यश कौशिक ने बताया कि भारतीय सेना में 30 वर्षों तक सेवाएं देने के उपरांत बतौर कैप्टन सेवानिवृत्त हुए उनके दादा रामेश्वर दयाल की प्रेरणा से शुरू से ही भारतीय सेना में शामिल होने की इच्छा जागृत हो गई थी। दादा से लगातार मार्गदर्शन एवं उत्साह मिलता रहा और उसके हौसले बढ़ते गए। भारतीय सेना से जुड़े परिवार में चाचा ललित पैरा कमांडो तथा हवलदार जयभगवान का भी लगातार मार्गदर्शन मिलता रहा। देशभर से आठ हजार युवाओं ने आवेदन किया था तथा दो हजार ने परीक्षा दी थी। इस परीक्षा में प्रदेशभर से केवल उसी का चयन हुआ था।
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यश कौशिक के पिता शिव कुमार भी गांव के पहले डिप्लोमा इंजीनियर थे जो मुंबई में एक बड़ी कंपनी में कार्यरत थे। यश की सफलता पर कर्नल श्रीकिशन सिंह, सरपंच दलबीर सिंह, वीर चक्र सम्मानित बुध सिंह, हरिराम शर्मा, सूबेदार जगदीश शर्मा, देवेंद्र नंबरदार, धर्मबीर सिंह चौहान, सुबेदार भागीरथ साहब, जवाहर सिंह ने बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
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