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Mahendragarh-Narnaul News: उम्र ने रिटायर कहा, जुनून ने स्टूडेंट बना दिया

Thu, 24 Sep 2026 01:13 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 24 Sep 2026 01:13 AM IST
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At the age of 65, retired soldier Vijendra Singh completed LLB with first class, now providing legal help to the poor.
फोटो 04 विजेंद्र सिंह
मंडी अटेली। जिंदगी में कुछ लोग सिर्फ जीते हैं और कुछ लोग मिसाल बन जाते हैं। गांव गुवानी के विजेंद्र सिंह दूसरी श्रेणी में आते हैं। 65 साल की उम्र, जब शरीर थकने लगता है और सपने सिमटने लगते हैं, उस उम्र में विजेंद्र सिंह ने हाथ में किताबें और कानून की धाराएं थामीं...और प्रथम श्रेणी से एलएलबी की डिग्री हासिल कर सबको हैरान कर दिया।
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साल 1982 में महज 20 साल का एक नौजवान गांव से निकलकर भारतीय सेना की आर्टिलरी में भर्ती हुआ। बंदूक और गोला-बारूद के बीच जिंदगी गुजारने वाले इस जवान के मन में एक चिंगारी हमेशा जलती रही...पढ़ने की चिंगारी।
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सरहदों पर ड्यूटी निभाते हुए भी उसने किताबें नहीं छोड़ीं और चोरी-छिपे समय निकालकर 11वीं-12वीं पास कर ली। 16 साल तक देश की सेवा करने के बाद 1999 में विजेंद्र सिंह ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली लेकिन असली सफर तो अब शुरू हुआ था।
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इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से दर्शनशास्त्र में स्नातक और मेरठ विश्वविद्यालय से प्राचीन इतिहास में एमए की डिग्री हासिल कर उन्होंने साबित कर दिया कि जंग सिर्फ मैदान में ही नहीं, किताबों से भी लड़ी जा सकती है।
निजी स्कूलों में पढ़ाने के बाद 2004 में वे हरियाणा शिक्षा विभाग में इतिहास प्राध्यापक बने और 16 साल तक हजारों बच्चों का भविष्य संवारा। इस बीच एनसीसी अधिकारी और हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन के जिला प्रधान की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। विजेंद्र सिंह कहते हैं कि उनका मकसद सिर्फ डिग्रियां जुटाना नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी को यह संदेश देना है कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती।

बंजर मिट्टी को भी बनाया सोना
विजेंद्र की सीखने की भूख यहीं शांत नहीं हुई और सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई शुरू कर दी। आज वे गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता देकर एक नई मिसाल कायम कर रहे हैं। उन्होंने खेती में भी हाथ आजमाया, रसायन रहित खेती अपनाई और बंजर रेतीली मिट्टी में खजूर के पेड़ उगाकर सबको चौंका दिया।
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