{"_id":"5c9d14f5bdec22140a1759b0","slug":"51553798389-mahendragarh-narnaul-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिन में सरसों की फसल की कटाई, रात में गेहूं की रखवाली की मजबूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिन में सरसों की फसल की कटाई, रात में गेहूं की रखवाली की मजबूरी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। लावारिस पशु किसानों के लिए भी मुसीबत बने हुए हैं। किसान दिन में अपनी सरसों की कटाई करते हैं। रात के समय अपनी गेहूं की फसल को बचाने के लिए रखवाली करते हैं। किसान अगर दो घंटे भी सो जाएं तो फसल चौपट मिलेगी। लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए प्रशासन की ओर से अभी कोई शुरूआत नहीं की गई है।
गांव आकोदा, बसई, खुड़ाना में लावारिस पशुओं का आतंक है। पशुओं के कारण किसानों को दोहरी ड्यूटी करनी पड़ रही है। किसान दिन के समय अपने खेतों में काम करते हैं। रात को अपनी फसलों को बचाने के लिए रखवाली करने के लिए बैठे रहते हैं। पशुओं को झुंड गांवों में घूमते रहते हैं। जिस खेत में कोई रखवाला न हो उन खेतों में लावारिस पशु कुछ ही घंटों में भारी नुकसान कर देते हैं। गेहूं की फसल में सबसे अधिक नुकसान हो रहा है। महेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र में 29 गोशालाएं होने के बावजूद गांवों में लावारिस पशु घूम रहे हैं।
सरकार इतने विकास कार्य करा रही है। किसानों को भी कुछ राहत प्रदान करे। अगर सरकार लावारिस पशुओं को पकड़कर गोशाला भिजवा दे तो हमें रात भर नहीं जागना पड़ेगा। सरकार की ओर से लावारिस पशुओं के लिए कोई योजना नहीं है। फसल के लिए दिन रात जागते हैं।
विज्ञापन
- प्रवीन शर्मा, किसान गांव बसई।
हम तो 24 घंटे खेत में रहने को मजबूर हैं। पता नहीं कब किधर से पशुओं का झुंड आ जाएगा। दिन के समय सरसों की कटाई कर रहे हैं। रात को गेहूं की फसल को बचाने के लिए रखवाली करते हैं। हम चौकीदार बनकर रह गए हैं। अगर दो तीन घंटे भी सो गए तो सुबह तक सब चौपट मिलेगा।
- बुधराम, किसान गांव बसई।
गांव में करीब 200 से 300 लावारिस पशु हैं। लावारिस पशुओं के कारण गांव के अधिकतर किसान खेतों में ही रहते हैं। परिवार के लोग बारी बारी से रात को डयूटी देते हें। जरा सी लापरवाही पूरे साल की मेहनत को बर्बाद कर सकती है। कई बार तो पशु किसानों पर भी हमला बोल देते हैं।
- प्रवीण शर्मा, किसान गांव खुड़ाना।
लावारिस पशुओं का आतंक हमारे गांव नहीं पूरे जिले में है। गांव में गोशाला भी है। काफी पशु पकड़कर गोशाला भेजे गए थे। कुछ दिन बाद ही पशु दोबारा से सड़कों पर आ जाते हैं। लावारिस पशुओं को रोकने के लिए सरकार की ओर से कोई प्रबंध नहीं है।
- राधेश्याम, पूर्व सरपंच, गांव खुड़ाना।
लावारिस पशुओं ने पूरे गांव को परेशान कर रखा है। खेतों में ही नहीं गांव में भी पशु दिन भर घूमते रहते हैं। पालतू पशुओं पर हमला बोलते हैं। बच्चों को भी इन लावारिस पशुओं के कारण हमेशा डर बना रहता है। सरकार जल्द से जल्द इनसे निजात दिलाए।
गजराज, किसान, गांव खुड़ाना।
विज्ञापन
महेंद्रगढ़। लावारिस पशु किसानों के लिए भी मुसीबत बने हुए हैं। किसान दिन में अपनी सरसों की कटाई करते हैं। रात के समय अपनी गेहूं की फसल को बचाने के लिए रखवाली करते हैं। किसान अगर दो घंटे भी सो जाएं तो फसल चौपट मिलेगी। लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए प्रशासन की ओर से अभी कोई शुरूआत नहीं की गई है।
गांव आकोदा, बसई, खुड़ाना में लावारिस पशुओं का आतंक है। पशुओं के कारण किसानों को दोहरी ड्यूटी करनी पड़ रही है। किसान दिन के समय अपने खेतों में काम करते हैं। रात को अपनी फसलों को बचाने के लिए रखवाली करने के लिए बैठे रहते हैं। पशुओं को झुंड गांवों में घूमते रहते हैं। जिस खेत में कोई रखवाला न हो उन खेतों में लावारिस पशु कुछ ही घंटों में भारी नुकसान कर देते हैं। गेहूं की फसल में सबसे अधिक नुकसान हो रहा है। महेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र में 29 गोशालाएं होने के बावजूद गांवों में लावारिस पशु घूम रहे हैं।
विज्ञापन
सरकार इतने विकास कार्य करा रही है। किसानों को भी कुछ राहत प्रदान करे। अगर सरकार लावारिस पशुओं को पकड़कर गोशाला भिजवा दे तो हमें रात भर नहीं जागना पड़ेगा। सरकार की ओर से लावारिस पशुओं के लिए कोई योजना नहीं है। फसल के लिए दिन रात जागते हैं।
विज्ञापन
- प्रवीन शर्मा, किसान गांव बसई।
हम तो 24 घंटे खेत में रहने को मजबूर हैं। पता नहीं कब किधर से पशुओं का झुंड आ जाएगा। दिन के समय सरसों की कटाई कर रहे हैं। रात को गेहूं की फसल को बचाने के लिए रखवाली करते हैं। हम चौकीदार बनकर रह गए हैं। अगर दो तीन घंटे भी सो गए तो सुबह तक सब चौपट मिलेगा।
- बुधराम, किसान गांव बसई।
गांव में करीब 200 से 300 लावारिस पशु हैं। लावारिस पशुओं के कारण गांव के अधिकतर किसान खेतों में ही रहते हैं। परिवार के लोग बारी बारी से रात को डयूटी देते हें। जरा सी लापरवाही पूरे साल की मेहनत को बर्बाद कर सकती है। कई बार तो पशु किसानों पर भी हमला बोल देते हैं।
- प्रवीण शर्मा, किसान गांव खुड़ाना।
लावारिस पशुओं का आतंक हमारे गांव नहीं पूरे जिले में है। गांव में गोशाला भी है। काफी पशु पकड़कर गोशाला भेजे गए थे। कुछ दिन बाद ही पशु दोबारा से सड़कों पर आ जाते हैं। लावारिस पशुओं को रोकने के लिए सरकार की ओर से कोई प्रबंध नहीं है।
- राधेश्याम, पूर्व सरपंच, गांव खुड़ाना।
लावारिस पशुओं ने पूरे गांव को परेशान कर रखा है। खेतों में ही नहीं गांव में भी पशु दिन भर घूमते रहते हैं। पालतू पशुओं पर हमला बोलते हैं। बच्चों को भी इन लावारिस पशुओं के कारण हमेशा डर बना रहता है। सरकार जल्द से जल्द इनसे निजात दिलाए।
गजराज, किसान, गांव खुड़ाना।