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Mahendragarh-Narnaul News: गोचर भूमि पर तालाब के निर्माण का आरोप, ग्रामीणों में रोष

Sat, 27 Jul 2024 10:38 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Sat, 27 Jul 2024 10:38 PM IST
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Accusation of construction of pond in pasture land, anger among villagers
फोटो नंबर-12तालाब के निर्माण कार्य में लगी मशीन।
मंडी अटेली।
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अटल भूजल योजना के तहत राजस्थान की सीमा से सटे गांव खेड़ी में बनने वाले तालाब का निर्माण गोचर भूमि पर किए जाने से लोगों में रोष है। हालांकि यह क्षेत्र पानी की किल्लत से जूझ रहा है और तालाब के निर्माण से भूजल स्तर में सुधार होगा।
ग्रामीण खुशीराम, हरिसिंह, अमीलाल, रामचंद्र, विकास कुमार, रामनिवास, अशोक कुमार, विजय कुमार, बाबूलाल आदि का कहना है कि तालाब का निर्माण करना ग्रामीणों के लिए लाभदायक है, परंतु इसे समतल भूमि में बनाना चाहिए था। ग्राम पंचायत की ओर से नियमों को ताक पर रखते हुए इसका निर्माण गोचर भूमि पर किया जा रहा है। इससे हरे पेड़-पौधों का अस्तित्व खतरे में है। उनका कहना है कि निमार्ण कार्य के चलते अनेक पेड़ों को काट दिया गया। तालाब की खोदाई से निकलने वाली मिट्टी को भी वहीं डाला जा रहा है। जिससे छोटे पौधे भी नष्ट हो रहे हैं।
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अटल भूजल योजना के तहत गांव की 4 एकड़ गोचर भूमि में 2.50 करोड़ रुपए की लागत से तालाब का निर्माण किया जा रहा है, जो दो महिनों में बनकर तैयार होगा। लेकिन ग्रामीणों के रोष के चलते असमंजस की स्थिति बनी हुई हैं। तालाब को नहरी पानी से जोड़ने के साथ बरसात के पानी से भी जोड़ा जाएगा ताकि पानी की किल्लत को दूर किया जा सके। तालाब के निर्माण से भूजल स्तर में भी सुधार होगा।
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वर्जन:
सरकार की योजना के तहत गांव में करोड़ों रुपए की लागत से तालाब का निर्माण किया जा रहा है। जहां तक गोचर भूमि की बात है तालाब के लिए ऐसी जगह चयनित की गई हैं, जहां पेड़-पौधे नाम मात्र है। समतल जगह पर निर्माण कराने से पंचायत का रिवेन्यू समाप्त होता। जो लोग इस का विरोध कर रहे हैं, वही इस जगह को कड़बी, ईंधन डालकर प्रयोग करते रहे हैं, जो अब बंद हो गया।
सत्यनारायण यादव, सरपंच खेड़ी।




अटल भूजल योजना के तहत ढ़ाई करोड़ रुपए की लागत से चार एकड़ भूमि में तालाब का निर्माण किया जा रहा है, जो लगभग दो महिनों में बनकर तैयार होगा। जहां तक भूमि की बात है, उस जगह का प्रस्ताव पंचायत ने बीडीपीओ के माध्यम से दिया हुआ है। वहां पर पेड़-पौधे नहीं है। इस जगह से पेड़-पौधे काटने का आरोप निराधार है।

अशोक कुमार, एसडीओ, नहरी विभाग।



हमारे पास तालाब निर्माण की जगह से पेड़-पौधे काटने के लिए न तो किसी ने अनुमति ली है और न ही इस बारे हमें कोई शिकायत मिली है। यदि बिना अनुमति के हरे पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाया गया है तो उचित कार्रवाई की जाएगी।
रजनीश, रेंजर वन विभाग।
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