ऑटो चालकों की मनमानी लोगों के लिए बनी परेशान
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शहर में ऑटो चालकों की मनमानी लोगों पर भारी पड़ रही है। बेतरतीब खड़े होने वाले ऑटो हर दिन जाम का कारण बन रहे हैं। कोई यूनियन रजिस्टर्ड न होने के कारण ऑटो चालकों का चलने का कोई स्थान और समय निर्धारित नहीं है। ट्रैफिक पुलिस का तीन माह पहले निर्धारित रूट मैप भी अब धराशायी हो गया है। ऑटो चालकों के रूट चार्ट फॉलो न करने से यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालात यह हैं कि ऑटो चालक शहर के सबसे व्यस्ततम महावीर चौक पर अपना कब्जा जमा चुके हैं। इन पर लगाम लगाने के मामले में पुलिस प्रशासन भी बेबस दिखाई दे रहा है।
कहीं बैठो देने होंगे 10 रुपये
सवारी चाहे एक किमी का सफर तय करे या 50 मीटर का ऑटो चालक प्रति सवारी से कम से कम 10 रुपये वसूल करते हैं। न्यूनतम किराए को लेकर भी लोग परेशान हैं। लोगों का कहना है कि पहले ऑटो चालक दूरी के अनुसार दो, पांच, आठ और 10 रुपये लेते थे, अब चाहे छोटी दूरी हो या बड़ी सबसे 10 रुपये वसूल कर रहे हैं।
पांच साल में 15 से 250 हुई संख्या
पांच साल पहले शहर में मुश्किल से 110 या 15 ही ऑटो थे। सिटी में ट्रैफिक के लिए टैंपो की संख्या अधिक थी। पांच सालों में सिटी से टैंपो गायब हो गए और उनका स्थान ऑटो ने ले लिया। अब शहर में करीब 250 ऑटो सरपट सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
महावीर चौक पर लग जाता है जाम
महावीर चौक से ऑटो रेलवे स्टेशन, नई मंडी और सिविल अस्पताल की ओर जाते हैं। इस कारण महावीर चौक से रेलवे लाइन की ओर जाने वाले पूरे रास्ते पर ऑटो चालक अपना कब्जा जमा लेते हैं। इससे मार्ग पर जाम की स्थिति हमेशा बनी रहती है। वहीं आते समय भी ये मुख्य बाजार के पास रुक जाते हैं। इससे मुख्य बाजार में जाने वालों को बहुत परेशानी होती है।
कोड लिख तीन रूट किए थे तय
तीन माह पहले 22 अगस्त को तत्कालीन यातायात प्रभारी ने ऑटो चालकों की बैठक लेकर चलने का स्थान निर्धारित किया था। बाकायदा ऑटो पर रूट का नाम भी लिखा था और उनकी एक यूनियन भी बनाई थी, मगर अब ऐसा कुछ नहीं है। तीन माह में पूरी व्यवस्था फिर से चौपट हो गई है। सबसे ज्यादा तीन रूटों पर सवारियों का ज्यादा आवागमन रहता है। इसके लिए निर्धारित कोड बनाए थे, मगर अब ऐसा नहीं हो रहा है।
ये बनाए गए थे कोड
पहला: बस स्टैंड से रेलवे स्टेशन तक ऑटो। इस रूट पर चलने वाले आटो के शीशे पर ‘एस’ यानी स्टेशन और ऑटो संख्या लिखा गया था। यह ऑटो बस स्टैंड से महावीर चौक, अग्रसेन चौक, राजीव चौक, मुख्य डाकघर, पीजी कॉलेज के सामने से रेलवे स्टेशन पर पहुंचेंगे, मगर अब ऐसा नहीं हो रहा।
दूसरा: जिस ऑटो के शीशे पर अंग्रेजी शब्द ‘सी’ लिखा हो। उसका मतलब सिटी यानी शहर के अंदरूनी हिस्से में जाने वाला ऑटो था। यह ऑटो बस स्टैंड से महावीर चौक, पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, पुलिस लाइन, अग्रसेन चौक, लोहा मंडी, सामान्य अस्पताल, किला रोड, महता चौक, नेताजी सुभाषचंद्र बोस स्टेडियम, निजामपुर रोड-नांगल चौधरी रोड टी-प्वाइंट (सैनी धर्म कांटा), निजामपुर रोड, कोरियावास मोड़, कुलताजपुर मोड़, हैफेड, बाल भवन होते हुए हीरो होंडा चौक से महावीर चौक पहुंचते हैं।
तीसरा: जिस ऑटो के शीशे पर ‘एन’ शब्द लिखा हो उसका मतलब वह ऑटो बस स्टैंड से नांगतिहाड़ी जाता था। यह ऑटो बस स्टैंड से महावीर चौक होते हुए महेंद्रगढ़ रोड स्थित अफसर कॉलोनी के सामने कुछ पल रुकने के बाद यह पंचायत भवन, बिजली घर, हुडा सेक्टर, शास्त्रीनगर, नूनी-शेखपुरा मोड़, सरस्वती स्कूल, जिला जेल, हाउसिंग बोर्ड, रामनगर, गणेश कालोनी, नसीबपुर, निवाजनगर मोड़ होते हुए सीधे महेंद्रगढ़ रोड से नांगतिहाड़ी ऑटो पहुंचते हैं।