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धर्म से संसार में रहती है सुख और शांति : स्वामी विज्ञानानंद
Updated Sat, 02 Sep 2017 12:40 AM IST
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धर्म से संसार में रहती है सुख और शांति : स्वामी विज्ञानानंद
अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। बाबा जयरामदास धर्मशाला में श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानोत्सव के अंतर्गत चल रही कथा में हरिद्वार से पधारे महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती ने कहा कि हमारा जीवन सफल तब है जब हम देश, अपने और परमात्मा के लिए उपयोगी हो जाएं।
उन्होंने कहा कि अपने लिए मनुष्य तप और त्याग से उपयोगी होता है। मनुष्य में बड़ी भारी शक्ति विद्यमान है। हम सब बड़े भाग्यशाली हैं जो मनुष्य के शरीर को प्राप्त किया है।
स्वामी ने कहा कि धर्म से संसार में सुख, शांति रहती है। देवत्व की वृद्धि होती है। भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य एवं उनकी बाल लीलाओं के प्रसंग को लेकर उन्होंने कहा कि अधर्म के बढ़ जाने के कारण भगवान को धराधाम पर आना ही पड़ता है। जब माता को पीड़ा होती है तो हम मनुष्यों का जन्म होता है। लेकिन जब संतों को पीड़ा होती है तब भगवान निराकार से साकार रूप में धराधाम पर आते हैं। इस मौके पर श्रीकिशन मस्ताना, किशन सोनी, जगदीश, शिवचरण गुप्ता, दीपक मेहता, रामू, मुन्नी देवी, मास्टर जयदयाल वर्मा, आचार्य श्याम आदि मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। बाबा जयरामदास धर्मशाला में श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानोत्सव के अंतर्गत चल रही कथा में हरिद्वार से पधारे महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती ने कहा कि हमारा जीवन सफल तब है जब हम देश, अपने और परमात्मा के लिए उपयोगी हो जाएं।
उन्होंने कहा कि अपने लिए मनुष्य तप और त्याग से उपयोगी होता है। मनुष्य में बड़ी भारी शक्ति विद्यमान है। हम सब बड़े भाग्यशाली हैं जो मनुष्य के शरीर को प्राप्त किया है।
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स्वामी ने कहा कि धर्म से संसार में सुख, शांति रहती है। देवत्व की वृद्धि होती है। भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य एवं उनकी बाल लीलाओं के प्रसंग को लेकर उन्होंने कहा कि अधर्म के बढ़ जाने के कारण भगवान को धराधाम पर आना ही पड़ता है। जब माता को पीड़ा होती है तो हम मनुष्यों का जन्म होता है। लेकिन जब संतों को पीड़ा होती है तब भगवान निराकार से साकार रूप में धराधाम पर आते हैं। इस मौके पर श्रीकिशन मस्ताना, किशन सोनी, जगदीश, शिवचरण गुप्ता, दीपक मेहता, रामू, मुन्नी देवी, मास्टर जयदयाल वर्मा, आचार्य श्याम आदि मौजूद रहे।
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