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फिटनेस के नाम पर हो रही महज खानापूर्ति
Updated Thu, 14 Sep 2017 11:16 PM IST
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फिटनेस के नाम पर हो रही महज खानापूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। गुरुग्राम के रायन स्कूल में हुई घटना के बाद हर अभिभावक को स्कूल के समय के दौरान अपने बच्चों की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी सभी सरकारों को स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद निजी स्कूल संचालक नियमों को ताक पर रख रहे हैं। सख्त नियम होने के बाद भी स्कूलों में लगी बहुत सी बसों में अनेक खामियां हैं। इतना होते हुए भी परिवहन विभाग इस पर कार्रवाई करने के स्थान पर खानापूर्ति कर रहा है। वीरवार को स्कूली बसों की पासिंग हुई। वहां के स्थल का अमर उजाला की टीम ने दौरा किया तो देखा कि पासिंग के नाम पर परिवहन विभाग के अधिकारी औपचारिकता पूरी कर रहे थे।
स्कूलों में ट्रांसपोर्ट एक मुख्य कड़ी होती है। अधिकांश स्कूली बच्चे बसों से ही स्कूल जाते हैं। शहर के बड़े स्कूल शहर की सीमा से बाहर हैं। इसलिए बस अभिभावकों के लिए भी जरूरी है। इन स्कूली बसों के लिए सरकार ने विशेष गाइड लाइन और नियम जारी किए गए हैं। उन नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी परिवहन विभाग की है। इस विभाग के अधिकारी हर साल स्कूली बसों को फिटनेस सर्टिफिकेट देते है। वीरवार को अमर उजाला टीम नई अनाज मंडी स्थित पासिंग स्थल पर पहुंची तो आरटीए विभाग के सहायक सचिव सुरेंद्र सिंह स्कूली बसों की जांच कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने न्यायालय की गाइड लाइन के अनुसार बसों को चेक करने की जरूरत नहीं समझी। यह तक नहीं देखा कि स्कूली बसों में लगे सीसीटीवी कैमरे ठीक से कार्य कर रहे है या नहीं। उन्हाेंने फटाफट 40-50 बसों को फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिए।
फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने के बाद नहीं होती बसों की चेकिंग
फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने के बाद परिवहन विभाग इन स्कूली बसों को चेक करने की जहमत नहीं उठाता। इसका फायदा स्कूल संचालक उठाते हैं। पासिंग के दौरान स्कूल संचालक बसों में सीसीटीवी कैमरे, स्पीड गवर्नर, फर्स्ट एड बॉक्स, फायर फाइटिंग उपकरण आदि लगवा लेते हैं। फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने के बाद इन बसों से इन चीजों को उतार कर स्कूल की अन्य बसों में लगाकर उन्हें पास करा लिया जाता है। बाद में चेकिंग नहीं होने से इन बसों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
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ठेके पर चल रहीं स्कूली बसों
क्षेत्र में कई ऐसे स्कूल हैं, जिनके पास जिनके पास अपनी पर्याप्त स्कूल बसें नहीं हैं। ये स्कूल ठेके पर बसें लेकर विभिन्न रूटों पर चला रहे है। नियमानुसार स्कूली बसों का रजिस्ट्रेशन संस्थान के नाम पर ही होना चाहिए, लेकिन कुछ संस्थान नियमों को ताक पर रखकर ठेके पर बसें लेकर बच्चों को लाने-जाने में कर रहे है।
स्कूली बसों पर लगाया 98 हजार का जुर्माना
आरटीए विभाग नारनौल ने नियमों को उल्लंघन करने वाले स्कूली वाहनों पर अब तक करीब 98 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इस प्रकार नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों से आरटीए विभाग ने अप्रैल 2016 से अगस्त 2017 तक करीब 98 हजार रुपये की जुर्माना राशि वसूल है।
स्कूली वाहनों को विशेष रूप से जांचा जाता है। यदि कोई कमी पाई जाती है तो उस वाहन को फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं दिया जाता। समय-समय पर वाहनों की जांच की जाती है। जांच में सही नहीं पाए जाने पर जुर्माना भी लगाया जाता है।
-सुरेंद्र सिंह, आरटीए सचिव, नारनौल
स्कूल बसों के नियम
-स्कूल वाहनों का रंग पीला होना चाहिए।
-स्कूल वाहनों में स्पीडो मीटर लगा होना चाहिए।
-स्कूल वाहनों के पीछे पुलिस हेल्पलाइन नंबर का अंकित होना जरूरी है।
-स्कूल वाहनों में सामने की ओर निर्धारित रूट पर चलने वाली जानकारी अंकित होनी चाहिए।
-स्कूली बसों में फर्स्ट एड बाक्स के साथ फायर गैस किट होना जरूरी है।
-स्कूली बसों में आगे और पीछे की ओर सीसीटीवी कैमरे का लगा होना आवश्यक है।
-चालक व परिचालक के पास स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट होना चाहिए।
-स्कूली बस का चालक व परिचालक निर्धारित वर्दी में होना चाहिए।
-स्कूली वाहनों पर आगे व पीछे की ओर सफेद व लाल रंग की रिफ्लेक्टर टेप लगी होनी चाहिए।
-चालक के पास कम से कम पांच वाहन चलाने का अनुभव होना चाहिए।
-स्कूली वाहन में जीपीएस का लगा होना भी जरूरी है।
-स्कूली बस में एक महिला का मौजूद रहना आवश्यक है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। गुरुग्राम के रायन स्कूल में हुई घटना के बाद हर अभिभावक को स्कूल के समय के दौरान अपने बच्चों की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी सभी सरकारों को स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद निजी स्कूल संचालक नियमों को ताक पर रख रहे हैं। सख्त नियम होने के बाद भी स्कूलों में लगी बहुत सी बसों में अनेक खामियां हैं। इतना होते हुए भी परिवहन विभाग इस पर कार्रवाई करने के स्थान पर खानापूर्ति कर रहा है। वीरवार को स्कूली बसों की पासिंग हुई। वहां के स्थल का अमर उजाला की टीम ने दौरा किया तो देखा कि पासिंग के नाम पर परिवहन विभाग के अधिकारी औपचारिकता पूरी कर रहे थे।
स्कूलों में ट्रांसपोर्ट एक मुख्य कड़ी होती है। अधिकांश स्कूली बच्चे बसों से ही स्कूल जाते हैं। शहर के बड़े स्कूल शहर की सीमा से बाहर हैं। इसलिए बस अभिभावकों के लिए भी जरूरी है। इन स्कूली बसों के लिए सरकार ने विशेष गाइड लाइन और नियम जारी किए गए हैं। उन नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी परिवहन विभाग की है। इस विभाग के अधिकारी हर साल स्कूली बसों को फिटनेस सर्टिफिकेट देते है। वीरवार को अमर उजाला टीम नई अनाज मंडी स्थित पासिंग स्थल पर पहुंची तो आरटीए विभाग के सहायक सचिव सुरेंद्र सिंह स्कूली बसों की जांच कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने न्यायालय की गाइड लाइन के अनुसार बसों को चेक करने की जरूरत नहीं समझी। यह तक नहीं देखा कि स्कूली बसों में लगे सीसीटीवी कैमरे ठीक से कार्य कर रहे है या नहीं। उन्हाेंने फटाफट 40-50 बसों को फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिए।
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फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने के बाद नहीं होती बसों की चेकिंग
फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने के बाद परिवहन विभाग इन स्कूली बसों को चेक करने की जहमत नहीं उठाता। इसका फायदा स्कूल संचालक उठाते हैं। पासिंग के दौरान स्कूल संचालक बसों में सीसीटीवी कैमरे, स्पीड गवर्नर, फर्स्ट एड बॉक्स, फायर फाइटिंग उपकरण आदि लगवा लेते हैं। फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने के बाद इन बसों से इन चीजों को उतार कर स्कूल की अन्य बसों में लगाकर उन्हें पास करा लिया जाता है। बाद में चेकिंग नहीं होने से इन बसों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
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ठेके पर चल रहीं स्कूली बसों
क्षेत्र में कई ऐसे स्कूल हैं, जिनके पास जिनके पास अपनी पर्याप्त स्कूल बसें नहीं हैं। ये स्कूल ठेके पर बसें लेकर विभिन्न रूटों पर चला रहे है। नियमानुसार स्कूली बसों का रजिस्ट्रेशन संस्थान के नाम पर ही होना चाहिए, लेकिन कुछ संस्थान नियमों को ताक पर रखकर ठेके पर बसें लेकर बच्चों को लाने-जाने में कर रहे है।
स्कूली बसों पर लगाया 98 हजार का जुर्माना
आरटीए विभाग नारनौल ने नियमों को उल्लंघन करने वाले स्कूली वाहनों पर अब तक करीब 98 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इस प्रकार नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों से आरटीए विभाग ने अप्रैल 2016 से अगस्त 2017 तक करीब 98 हजार रुपये की जुर्माना राशि वसूल है।
स्कूली वाहनों को विशेष रूप से जांचा जाता है। यदि कोई कमी पाई जाती है तो उस वाहन को फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं दिया जाता। समय-समय पर वाहनों की जांच की जाती है। जांच में सही नहीं पाए जाने पर जुर्माना भी लगाया जाता है।
-सुरेंद्र सिंह, आरटीए सचिव, नारनौल
स्कूल बसों के नियम
-स्कूल वाहनों का रंग पीला होना चाहिए।
-स्कूल वाहनों में स्पीडो मीटर लगा होना चाहिए।
-स्कूल वाहनों के पीछे पुलिस हेल्पलाइन नंबर का अंकित होना जरूरी है।
-स्कूल वाहनों में सामने की ओर निर्धारित रूट पर चलने वाली जानकारी अंकित होनी चाहिए।
-स्कूली बसों में फर्स्ट एड बाक्स के साथ फायर गैस किट होना जरूरी है।
-स्कूली बसों में आगे और पीछे की ओर सीसीटीवी कैमरे का लगा होना आवश्यक है।
-चालक व परिचालक के पास स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट होना चाहिए।
-स्कूली बस का चालक व परिचालक निर्धारित वर्दी में होना चाहिए।
-स्कूली वाहनों पर आगे व पीछे की ओर सफेद व लाल रंग की रिफ्लेक्टर टेप लगी होनी चाहिए।
-चालक के पास कम से कम पांच वाहन चलाने का अनुभव होना चाहिए।
-स्कूली वाहन में जीपीएस का लगा होना भी जरूरी है।
-स्कूली बस में एक महिला का मौजूद रहना आवश्यक है।