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Mahendragarh-Narnaul News: हकेंवि में बायोटेक्नोलॉजी प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम शुरू
Mon, 28 Oct 2024 11:35 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Mon, 28 Oct 2024 11:35 PM IST
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फोटो संख्या:69-हकेवि प्रयोगशाला में प्रयोग करते स्कूली विद्यार्थी-स्रोत- हकेंवि
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि), महेंद्रगढ़ द्वारा ग्रामीण विद्यार्थियों को बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से सोशल आउटरीच कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने विद्यार्थियों को आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने तथा देश के निरंतर विकास के लिए इन उन्नत उपकरणों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम की शुरुआत एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल ककराला के 40 विद्यार्थियों के पहले बैच के साथ हुई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत डाॅ. हुमिरा सोन्हा और डाॅ. रुपेश देशमुख ने विद्यार्थियों को कार्यक्रम के उद्देश्यों से अवगत कराया। तत्पश्चात विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। इसमें विद्यार्थियों ने व्यक्तिगत रूप से सोयाबीन, धान और ककड़ी की पत्तियों से डीएनए निकाला। कार्यक्रम की घोषणा भारत रत्न नानाजी देशमुख की जयंती पर विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार द्वारा की गई थी। यह कार्यक्रम 25 सप्ताह तक चलेगा, जिसमें विभिन्न स्कूलों के छात्र प्रत्येक सप्ताह भाग लेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य एक हजार ग्रामीण विद्यार्थियों को बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है।
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विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने विद्यार्थियों को आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने तथा देश के निरंतर विकास के लिए इन उन्नत उपकरणों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम की शुरुआत एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल ककराला के 40 विद्यार्थियों के पहले बैच के साथ हुई।
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प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत डाॅ. हुमिरा सोन्हा और डाॅ. रुपेश देशमुख ने विद्यार्थियों को कार्यक्रम के उद्देश्यों से अवगत कराया। तत्पश्चात विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। इसमें विद्यार्थियों ने व्यक्तिगत रूप से सोयाबीन, धान और ककड़ी की पत्तियों से डीएनए निकाला। कार्यक्रम की घोषणा भारत रत्न नानाजी देशमुख की जयंती पर विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार द्वारा की गई थी। यह कार्यक्रम 25 सप्ताह तक चलेगा, जिसमें विभिन्न स्कूलों के छात्र प्रत्येक सप्ताह भाग लेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य एक हजार ग्रामीण विद्यार्थियों को बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है।
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