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हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में एडीसीजीसी को मिली भारतीय पुनर्वास परिषद् की मंजूरी
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हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय(हकेंविवि) का मनोविज्ञान विभाग अब एडवांस डिप्लोमा इन चाइल्ड गाइडेंस एंड काउंसलिंग (एडीसीजीसी) का कोर्स भी कराएगा। विवि की मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान पीठ के अंतर्गत आने वाले मनोविज्ञान विभाग को रिहैब्लिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (आरसीआई), नई दिल्ली ने एडीसीजीसी पाठ्यक्रम चलाने की मंजूरी दे दी है।
विवि के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने मनोविज्ञान विभाग में नए पाठ्यक्रम की शुरूआत को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इसके माध्यम से गाइडेंस एंड कॉउंसिलिंग के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त प्रोफेशनल्स तैयार करने में मदद मिलेगी।
कुलपति ने कहा कि आरसीआई, नई दिल्ली की ओर से मंजूर यह डिप्लोमा पाठ्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को कॉउंसिलिंग एंड गाइडेंस के क्षेत्र में हो रहे बदलाव से अवगत कराया जाएगा और उन्हें भविष्य के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
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मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वीएन यादव ने बताया कि विश्वविद्यालय में यह पाठ्यक्रम सत्र 2021-22 से 2025-26 तक के लिए स्वीकृत किया गया है। इस एक वर्षीय पाठ्यक्रम में 25 विद्यार्थियों को दाखिला मिलेगा। इसके लिए निर्धारित योग्यता, दाखिला कार्यक्रम की घोषणा जल्द ही की जाएगी। डॉ. वीएन यादव ने विभाग के शिक्षकों डॉ. पायल चंदेल, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. विष्णु नारायण कुचेरिया, डॉ. रवि पांडेय, डॉ. रितु शर्मा के योगदान की सराहना की।
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विवि के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने मनोविज्ञान विभाग में नए पाठ्यक्रम की शुरूआत को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इसके माध्यम से गाइडेंस एंड कॉउंसिलिंग के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त प्रोफेशनल्स तैयार करने में मदद मिलेगी।
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कुलपति ने कहा कि आरसीआई, नई दिल्ली की ओर से मंजूर यह डिप्लोमा पाठ्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को कॉउंसिलिंग एंड गाइडेंस के क्षेत्र में हो रहे बदलाव से अवगत कराया जाएगा और उन्हें भविष्य के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
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मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वीएन यादव ने बताया कि विश्वविद्यालय में यह पाठ्यक्रम सत्र 2021-22 से 2025-26 तक के लिए स्वीकृत किया गया है। इस एक वर्षीय पाठ्यक्रम में 25 विद्यार्थियों को दाखिला मिलेगा। इसके लिए निर्धारित योग्यता, दाखिला कार्यक्रम की घोषणा जल्द ही की जाएगी। डॉ. वीएन यादव ने विभाग के शिक्षकों डॉ. पायल चंदेल, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. विष्णु नारायण कुचेरिया, डॉ. रवि पांडेय, डॉ. रितु शर्मा के योगदान की सराहना की।