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रोजगार चाहने वाला नहीं, देने वाला बनें ः राज्यपाल
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हकेंवि के आठवें दीक्षांत सामरोह की स्मारिका का विमोचन करते राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, कुलपति ?
- फोटो : Narnol
देश और समाज को उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से बहुत अपेक्षाएं हैं। राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने के लिए कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता है। सरकार कौशल विकास और स्टार्टअप के क्षेत्र में रोजगार के लिए बहुत खर्च कर रही है। हमें नौकरी चाहने वाला बनने के बजाय नौकरी देने वाला बनना चाहिए। यह विचार रविवार को हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि प्रदेश के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने व्यक्त किए। इस मौके पर राज्यपाल ने चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय का न्यूज लेटर और स्मारिका का विमोचन भी किया गया। इस मौके पर विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. केके अग्रवाल के अलावा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ओमप्रकाश यादव, पूर्व शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा भी उपस्थित रहे।
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाए जा रहे डिजिटल इंडिया अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान के माध्यम से रोजगार, स्वरोजगार व आत्मनिर्भरता के नए मार्ग खुलने के साथ-साथ यह अभियान देश को डिजिटल रूप से सशक्त व ज्ञान आधारित व्यवस्था में बदलाव लाने में सहायक साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस, स्मार्ट बोर्ड, ब्लॉक चेन, कंप्यूटरिंग उपकरण आदि जैसे प्रौद्योगिकी क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं।
राज्यपाल ने कोरोना महामारी के दौरान विश्वविद्यालय द्वारा किए गए कार्यों के लिए कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार व उनकी टीम को बधाई दी। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा किए गए प्रयासों की भी सराहना की। विशिष्ट अतिथि प्रो. केके अग्रवाल ने कहा कि एक से अधिक विषयों का ज्ञान आवश्यक है। इसमें अंत: विषयी और लाइफ लॉन्ग लर्निंग पाठ्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि शोध स्थानीय एवं राष्ट्रीय विकास में मदद देने वाला होना चाहिए।
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अनुसंधान एवं नवाचार कार्यों में अग्रणी होगा विवि
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि महामारी की विभिन्न चुनौतियों एवं बाधाओं के बावजूद विश्वविद्यालय ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के अपने उद्देश्य को दृढ़ रखा। विश्वविद्यालय की शोध उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि विश्वविद्यालय आने वाले वर्षों में अपने अनुसंधान एवं नवाचार कार्यों में अग्रणी स्थिति में होगा। दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय की कुल सचिव प्रो. सारिका शर्मा, परीक्षा नियंत्रक प्रो. राजीव कौशिक, वित्त अधिकारी डॉ. विकास कुमार, विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी उपस्थित रहे।
24 स्वर्ण पदक सहित 1078 विद्यार्थियों को मिलीं उपाधियां
समारोह में कुल 1078 विद्यार्थियों और शोधार्थियों को पीएचडी, एमफिल, स्नातक व स्नातकोत्तर की उपाधियां व स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। स्नातक पाठ्यक्रमों के तहत बीटेक के 148 तथा बीवॉक में 72 विद्यार्थियों को तथा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में 825 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। 19 शोधार्थियों को पीएचडी एवं 14 को एमफिल की उपाधि प्रदान की गई। 1078 विद्यार्थियों व शोधार्थियों में 604 छात्र और 474 छात्राएं शामिल हैं। 975 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए हैं।
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राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाए जा रहे डिजिटल इंडिया अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान के माध्यम से रोजगार, स्वरोजगार व आत्मनिर्भरता के नए मार्ग खुलने के साथ-साथ यह अभियान देश को डिजिटल रूप से सशक्त व ज्ञान आधारित व्यवस्था में बदलाव लाने में सहायक साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस, स्मार्ट बोर्ड, ब्लॉक चेन, कंप्यूटरिंग उपकरण आदि जैसे प्रौद्योगिकी क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं।
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राज्यपाल ने कोरोना महामारी के दौरान विश्वविद्यालय द्वारा किए गए कार्यों के लिए कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार व उनकी टीम को बधाई दी। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा किए गए प्रयासों की भी सराहना की। विशिष्ट अतिथि प्रो. केके अग्रवाल ने कहा कि एक से अधिक विषयों का ज्ञान आवश्यक है। इसमें अंत: विषयी और लाइफ लॉन्ग लर्निंग पाठ्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि शोध स्थानीय एवं राष्ट्रीय विकास में मदद देने वाला होना चाहिए।
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अनुसंधान एवं नवाचार कार्यों में अग्रणी होगा विवि
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि महामारी की विभिन्न चुनौतियों एवं बाधाओं के बावजूद विश्वविद्यालय ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के अपने उद्देश्य को दृढ़ रखा। विश्वविद्यालय की शोध उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि विश्वविद्यालय आने वाले वर्षों में अपने अनुसंधान एवं नवाचार कार्यों में अग्रणी स्थिति में होगा। दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय की कुल सचिव प्रो. सारिका शर्मा, परीक्षा नियंत्रक प्रो. राजीव कौशिक, वित्त अधिकारी डॉ. विकास कुमार, विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी उपस्थित रहे।
24 स्वर्ण पदक सहित 1078 विद्यार्थियों को मिलीं उपाधियां
समारोह में कुल 1078 विद्यार्थियों और शोधार्थियों को पीएचडी, एमफिल, स्नातक व स्नातकोत्तर की उपाधियां व स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। स्नातक पाठ्यक्रमों के तहत बीटेक के 148 तथा बीवॉक में 72 विद्यार्थियों को तथा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में 825 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। 19 शोधार्थियों को पीएचडी एवं 14 को एमफिल की उपाधि प्रदान की गई। 1078 विद्यार्थियों व शोधार्थियों में 604 छात्र और 474 छात्राएं शामिल हैं। 975 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए हैं।

हकेंवि के आठवें दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक प्रदान करते राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, कुलपति ?- फोटो : Narnol