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बेटी के 22 साल के संघर्ष के बाद पिता पर लगा दहेज हत्या का कलंक धुला

Thu, 25 Nov 2021 11:36 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 25 Nov 2021 11:36 PM IST
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After 22 years of daughter's struggle, father's stigma of dowry death was washed away
ऑनलाइन प्रेस वार्ता को संबोधित करतीं आस्था राव। संवाद - फोटो : Narnol
दहेज हत्या के एक मामले में 22 साल संघर्ष के बाद नारनौल शहर की महेंद्रगढ़ में रहने वाले परिवार को न्याय मिला है। 16 नवंबर को जयपुर न्यायालय की पीठासीन अधिकारी न्यायाधीश रिद्धिमा शर्मा ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी लेक्चरर विजय यादव को दोषमुक्त कर दिया है। साक्ष्यों से ये साबित हुआ कि उस समय विवाहिता ने आत्महत्या की थी तथा वह तनाव में थी। संघर्ष कर रहे परिवार की बेटी आस्था राव ने स्टिंग कर छिपे तथ्यों और झूठे गवाहों को कोर्ट के समक्ष उजागर किया। वीरवार को अमेरिका के न्यूयार्क से वर्चुअल माध्यम से पत्रकार वार्ता कर आस्था राव ने मामले की जानकारी मीडिया से साझा की। इस दौरान परिजनों ने पत्रकारों को स्टिंग ऑपरेशन की वीडियो भी दिखाई।
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यह था मामला
आस्था राव बताती हैं कि उनका परिवार नारनौल शहर की महेंद्रगढ़ सड़क पर ऑफिसर्स कॉलोनी के ए-12 मकान में रहता था। 10 फरवरी 1998 में उसके भाई योगेश की शादी नारनौल में आईटीआई निवासी रेणुका से हुई थी। योगेश जयपुर में केंद्र के एनएसएसओ (राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय) में नौकरी के कारण जयपुर में रहता था। वह वहीं पर किराये पर मकान लेकर रेणुका के साथ रहता था। 16 जून 1999 को रेणुका ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसके मायके वालों ने मानसरोवर थाना जयपुर में पिता जोगेंद्र सिंह, माता विजय यादव, भाई योगेश पर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज करवा दिया था। बाद में उसके पिता को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। चार वर्ष तक वो जेल में रहे। बाद में उनको जमानत मिल गई। लोवर कोर्ट ने उनको 10 वर्ष की सजा सुना दी थी। जमानत मिलने के बाद उनका हार्ट अटैक से निधन हो गया।
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15 वर्ष की बेटी ने स्टिंग ऑपरेशन कर दिलाया परिवार को न्याय
आस्था राव जब दसवीं कक्षा में पढ़ती थी, उस समय परिवार को न्यायालय दिलाने के लिए कसम खा ली थी। इस दौरान आस्था ने सभी गवाहों के साथ-साथ रेणुका की मां का भी स्टिंग ऑपरेशन किया। अपने आपको दूधिया बताने वाले गवान के बयान पर उसके पिता को सजा हुई थी। उसने गवाह का स्टिंग ऑपरेशन किया तो उसने बताया कि वह लड़की वालों को नहीं जानता। इससे पहले उसने लोवर कोर्ट में कहा कि जयपुर में वह उनके घर दूध देने जाता था। एक दिन जब वह दूध देने गया तब उसने जोगिंदर सिंह, मैडम विजय यादव और उनके बेटे योगेश को दहेज की मांग करते और रेणुका को यातना देते सुना व देखा था।
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स्टिंग में पता लगी सच्चाई
स्टिंग में रेणुका के पिता ने बताया कि वह गवाह उनका प्रॉपर्टी डीलिंग में मुख्य पार्टनर है। मृतका की मां ने बताया कि गवाह के नाम उन्होंने एक प्लाट भी नाम करवा रखा है। वह स्वयं भी अपने लिए 5 लाख रुपये और रेणुका के माता-पिता द्वारा 50 लाख की मांग करना बताता है। गवाह के भाई ने भी कोर्ट में बयान दिए कि उक्त गवाह ने कभी जयपुर में दूध बिक्री या डेयरी का काम ही नहीं किया।

प्रेमी के आत्महत्या करने के बाद डिप्रेशन की शिकार हो गई थी रेणुका
जानकारी के अनुसार शादी से पहले रेणुका का संजय नामक युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था। वह उससे शादी करना चाहती थी। दोनों की शादी नहीं होने के चलते संजय ने आत्महत्या कर ली थी। उसके बाद से रेणुका तनाव में थी। उसकी यह बीमारी बढ़ती गई। उसकी दवा भी चल रही थी। बाद में उसकी शादी योगेश के साथ हो गई। मेडिकल विशेषज्ञों की राय के अनुसार यह भी संभावना जताई थी कि अकेले होते ही रेणुका ने आत्महत्या कर ली हो।
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