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Mahendragarh-Narnaul News: दाल-चूरमा खाया, गिल्ली-डंडा का लुत्फ उठाया
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फोटो नंबर- 15क्षेत्र में गिल्ली डंडा खेलते बच्चे। संवाद
नारनौल।
क्षेत्र में मकर संक्रांति का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने सुबह जल्दी उठकर घर के आंगन और घर के बाहर साफ-सफाई की।
चूरमा व दाल सहित अन्य पकवान बनाए। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ धार्मिक महत्व नहीं रखता, बल्कि इसका संबंध विज्ञान, कृषि और सामाजिक जीवन से भी है। मकर संक्रांति को नई ऊर्जा, नई फसल और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन देशी घी का चूरमा व दाल बनाने और दान करने की परंपरा का भी विशेष महत्व है। मकर संक्रांति के पर्व पर क्षेत्र में लोग चूरमा में देशी घी डालकर दाल के साथ खाते हैं। इसके अलावा लोग अपने पितृजन की शांति के लिए बुजुर्गों को कपड़े भी देते हैं। मकर संक्रांति के अवसर पर क्षेत्र में गिल्ली-डंडा का खेल भी खेला जाता है। समय के साथ इस खेल की लोकप्रियता में कमी आई है।
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बुजुर्गों ने याद किए पुराने दिन
रामकरण दास कॉलोनी निवासी माडूराम ने बताया कि पहले मकर संक्रांति के पर्व पर खेल के मैदान पर गिल्ली-डंडा खेलने वाले खिलाड़ियों का हुजूम लगा रहता था। माडूराम ने बताया कि संक्रांति के पर्व पर पहले मिठाई किसी खास अवसर पर ही घरों में बनती थी। देशी घी का चूरमा और दाल में मिला कर खाया जाता था, लेकिन अब यह पर्व आधुनिकता की भेंट चढ़ गया है।
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क्षेत्र में मकर संक्रांति का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने सुबह जल्दी उठकर घर के आंगन और घर के बाहर साफ-सफाई की।
चूरमा व दाल सहित अन्य पकवान बनाए। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ धार्मिक महत्व नहीं रखता, बल्कि इसका संबंध विज्ञान, कृषि और सामाजिक जीवन से भी है। मकर संक्रांति को नई ऊर्जा, नई फसल और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन देशी घी का चूरमा व दाल बनाने और दान करने की परंपरा का भी विशेष महत्व है। मकर संक्रांति के पर्व पर क्षेत्र में लोग चूरमा में देशी घी डालकर दाल के साथ खाते हैं। इसके अलावा लोग अपने पितृजन की शांति के लिए बुजुर्गों को कपड़े भी देते हैं। मकर संक्रांति के अवसर पर क्षेत्र में गिल्ली-डंडा का खेल भी खेला जाता है। समय के साथ इस खेल की लोकप्रियता में कमी आई है।
बुजुर्गों ने याद किए पुराने दिन
रामकरण दास कॉलोनी निवासी माडूराम ने बताया कि पहले मकर संक्रांति के पर्व पर खेल के मैदान पर गिल्ली-डंडा खेलने वाले खिलाड़ियों का हुजूम लगा रहता था। माडूराम ने बताया कि संक्रांति के पर्व पर पहले मिठाई किसी खास अवसर पर ही घरों में बनती थी। देशी घी का चूरमा और दाल में मिला कर खाया जाता था, लेकिन अब यह पर्व आधुनिकता की भेंट चढ़ गया है।
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