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Mahendragarh-Narnaul News: प्रधानाचार्य की हत्या पर जिले के सभी स्कूल रहे बंद
Wed, 16 Jul 2025 11:48 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 16 Jul 2025 11:48 PM IST
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फोटो नंबर-20हिसार जिले में प्रधानाचार्य की हत्या को लेकर विरोध स्वरूप बंद नारनौल का एक निजी
नारनौल। हिसार के बादशाहपुर स्थित एक निजी विद्यालय के कुछ छात्रों द्वारा प्रधानाचार्य जगबीर सिंह पानू की हत्या किए जाने के विरोध में बुधवार को जिले के सभी निजी विद्यालय बंद रहे।
स्कूलों की छुट्टी के बाद ही अभिभावकों के मोबाइल पर मैसेज भेजा गया। निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि घटना न केवल शिक्षा जगत के लिए अपमानजनक है, बल्कि समाज के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।
स्कूल संचालकों ने कहा कि निजी विद्यालयों को बंद रखने का निर्णय दोषियों को सजा दिलाने के लिए लिया गया है। अभिभावकों को बच्चों को मोबाइल फोन व सोशल मीडिया से दूर रखना होगा। अध्यापकों और बड़ों का सम्मान करना सिखाना होगा। अध्यापक विद्यार्थी का मार्गदर्शक होता है। यदि वह बच्चे को गलती के लिए डांटता है तो इसमें विद्यार्थी का हित ही है।
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बच्चों का अनावश्यक पक्ष लेने से उनमें उद्दंडता की भावना जन्म ले रही है। आज यदि स्कूल में अध्यापक बच्चों की जरा सी पिटाई कर दे तो बवाल खड़ा हो जाता हैं। इस भय से शिक्षक अब बच्चों की पिटाई नहीं करते हैं। एक समय था जब शिक्षक बाजार में सामने से आते दिख जाते तो छात्र अपना रास्ता बदल देते थे, लेकिन आज हालात बदल गए हैं।
अनिल कौशिक, प्रधान प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन
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स्कूलों की छुट्टी के बाद ही अभिभावकों के मोबाइल पर मैसेज भेजा गया। निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि घटना न केवल शिक्षा जगत के लिए अपमानजनक है, बल्कि समाज के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।
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स्कूल संचालकों ने कहा कि निजी विद्यालयों को बंद रखने का निर्णय दोषियों को सजा दिलाने के लिए लिया गया है। अभिभावकों को बच्चों को मोबाइल फोन व सोशल मीडिया से दूर रखना होगा। अध्यापकों और बड़ों का सम्मान करना सिखाना होगा। अध्यापक विद्यार्थी का मार्गदर्शक होता है। यदि वह बच्चे को गलती के लिए डांटता है तो इसमें विद्यार्थी का हित ही है।
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बच्चों का अनावश्यक पक्ष लेने से उनमें उद्दंडता की भावना जन्म ले रही है। आज यदि स्कूल में अध्यापक बच्चों की जरा सी पिटाई कर दे तो बवाल खड़ा हो जाता हैं। इस भय से शिक्षक अब बच्चों की पिटाई नहीं करते हैं। एक समय था जब शिक्षक बाजार में सामने से आते दिख जाते तो छात्र अपना रास्ता बदल देते थे, लेकिन आज हालात बदल गए हैं।
अनिल कौशिक, प्रधान प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन