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प्राकृतिक शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए उमडे़ श्रद्धालु
Updated Sat, 22 Jul 2017 12:54 AM IST
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प्राकृतिक शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए उमडे़ श्रद्धालु
अमर उजाला ब्यूरो
कनीना।
हरियाणा का प्रसिद्ध बाघेश्वर धाम बागोत में शुक्रवार 21 जुलाई को विशाल कांवड़ मेला आयोजित किया गया। इस दौरान हजारों शिवभक्तों ने प्राकृतिक स्वयंभू शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। इस दौरान मेले में सुरक्षा के लिए शिवालय के अंदर पुलिस कर्मचारी तैनात रहे वहीं सीसीटीवी कैमरों से मेले की गतिविधियों पर नजर रही। डीएसपी विनोद कुमार स्वयं मेले में डेरा डाले हुए थे। उन्होेंने बताया कि मेले में 300 पुलिस कर्मचारी तैनात किए गए है। इसके अलावा सीआईए के कर्मचारी सादी वर्दी में मेले में तैनात रहे। मेले में सुरक्षा के लिए गोताखोर भी तैनात किए गए थे। क्योंकि वर्ष 2016 में आयोजित मेले में सुंदरह गांव का एक युवक जलाशय में डूब गया था जिसका शव बहुत देर की मशक्त के बाद गोताखोरों ने निकाला था। शिवरात्रि को हजारों शिवभक्तों ने शिवलिंग पर कांवड चढ़ाकर और अन्य श्रद्धालुओं ने लाइन में लगकर लबे इंतजार के बाद शिवलिंग पर जल अर्पित किया।
बिजली की निर्बाध रूप से सप्लाई के लिए बिजली निगम के उच्च अधिकारियों की ओर से पत्र जारी किया जा चुका था जिसके माध्यम से वहां पर जेई जितेंद्र कुमार अपनी टीम के साथ मेले में मौजूद थे। पूरे मेले को मानों हॉट लाइन से जोड़ा गया था। आयुष विभाग के चिकित्सक डॉ. एसपी गुप्ता ने बताया कि 19 जुलाई को डिहाइड्रेशन की शिकार बनी उपवास रखने वाली तीन महिलाओं को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। मेले को लेकर तहसीलदार योगेश कुमार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था।
ग्राम पंचायत की ओर से डाक कांवड़ पर प्रतिबंध लगाने के निर्णय का मंदिर के महाराज रोशनपुरी ने समर्थन किया ओर भविष्य में पूर्णतया प्रतिबंध लगाने का आश्वासन दिया। सरपंच विनोद कुमार ने बताया कि अगले वर्ष से डाक कांवड़ पर पूर्ण रूप से बैन होगा।
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वर्ष में दो बार लगता है मेला
बागोत को बाघेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है। यहां के शिवधाम में प्रति वर्ष लाखों कांवड़ चढ़ाई जाती है। यहां पर वर्ष में दो बार मेला लगता है। सावन माह की त्रयोदशी को कांवड मेला और महाशिवरात्रि के अवसर पर मेले का आयोजन होता है मेला स्थल पर साफ- सफाई, बिजली, पानी, चिकित्सा, फायर बिग्रेड, एंबुलेंस, क्रेन सर्विस की व्यवस्था कि गई। महेंद्रगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे हरियाणा प्रदेश में प्रसिद्ध इस गांव के शिवालय का इतिहास करीब डेढ़ हजार वर्ष से अधिक पुराना माना जाता है। यहां पर प्रकृतिक स्वयंभू शिवलिंग है उसे समीप खड़े कदंब के वृष ऋषियों की तपोस्थली होने की याद दिलाते हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
कनीना।
हरियाणा का प्रसिद्ध बाघेश्वर धाम बागोत में शुक्रवार 21 जुलाई को विशाल कांवड़ मेला आयोजित किया गया। इस दौरान हजारों शिवभक्तों ने प्राकृतिक स्वयंभू शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। इस दौरान मेले में सुरक्षा के लिए शिवालय के अंदर पुलिस कर्मचारी तैनात रहे वहीं सीसीटीवी कैमरों से मेले की गतिविधियों पर नजर रही। डीएसपी विनोद कुमार स्वयं मेले में डेरा डाले हुए थे। उन्होेंने बताया कि मेले में 300 पुलिस कर्मचारी तैनात किए गए है। इसके अलावा सीआईए के कर्मचारी सादी वर्दी में मेले में तैनात रहे। मेले में सुरक्षा के लिए गोताखोर भी तैनात किए गए थे। क्योंकि वर्ष 2016 में आयोजित मेले में सुंदरह गांव का एक युवक जलाशय में डूब गया था जिसका शव बहुत देर की मशक्त के बाद गोताखोरों ने निकाला था। शिवरात्रि को हजारों शिवभक्तों ने शिवलिंग पर कांवड चढ़ाकर और अन्य श्रद्धालुओं ने लाइन में लगकर लबे इंतजार के बाद शिवलिंग पर जल अर्पित किया।
बिजली की निर्बाध रूप से सप्लाई के लिए बिजली निगम के उच्च अधिकारियों की ओर से पत्र जारी किया जा चुका था जिसके माध्यम से वहां पर जेई जितेंद्र कुमार अपनी टीम के साथ मेले में मौजूद थे। पूरे मेले को मानों हॉट लाइन से जोड़ा गया था। आयुष विभाग के चिकित्सक डॉ. एसपी गुप्ता ने बताया कि 19 जुलाई को डिहाइड्रेशन की शिकार बनी उपवास रखने वाली तीन महिलाओं को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। मेले को लेकर तहसीलदार योगेश कुमार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था।
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ग्राम पंचायत की ओर से डाक कांवड़ पर प्रतिबंध लगाने के निर्णय का मंदिर के महाराज रोशनपुरी ने समर्थन किया ओर भविष्य में पूर्णतया प्रतिबंध लगाने का आश्वासन दिया। सरपंच विनोद कुमार ने बताया कि अगले वर्ष से डाक कांवड़ पर पूर्ण रूप से बैन होगा।
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वर्ष में दो बार लगता है मेला
बागोत को बाघेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है। यहां के शिवधाम में प्रति वर्ष लाखों कांवड़ चढ़ाई जाती है। यहां पर वर्ष में दो बार मेला लगता है। सावन माह की त्रयोदशी को कांवड मेला और महाशिवरात्रि के अवसर पर मेले का आयोजन होता है मेला स्थल पर साफ- सफाई, बिजली, पानी, चिकित्सा, फायर बिग्रेड, एंबुलेंस, क्रेन सर्विस की व्यवस्था कि गई। महेंद्रगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे हरियाणा प्रदेश में प्रसिद्ध इस गांव के शिवालय का इतिहास करीब डेढ़ हजार वर्ष से अधिक पुराना माना जाता है। यहां पर प्रकृतिक स्वयंभू शिवलिंग है उसे समीप खड़े कदंब के वृष ऋषियों की तपोस्थली होने की याद दिलाते हैं।