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Mahendragarh-Narnaul News: श्रीमद्भागवत कथा से पूर्व महिलाओं ने निकाली कलश यात्रा
Wed, 19 Jun 2024 02:46 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 19 Jun 2024 02:46 AM IST
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फोटो संख्या: 63 कनीना के कलश यात्रा निकालते हुए महिला एवं पुरूष--- संवाद
कनीना। कनीना के बाबा मोलड़नाथ मंदिर में श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान महोत्सव का शुभारंभ कलश यात्रा निकालकर किया गया। यात्रा बाबा मोलड़नाथ मंदिर से होते हुए बस स्टैंड, मंडी टी प्वाईंट, सरकारी स्कूल, आंबेडकर चौक, उप नागरिक अस्पताल, शहीद स्मारक होते हुए वापस बाबा मोलड़ नाथ मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई।
कलश यात्रा में अनेक महिलाओं ने भाग लिया। कलश यात्रा में ठेकेदार अशोक, दीपक चौधरी, राजेंद्र, अनिल, दीपक, दिनेश मुख्य यजमान रहे। कथा व्यास पंडित दाशानुदास प्रवेश शास्त्री ने भागवत कथा के पहले दिन निर्जला एकादशी व आत्म देव का प्रसंग सुनाया।
दाशानुदास प्रवेश शास्त्री ने धुंधकारी व आत्मदेव की कथा का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि तुंगभंगा नदी के किनारे आत्म देव नाम का एक ब्राह्मण और उसकी पत्नी धुंधली रहती थी, आत्म देव तो सज्जन था लेकिन उसकी पत्नी दुष्ट प्रवृति की थी। संतान नहीं होने से आत्म देव बहुत उदास रहता था। अनेक बार उसने आत्महत्या का प्रयास भी किया। आत्म देव एक ऋषि को अपनी कहानी सुना कर रोने लगा और संतान प्राप्ति का उपाय पूछा। बार-बार अनुरोध पर ऋषि ने उसे एक फल दिया और उसको अपनी पत्नी को खिलाने को कहा और कहा की एक साल तक तुम्हारी पत्नी को सात्विक जीवन जीना पड़ेगा। आत्म देव अपनी पत्नी को फल खाने को देता है, लेकिन धुंधली ने वह फल अपनी बहन को दिया तो उसने गाय को फल खाने को दे दिया। कुछ दिन बाद जाकर अपने बहन से बच्चा लेकर आ गई। आत्म देव बहुत खुश हुआ खुशियां मनाई और उस बच्चे का नाम ब्रह्मदेव रखना चाहा लेकिन धुंधली ने फिर झगड़ कर उसका नाम धुंधकारी रखा। और धुंधली ने जो फल गाय को खिलाए थे उसके भी गर्भ से गोकर्ण पैदा हुआ। उन्होंने कहा कि संतों का आशीर्वाद कभी निष्फल नहीं जाता।
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इस अवसर पर दिनेश यादव, राजेंद्र सिंह, अनिल कुमार, इंद्रजीत, शिव कुमार, लाल सिंह, पवन कुमार, सोनू यादव, जॉनी, मुकेश शर्मा, अशोक, सतीश कुमार, सुनील नम्बरदार, नवीन शर्मा निखिलेश पंडित ईश्वर कौशिक जितेंद्र यादव पवन आदि मौजूद रहे।
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कलश यात्रा में अनेक महिलाओं ने भाग लिया। कलश यात्रा में ठेकेदार अशोक, दीपक चौधरी, राजेंद्र, अनिल, दीपक, दिनेश मुख्य यजमान रहे। कथा व्यास पंडित दाशानुदास प्रवेश शास्त्री ने भागवत कथा के पहले दिन निर्जला एकादशी व आत्म देव का प्रसंग सुनाया।
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दाशानुदास प्रवेश शास्त्री ने धुंधकारी व आत्मदेव की कथा का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि तुंगभंगा नदी के किनारे आत्म देव नाम का एक ब्राह्मण और उसकी पत्नी धुंधली रहती थी, आत्म देव तो सज्जन था लेकिन उसकी पत्नी दुष्ट प्रवृति की थी। संतान नहीं होने से आत्म देव बहुत उदास रहता था। अनेक बार उसने आत्महत्या का प्रयास भी किया। आत्म देव एक ऋषि को अपनी कहानी सुना कर रोने लगा और संतान प्राप्ति का उपाय पूछा। बार-बार अनुरोध पर ऋषि ने उसे एक फल दिया और उसको अपनी पत्नी को खिलाने को कहा और कहा की एक साल तक तुम्हारी पत्नी को सात्विक जीवन जीना पड़ेगा। आत्म देव अपनी पत्नी को फल खाने को देता है, लेकिन धुंधली ने वह फल अपनी बहन को दिया तो उसने गाय को फल खाने को दे दिया। कुछ दिन बाद जाकर अपने बहन से बच्चा लेकर आ गई। आत्म देव बहुत खुश हुआ खुशियां मनाई और उस बच्चे का नाम ब्रह्मदेव रखना चाहा लेकिन धुंधली ने फिर झगड़ कर उसका नाम धुंधकारी रखा। और धुंधली ने जो फल गाय को खिलाए थे उसके भी गर्भ से गोकर्ण पैदा हुआ। उन्होंने कहा कि संतों का आशीर्वाद कभी निष्फल नहीं जाता।
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इस अवसर पर दिनेश यादव, राजेंद्र सिंह, अनिल कुमार, इंद्रजीत, शिव कुमार, लाल सिंह, पवन कुमार, सोनू यादव, जॉनी, मुकेश शर्मा, अशोक, सतीश कुमार, सुनील नम्बरदार, नवीन शर्मा निखिलेश पंडित ईश्वर कौशिक जितेंद्र यादव पवन आदि मौजूद रहे।

फोटो संख्या: 63 कनीना के कलश यात्रा निकालते हुए महिला एवं पुरूष--- संवाद