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Mahendragarh-Narnaul News: अहिल्या उद्धार व फुलवारी की लीला का किया मंचन
Wed, 02 Oct 2024 11:38 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 02 Oct 2024 11:38 PM IST
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नारनौल। भगवान नारायण सेवा संस्था रजिस्टर्ड द्वारा श्री कृष्णा ड्रामेटिक क्लब अनाज मंडी के मंच पर तीसरे दिन मंगलवार को सुबाहु मारीच, फुलवारी, जनक संदेश, अहिल्या उद्धार की लीला का मंचन किया गया।
कमेटी के प्रभारी दयानंद सैनी मंत्री ने बताया कि रात रामलीला में मुख्य अतिथि निहालचंद सर्राफ रहे। रामलीला मंचन के दौरान जब राम और लक्ष्मण ताड़का को मार देते हैं। यह बात सुबाहु मारीच को पता लगती है। सुबाहु मारीच ताड़का का बदला लेने के लिए राम व लक्ष्मण से युद्ध करने वन में आते हैं और युद्ध करते-करते सुबाहु मारा जाता है व मारीच डर कर भाग जाता है। इस दौरान भगवान राम वन के रास्ते में अहिल्या रूपी शीला का उद्धार करते हैं। भगवान विश्वामित्र जी से शीला के बारे में पूछते हैं तब विश्वामित्र जी कहते हैं कि यह अहिल्या है जो गौतम ऋषि के श्राप के कारण पत्थर बन गई। आप इसे अपने चरणों से स्पर्श करके अहिल्या रूप में बना दें तब भगवान चरण स्पर्श से अहिल्या को श्राप मुक्त करते हैं। इसके बाद रामलीला में राजा जनक अपनी पुत्री सीता के विवाह के लिए एक स्वयंवर धनुष यज्ञ का आयोजन करते हैं। इसका निमंत्रण विश्वामित्र जी के पास उनका दूत लेकर आता है। तभी विश्वामित्र जी राम लक्ष्मण को अपने साथ लेकर वहां पहुंचते हैं। जहां फुलवारी में फूल तोड़ने के दौरान उनकी मुलाकात सीता से होती है। रात रामलीला को यहीं पर विराम दिया जाता है।
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कमेटी के प्रभारी दयानंद सैनी मंत्री ने बताया कि रात रामलीला में मुख्य अतिथि निहालचंद सर्राफ रहे। रामलीला मंचन के दौरान जब राम और लक्ष्मण ताड़का को मार देते हैं। यह बात सुबाहु मारीच को पता लगती है। सुबाहु मारीच ताड़का का बदला लेने के लिए राम व लक्ष्मण से युद्ध करने वन में आते हैं और युद्ध करते-करते सुबाहु मारा जाता है व मारीच डर कर भाग जाता है। इस दौरान भगवान राम वन के रास्ते में अहिल्या रूपी शीला का उद्धार करते हैं। भगवान विश्वामित्र जी से शीला के बारे में पूछते हैं तब विश्वामित्र जी कहते हैं कि यह अहिल्या है जो गौतम ऋषि के श्राप के कारण पत्थर बन गई। आप इसे अपने चरणों से स्पर्श करके अहिल्या रूप में बना दें तब भगवान चरण स्पर्श से अहिल्या को श्राप मुक्त करते हैं। इसके बाद रामलीला में राजा जनक अपनी पुत्री सीता के विवाह के लिए एक स्वयंवर धनुष यज्ञ का आयोजन करते हैं। इसका निमंत्रण विश्वामित्र जी के पास उनका दूत लेकर आता है। तभी विश्वामित्र जी राम लक्ष्मण को अपने साथ लेकर वहां पहुंचते हैं। जहां फुलवारी में फूल तोड़ने के दौरान उनकी मुलाकात सीता से होती है। रात रामलीला को यहीं पर विराम दिया जाता है।
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