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हाई कोर्ट ने नगरपालिका चेयरपर्सन रीना देवी की याचिका को किया खारिज
Updated Wed, 30 May 2018 12:56 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़।
नगरपालिका चेयरपर्सन रीना देवी द्वारा अविश्वास प्रस्ताव पर रोक लगाने के लिए दायर की गई याचिका को हाईकोर्ट ने मंगलवार को खारिज कर दिया। यह फैसला पिछले एक महीने से सुरक्षित चल रहा था। फैसला आने के बाद विरोधी पार्षदों के समर्थकों ने आजाद चौक पर पटाखे चलाकर खुशी मनाई है। इस फैसले के साथ नपा चेयरपर्सन की कुर्सी भी खतरे में पड़ गई है।
बता दें कि 19 फरवरी को शहर के दस पार्षदों ने एकजुट होकर नगरपालिका चेयरपर्सन रीना देवी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए जिला उपायुक्त को पत्र सौंपा था। जिला उपायुक्त द्वारा उनके पत्र को स्वीकार कर आठ मार्च की तारीख दे दी थी। मीटिंग की तैयारियां भी हो चुकी थीं किंतु इससे पूर्व नपा चेयरपर्सन ने हाईकोर्ट में अविश्वास प्रस्ताव रोकने के लिए याचिका दायर कर दी। जिस कारण आठ मार्च की मीटिंग रद्द करनी पड़ी। इसके बाद चार अप्रैल को न्यायाधीश ने गत एक दिसंबर को त्याग पत्र देने वाले तीनों पार्षदों का स्टेटस पूछा। न्यायाधीश ने 25 अप्रैल को फैसले को सुरक्षित रख लिया था जिसकी का फैसला मंगलवार को सुना दिया गया।
ये है मामला
नपा चेयरपर्सन रीना देवी एवं पार्षद पति सुरेंद्र बंटी से पार्षद अमित मिश्रा, बबीता सैनी, कमलेश तायल एवं नरेंद्र खन्ना नाराज चल रहे थे। इनमें बबीता सैनी को छोड़कर तीनों पार्षदों ने गत एक दिसबंर को जिला उपायुक्त डॉ. गरिमा मित्तल का सामूहिक इस्तीफा दिया था। इस्तीफा देने के बाद 13 दिसबंर को इन पार्षदों ने सचिव के नाम पुनर्विचार के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। किंतु यह प्रार्थना पत्र समय पर नहीं पहुंच पाने के कारण 18 दिसंबर को जिला उपायुक्त ने इस्तीफा स्वीकार कर डी-नोटिफिकेशन के लिए भेज दिया था। उसके बाद मामला कई दिनों से लंबित पड़ा रहा। इसके बाद 10 पार्षदों ने मिलकर 19 फरवरी को जिला उपायुक्त को अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए आवेदन कर दिया और आठ मार्च को मीटिंग रख दी गई। मीटिंग की सूचना इस्तीफा देने वाले तीनों पार्षदों को भी दी गई। किंतु नपा चेयरपर्सन का मानना था कि तीन पार्षदों का इस्तीफा मंजूर होने के बाद उन्हें वोट देने के अधिकार नहीं हैं। इसको लेकर चेयरपर्सन ने सात मार्च को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिससे उनको स्टे मिल गया था।
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दो वर्ष पहले ली थी शपथ
रीना देवी को एक अगस्त 2016 को शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा के सहयोग से सर्वसम्मति से नगरपालिका की चेयरपर्सन तथा रमेश बोहरा को उप प्रधान बनाया गया था। इसके बाद पार्षदों एवं चेयरपर्सन की आपसी खींचतान शुरू हो गई। कई बार शिक्षामंत्री ने हस्तक्षेप कर पार्षदों को समझाया। किंतु उसके बाद भी खींचतान कम नहीं हुई।
ये पार्षद हैं एकजुट
नगरपालिका वार्ड-1 से डॉ. तरुण, वार्ड-4 से रमेश बोहरा, वार्ड-6 से अमित मिश्रा, वार्ड-7 से कृष्ण शर्मा उर्फ भिंडी, वार्ड-8 से मोनिका सैनी के प्रतिनिधि छोटू सैनी, वार्ड-9 से देवेंद्र उर्फ सोनू, वार्ड-10 से बबीता सैनी के प्रतिनिधि जेबी सैनी, वार्ड-11 से नरेंद्र खन्ना, वार्ड-12 से विष्णु, वार्ड-15 से कमलेश तायल के प्रतिनिधि सुनील तायल एकजुट होकर जिला उपायुक्त को अविश्वास प्रस्ताव के लिए आवेदन किया था। अगर अविश्वास प्रस्ताव आता है तो अभी ये सभी पार्षद एकजुट हैं और चेयरपर्सन की कुर्सी को खतरा हो सकता है। जबकि रीना देवी के पास पांच पार्षद हैं।
वर्जन:
सच्चाई की जीत हुई है। अब नगरपालिका चेयरपर्सन एवं उनके पार्षद पति की तानाशाही पर अंकुश लगेगा। सभी पार्षद नगर के विकास के लिए मिलकर काम करेंगे। कोर्ट के आदेश की कॉपी आने के बाद भविष्य की रणनीति तैयार की जाएगी।
- अमित मिश्रा, वार्ड-6 पार्षद।
मैंने हार नहीं मानी है। अभी सुप्रीमकोर्ट के दरवाजे खुले हैं। हाईकोर्ट के फैसले की सुप्रीमकोर्ट में अपील की जाएगी।
- रीना गर्ग, चेयरपर्सन, नगरपालिका।
हाईकोर्ट न्यायाधीश ने नगरपालिका चेयरपर्सन रीना देवी की याचिका खारिज कर दी है। चेयरपर्सन ने इस्तीफा देने वाले तीनों पार्षदों को डिसक्वालीफाई समझे जाने की याचिका दायर की थी।
- राजेश श्योराण, अधिवक्ता जिला उपायुक्त।
न्यायाधीश ने नगरपालिका चेयरपर्सन रीना देवी की याचिका को खारिज कर दिया है। अभी डिटेल नहीं आई हैं। डिटेल आने के बाद ही कुछ बताया जा सकता है। किंतु फैसला मंगलवार को सुना दिया गया है।
- दीपक जिंदल, विरोधी पार्षद कमलेश तायल के वकील।
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महेंद्रगढ़।
नगरपालिका चेयरपर्सन रीना देवी द्वारा अविश्वास प्रस्ताव पर रोक लगाने के लिए दायर की गई याचिका को हाईकोर्ट ने मंगलवार को खारिज कर दिया। यह फैसला पिछले एक महीने से सुरक्षित चल रहा था। फैसला आने के बाद विरोधी पार्षदों के समर्थकों ने आजाद चौक पर पटाखे चलाकर खुशी मनाई है। इस फैसले के साथ नपा चेयरपर्सन की कुर्सी भी खतरे में पड़ गई है।
बता दें कि 19 फरवरी को शहर के दस पार्षदों ने एकजुट होकर नगरपालिका चेयरपर्सन रीना देवी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए जिला उपायुक्त को पत्र सौंपा था। जिला उपायुक्त द्वारा उनके पत्र को स्वीकार कर आठ मार्च की तारीख दे दी थी। मीटिंग की तैयारियां भी हो चुकी थीं किंतु इससे पूर्व नपा चेयरपर्सन ने हाईकोर्ट में अविश्वास प्रस्ताव रोकने के लिए याचिका दायर कर दी। जिस कारण आठ मार्च की मीटिंग रद्द करनी पड़ी। इसके बाद चार अप्रैल को न्यायाधीश ने गत एक दिसंबर को त्याग पत्र देने वाले तीनों पार्षदों का स्टेटस पूछा। न्यायाधीश ने 25 अप्रैल को फैसले को सुरक्षित रख लिया था जिसकी का फैसला मंगलवार को सुना दिया गया।
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ये है मामला
नपा चेयरपर्सन रीना देवी एवं पार्षद पति सुरेंद्र बंटी से पार्षद अमित मिश्रा, बबीता सैनी, कमलेश तायल एवं नरेंद्र खन्ना नाराज चल रहे थे। इनमें बबीता सैनी को छोड़कर तीनों पार्षदों ने गत एक दिसबंर को जिला उपायुक्त डॉ. गरिमा मित्तल का सामूहिक इस्तीफा दिया था। इस्तीफा देने के बाद 13 दिसबंर को इन पार्षदों ने सचिव के नाम पुनर्विचार के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। किंतु यह प्रार्थना पत्र समय पर नहीं पहुंच पाने के कारण 18 दिसंबर को जिला उपायुक्त ने इस्तीफा स्वीकार कर डी-नोटिफिकेशन के लिए भेज दिया था। उसके बाद मामला कई दिनों से लंबित पड़ा रहा। इसके बाद 10 पार्षदों ने मिलकर 19 फरवरी को जिला उपायुक्त को अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए आवेदन कर दिया और आठ मार्च को मीटिंग रख दी गई। मीटिंग की सूचना इस्तीफा देने वाले तीनों पार्षदों को भी दी गई। किंतु नपा चेयरपर्सन का मानना था कि तीन पार्षदों का इस्तीफा मंजूर होने के बाद उन्हें वोट देने के अधिकार नहीं हैं। इसको लेकर चेयरपर्सन ने सात मार्च को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिससे उनको स्टे मिल गया था।
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दो वर्ष पहले ली थी शपथ
रीना देवी को एक अगस्त 2016 को शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा के सहयोग से सर्वसम्मति से नगरपालिका की चेयरपर्सन तथा रमेश बोहरा को उप प्रधान बनाया गया था। इसके बाद पार्षदों एवं चेयरपर्सन की आपसी खींचतान शुरू हो गई। कई बार शिक्षामंत्री ने हस्तक्षेप कर पार्षदों को समझाया। किंतु उसके बाद भी खींचतान कम नहीं हुई।
ये पार्षद हैं एकजुट
नगरपालिका वार्ड-1 से डॉ. तरुण, वार्ड-4 से रमेश बोहरा, वार्ड-6 से अमित मिश्रा, वार्ड-7 से कृष्ण शर्मा उर्फ भिंडी, वार्ड-8 से मोनिका सैनी के प्रतिनिधि छोटू सैनी, वार्ड-9 से देवेंद्र उर्फ सोनू, वार्ड-10 से बबीता सैनी के प्रतिनिधि जेबी सैनी, वार्ड-11 से नरेंद्र खन्ना, वार्ड-12 से विष्णु, वार्ड-15 से कमलेश तायल के प्रतिनिधि सुनील तायल एकजुट होकर जिला उपायुक्त को अविश्वास प्रस्ताव के लिए आवेदन किया था। अगर अविश्वास प्रस्ताव आता है तो अभी ये सभी पार्षद एकजुट हैं और चेयरपर्सन की कुर्सी को खतरा हो सकता है। जबकि रीना देवी के पास पांच पार्षद हैं।
वर्जन:
सच्चाई की जीत हुई है। अब नगरपालिका चेयरपर्सन एवं उनके पार्षद पति की तानाशाही पर अंकुश लगेगा। सभी पार्षद नगर के विकास के लिए मिलकर काम करेंगे। कोर्ट के आदेश की कॉपी आने के बाद भविष्य की रणनीति तैयार की जाएगी।
- अमित मिश्रा, वार्ड-6 पार्षद।
मैंने हार नहीं मानी है। अभी सुप्रीमकोर्ट के दरवाजे खुले हैं। हाईकोर्ट के फैसले की सुप्रीमकोर्ट में अपील की जाएगी।
- रीना गर्ग, चेयरपर्सन, नगरपालिका।
हाईकोर्ट न्यायाधीश ने नगरपालिका चेयरपर्सन रीना देवी की याचिका खारिज कर दी है। चेयरपर्सन ने इस्तीफा देने वाले तीनों पार्षदों को डिसक्वालीफाई समझे जाने की याचिका दायर की थी।
- राजेश श्योराण, अधिवक्ता जिला उपायुक्त।
न्यायाधीश ने नगरपालिका चेयरपर्सन रीना देवी की याचिका को खारिज कर दिया है। अभी डिटेल नहीं आई हैं। डिटेल आने के बाद ही कुछ बताया जा सकता है। किंतु फैसला मंगलवार को सुना दिया गया है।
- दीपक जिंदल, विरोधी पार्षद कमलेश तायल के वकील।