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वर्षों संघर्ष कर मनोज और मंजू ने जरूरतमंदों के जीवन में भरा रंग

Thu, 17 Mar 2022 11:27 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 17 Mar 2022 11:27 PM IST
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After years of struggle, Manoj and Manju filled the life of the needy
मंजू कौशिक। - फोटो : Narnol
मन में कुछ कर गुजरने की ठान लेने पर बड़ी से बड़ी बाधा भी आसानी से हल की जा सकती है और बात हो किसी की मदद करने की तो मदद के बाद मिलने वाले सुकून से मन में और उत्साह भर जाता है। कुछ लोग दूसरों के जीवन में रंग भरने के लिए सुविधाओं के अभाव के बावजूद भी अपनी पूरी ताकत झोंककर उनको सही राह दिखाकर समाज की मुख्य धारा से जोड़ रहे हैं। ऐसे ही कर दिखाया है सरकारी स्कूल के अध्यापक मनोज मेघनवास और महेंद्रगढ़ शहर निवासी मंजू कौशिक।
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मनोज मेघनवास ने 12 वर्षों के संघर्ष के बाद 31 झुग्गी पाठशालाओं के माध्यम से चार हजार जरूरतमंद बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजियारा कर चुके हैं तो मंजू कौशिक ने 16 वर्ष पूर्व अभावों के बीच संघर्ष कर 2 हजार से अधिक जरूरतमंद महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उनका स्वरोजगार स्थापित करवा कर उनके जीवन में खुशियां भर दी हैं।
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12 साल में चार हजार बच्चों को बस्ती से दिखाई पाठशाला की राह
गांव मेघनवास निवासी मनोज ने वर्ष 2010 मे गांव खातोदड़ा से अध्यापक के रूप में अपना सफर शुरू किया था। 12 साल पहले रेवाड़ी रेलवे स्टेशन पर एक छह वर्ष की बच्ची को भीख मांगते देखकर उन्होंने ऐसे बच्चों को शिक्षा देकर उनको समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रण लिया। इसके बाद श्री बालाजी जनहित संगठन बनाकर झुग्गी-झोंपड़ियों के बच्चों को शिक्षा देने के लिए झुग्गी पाठशाला की शुरूआत की। उनके प्रयास और साथियों के सहयोग से जिले में 31 झुग्गी पाठशालाएं चलाई जा रही हैं। इसके लिए कोई सरकारी सहायता नहीं, बल्कि सामाजिक संगठनों, साथियों व समाजसेवियों की मदद से यह झुग्गी पाठशाला चल रही हैं। इन पाठशालाओं में संगठन से जुड़े 2 हजार अध्यापक जरूरतमंद बच्चों को शिक्षित कर समाज की मुख्य धारा से जोड़ रहे हैं। 12 साल पहले शहर के मोदाश्रम स्थित झुग्गी-झोंपड़ियों में पहली पाठशाला शुरू की गई थी। इन 12 वर्षों में 50 से अधिक बच्चे झुग्गियों से निकलकर सिविल सर्विस से लेकर अन्य क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन पाठशालाओं के माध्यम से अभी तक चार हजार बच्चों को बस्ती से पाठशाला की राह दिखा चुके हैं।
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मंजू कौशिक ने 2 हजार महिलाओं को दिया प्रशिक्षण
बेटी के जन्म पर कुआं पूजन की प्रथा शुरू कर प्रदेशभर में लिंगानुपात सुधार की दिशा में विशेष सम्मान पाने वाली शहर निवासी मंजू कौशिक ने 16 वर्ष पूर्व शुरू किए सफर में अब तक 2 हजार से अधिक जरूरतमंद महिलाओं को प्रशिक्षण दे चुकी हैं। प्रशिक्षण लेने 10 से अधिक स्वयं सहायता समूहों की 50 से अधिक महिलाओं ने स्वरोजगार स्थापित कर अन्य महिलाओं को रोजगार दिया है। वर्ष 2006 में सामन आर्ट एंड कल्चर ग्रुप बनाकर महिलाओं को सिलाई-कटाई, कढ़ाई, ब्यूटीशियन, पार्लर, वेस्ट का बेस्ट, नृत्य सहित अनेक प्रकार के प्रशिक्षण देकर समाज की मुख्य धारा से जोड़ा है। मंजू कौशिक द्वारा बनाए गए इस ग्रुप में आर्थिक रूप से सक्षम महिलाओं ने आर्थिक सहयोग से लेकर विशेषज्ञ महिलाओं ने प्रशिक्षण दिया है। इसके अलावा कौशिक ने 150 से अधिक घरेलू हिंसा के कारण टूटते परिवारों के जीवन में खुशियों के रंग भरे हैं जो आज भी विशेष अवसरों पर आभार व्यक्त करने कौशिक के पास पहुंचते हैं।

 मनोज मेघनवास।

मनोज मेघनवास।- फोटो : Narnol

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