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शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देने का एक ऐतिहासिक कदम : कुलपति
Tue, 07 Oct 2025 11:45 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 07 Oct 2025 11:45 PM IST
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महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)पर केंद्रित उन्मुखीकरण एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम के 28वें संस्करण का शुभारंभ मंगलवार से हुआ।
ऑनलाइन होने वाले कार्यक्रम में प्रतिभागियों को समग्र एवं बहुविषयी शिक्षा, भारतीय ज्ञान प्रणाली, शैक्षणिक नेतृत्व, अनुसंधान, कौशल विकास, विद्यार्थी विविधता तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के उपयोग से संबंधित विषयों की बारीकियों से अवगत कराया जाएगा। कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार मुख्य अतिथि के रूप में और डॉ. गुरचरण दास विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कुलपति ने कहा कि यह नीति भारत की शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देने का एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की भूमिका अब केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उन्हें ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है जो अपनी डिग्री प्राप्ति के साथ ही व्यावहारिक रूप से कार्य करने में सक्षम हो।
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डॉ. गुरचरण दास ने कहा कि शिक्षकों को नई पीढ़ी के विद्यार्थियों का स्वागत उन सभी उपकरणों और तकनीकों के साथ करना चाहिए, जिनसे वे अपनी जिज्ञासाओं का समाधान कर सकें।
इससे पूर्व में विश्वविद्यालय में मदन मोहन मालवीय टीचर ट्रेनिंग सेंटर के निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार एवं सह-निदेशक प्रो. तनु गुप्ता ने विशिष्ट अतिथियों, वक्ताओं एवं देशभर के विभिन्न उच्च शिक्षा संस्थानों से आए प्रतिभागियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के समन्वयक हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ. जसवंत कुमार एवं एमएम कॉलेज, फतेहाबाद के डॉ. विजय गोयल ने बताया कि इस कार्यक्रम में हरियाणा सहित देश के विभिन्न राज्यों से 100 से अधिक प्रतिभागी प्रतिभागिता कर रहे हैं।
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ऑनलाइन होने वाले कार्यक्रम में प्रतिभागियों को समग्र एवं बहुविषयी शिक्षा, भारतीय ज्ञान प्रणाली, शैक्षणिक नेतृत्व, अनुसंधान, कौशल विकास, विद्यार्थी विविधता तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के उपयोग से संबंधित विषयों की बारीकियों से अवगत कराया जाएगा। कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार मुख्य अतिथि के रूप में और डॉ. गुरचरण दास विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
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कुलपति ने कहा कि यह नीति भारत की शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देने का एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की भूमिका अब केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उन्हें ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है जो अपनी डिग्री प्राप्ति के साथ ही व्यावहारिक रूप से कार्य करने में सक्षम हो।
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डॉ. गुरचरण दास ने कहा कि शिक्षकों को नई पीढ़ी के विद्यार्थियों का स्वागत उन सभी उपकरणों और तकनीकों के साथ करना चाहिए, जिनसे वे अपनी जिज्ञासाओं का समाधान कर सकें।
इससे पूर्व में विश्वविद्यालय में मदन मोहन मालवीय टीचर ट्रेनिंग सेंटर के निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार एवं सह-निदेशक प्रो. तनु गुप्ता ने विशिष्ट अतिथियों, वक्ताओं एवं देशभर के विभिन्न उच्च शिक्षा संस्थानों से आए प्रतिभागियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के समन्वयक हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ. जसवंत कुमार एवं एमएम कॉलेज, फतेहाबाद के डॉ. विजय गोयल ने बताया कि इस कार्यक्रम में हरियाणा सहित देश के विभिन्न राज्यों से 100 से अधिक प्रतिभागी प्रतिभागिता कर रहे हैं।