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फर्जी प्रमाण पत्र पर ग्राम पंचायत चुनाव लड़ने की दोषी अन्नू को तीन साल की सजा
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नारनौल। आठवीं का फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर ग्राम पंचायत का चुनाव लड़ने के मामले में दोष सिद्ध सुरानी गांव की निवर्तमान सरपंच अन्नू को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आर्य शर्मा ने तीन साल की सजा सुनाई है। इसके अलावा अलग-अलग सजा को मिलाकर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
शिकायतकर्ता गांव सुरानी निवासी रामेश्वर दयाल शर्मा ने 14 अप्रैल 2016 को पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि पंचायत चुनाव में अन्नू देवी ग्राम पंचायत सुरानी पंचायत चुनाव में सरपंच चुनी गई हैं। अन्नू ने नामांकन के दौरान आठवीं का फर्जी प्रमाण पत्र जमा करवाया था। उन्होंने दावा किया था कि मोतीलाल जनता जूनियर हाई स्कूल, शाहपुर, मुर्ता गाजियाबाद से 1998-99 में 8 वीं कक्षा पास की है जबकि 1990 में ही उक्त स्कूल बंद हो चुका था। उन्होंने बताया कि गाजियाबाद के संबंधित प्राधिकारी अर्थात बेसिक, प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी/संबंधित अधिकारी ने 26 फरवरी 2016 को अन्नू द्वारा प्रस्तुत प्रमाण पत्र के संबंध में जांच की तो पाया कि संबंधित शिक्षा अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित काउंटर बिना तारीख के हैं और उक्त प्रमाण पत्र जाली है। गाजियाबाद प्राधिकरण के शिक्षा विभाग के अधिकारी ने स्कूल का निरीक्षण किया और पाया कि स्कूल वर्षों से बंद है। इसकी जांच उपायुक्त के आदेश पर तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी महेंद्रगढ़ ने भी की थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई आरंभ कर दी थी। उपरोक्त केस का फैसला अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आर्य शर्मा ने आठ सितंबर को अपना फैसला सुनाया।
मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आर्य शर्मा ने दोषी निवर्तमान महिला सरपंच अन्नू देवी को आईपीसी की धारा 420 के तहत दो साल की सजा एवं दो हजार रुपये जुुर्माना, आईपीसी की धारा 465 के तहत एक वर्ष की सजा तथा एक हजार रुपये जुर्माना, आईपीसी 467 के तहत तीन साल की सजा तथा 4 हजार रुपये का जुर्माना, आईपीसी 468 के तहत दो वर्ष की सजा तथा दो हजार रुपये का जुर्माना तथा आईपीसी की धारा 471 के तहत एक साल की सजा तथा एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। उन्होंने बताया कि सभी सजा साथ-साथ चलेगी।
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वर्जन:
पंचायत चुनाव के लिए नामांकन में आठवीं का फर्जी प्रमाणपत्र लगाने के मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने अन्नू को अधिकतम तीन साल की सजा सुनाई है।-नितिन मेहता, अधिवक्ता, शिकायकर्ता पक्ष।
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मुख्य मंत्री ने कर दिया था निलंबित
शिकायतकर्ता रामेश्वर दयाल शर्मा ने बताया कि 12-13 नवंबर 2017 को मुख्यमंत्री मनोहर लाल जिले में दो दिन के प्रवास दौरे पर आए थे। उस समय भी उसने मुख्यमंत्री के समक्ष यह शिकायत रखी थी। मुख्यमंत्री ने शिकायत के आधार पर महिला सरपंच को निलंबित कर दिया था। बाद में 16 नवंबर 2017 को मुख्यमंत्री के आदेश तत्कालीन उपायुक्त गरिमा मित्तल ने उसको निलंबित कर दिया था लेकिन अन्नू उनके आदेश को लेकर हाई कोर्ट चली गई थी। उसके बाद कोर्ट ने मामले की जांच के लिए उपायुक्त के पास भेजा था। उपायुक्त ने जांच की रिपोर्ट कोर्ट में भेज दी थी।
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गलत रिपोर्ट की वजह से पांच साल किए पूरे
शिकायकर्ता रामेश्वर दयाल शर्मा ने बताया कि चुनाव के बाद तत्कालीन सीहमा खंड के खंड शिक्षा अधिकारी से आरटीआई के तहत सूचना मांगी थी। आरोप है कि आरटीआई में उसने निवर्तमान सरपंच से मिलीभगत कर झूठी रिपोर्ट बनाकर दे दी थी। उनकी इसी रिपोर्ट की वजह से आरोपी अपनी योजना के पांच वर्ष पूरे कर गई। इसके बाद उन्होंने अपने स्तर पर गाजियाबाद स्कूल में जाकर दस्तावेज एकत्रित किए तथा पुलिस में मामला दर्ज करवाया।
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शिकायतकर्ता गांव सुरानी निवासी रामेश्वर दयाल शर्मा ने 14 अप्रैल 2016 को पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि पंचायत चुनाव में अन्नू देवी ग्राम पंचायत सुरानी पंचायत चुनाव में सरपंच चुनी गई हैं। अन्नू ने नामांकन के दौरान आठवीं का फर्जी प्रमाण पत्र जमा करवाया था। उन्होंने दावा किया था कि मोतीलाल जनता जूनियर हाई स्कूल, शाहपुर, मुर्ता गाजियाबाद से 1998-99 में 8 वीं कक्षा पास की है जबकि 1990 में ही उक्त स्कूल बंद हो चुका था। उन्होंने बताया कि गाजियाबाद के संबंधित प्राधिकारी अर्थात बेसिक, प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी/संबंधित अधिकारी ने 26 फरवरी 2016 को अन्नू द्वारा प्रस्तुत प्रमाण पत्र के संबंध में जांच की तो पाया कि संबंधित शिक्षा अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित काउंटर बिना तारीख के हैं और उक्त प्रमाण पत्र जाली है। गाजियाबाद प्राधिकरण के शिक्षा विभाग के अधिकारी ने स्कूल का निरीक्षण किया और पाया कि स्कूल वर्षों से बंद है। इसकी जांच उपायुक्त के आदेश पर तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी महेंद्रगढ़ ने भी की थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई आरंभ कर दी थी। उपरोक्त केस का फैसला अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आर्य शर्मा ने आठ सितंबर को अपना फैसला सुनाया।
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मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आर्य शर्मा ने दोषी निवर्तमान महिला सरपंच अन्नू देवी को आईपीसी की धारा 420 के तहत दो साल की सजा एवं दो हजार रुपये जुुर्माना, आईपीसी की धारा 465 के तहत एक वर्ष की सजा तथा एक हजार रुपये जुर्माना, आईपीसी 467 के तहत तीन साल की सजा तथा 4 हजार रुपये का जुर्माना, आईपीसी 468 के तहत दो वर्ष की सजा तथा दो हजार रुपये का जुर्माना तथा आईपीसी की धारा 471 के तहत एक साल की सजा तथा एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। उन्होंने बताया कि सभी सजा साथ-साथ चलेगी।
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वर्जन:
पंचायत चुनाव के लिए नामांकन में आठवीं का फर्जी प्रमाणपत्र लगाने के मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने अन्नू को अधिकतम तीन साल की सजा सुनाई है।-नितिन मेहता, अधिवक्ता, शिकायकर्ता पक्ष।
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मुख्य मंत्री ने कर दिया था निलंबित
शिकायतकर्ता रामेश्वर दयाल शर्मा ने बताया कि 12-13 नवंबर 2017 को मुख्यमंत्री मनोहर लाल जिले में दो दिन के प्रवास दौरे पर आए थे। उस समय भी उसने मुख्यमंत्री के समक्ष यह शिकायत रखी थी। मुख्यमंत्री ने शिकायत के आधार पर महिला सरपंच को निलंबित कर दिया था। बाद में 16 नवंबर 2017 को मुख्यमंत्री के आदेश तत्कालीन उपायुक्त गरिमा मित्तल ने उसको निलंबित कर दिया था लेकिन अन्नू उनके आदेश को लेकर हाई कोर्ट चली गई थी। उसके बाद कोर्ट ने मामले की जांच के लिए उपायुक्त के पास भेजा था। उपायुक्त ने जांच की रिपोर्ट कोर्ट में भेज दी थी।
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गलत रिपोर्ट की वजह से पांच साल किए पूरे
शिकायकर्ता रामेश्वर दयाल शर्मा ने बताया कि चुनाव के बाद तत्कालीन सीहमा खंड के खंड शिक्षा अधिकारी से आरटीआई के तहत सूचना मांगी थी। आरोप है कि आरटीआई में उसने निवर्तमान सरपंच से मिलीभगत कर झूठी रिपोर्ट बनाकर दे दी थी। उनकी इसी रिपोर्ट की वजह से आरोपी अपनी योजना के पांच वर्ष पूरे कर गई। इसके बाद उन्होंने अपने स्तर पर गाजियाबाद स्कूल में जाकर दस्तावेज एकत्रित किए तथा पुलिस में मामला दर्ज करवाया।