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शिक्षामंत्री की गृह नगरी के महिला कॉलेज में नहीं हैं साइंस कोर्स
Updated Sat, 16 Jun 2018 12:44 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। केंद्र एवं प्रदेश सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान चला रही है। हकीकत ये है कि शिक्षामंत्री की गृह नगरी महेंद्रगढ़ के महिला कॉलेज में विज्ञान संकाय का कोर्स ही नहीं है। पीजी कॉलेज में सीटें कम होने के कारण बेटियों को निजी कॉलेज में दाखिला लेना पड़ता है। ये निजी कॉलेज पूरे कोर्स के लगभग डेढ़ लाख रुपये चार्ज करते हैं। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर माता-पिता अपनी बेटियों को साइंस पढ़ा ही नहीं पाते। जरुरतमंद छात्राओं को मजबूरी में विज्ञान की बजाय कॉमर्स या कला संकाय ही लेना पड़ता है। इसके अलावा कॉलेजों में एमएससी के कोर्स नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए बाहर जाना पड़ता है या फिर निजी कॉलेज का सहारा लेना पड़ता है। कॉलेज प्रशासन की ओर से इस कोर्स के लिए पूरे प्रयास किए गए हैं। तीन वर्षों से कॉलेज की इस मांग पर अभी तक शिक्षामंत्री ने मुहर नहीं लगाई है। जबकि शिक्षामंत्री पिछले वर्ष स्वयं इसकी घोषणा कर चुके हैं।
बता दें कि पिछले 20 वर्षों से महिला कॉलेज में कला एवं वाणिज्य संकाय ही चल रहे हैं। प्रो. रामबिलास शर्मा ने जब शिक्षामंत्री की शपथ ली थी तो विद्यार्थियों को लगा था कि अब क्षेत्र के कॉलेज में नए-नए कोर्स शुरू किए जा सकेंगे। पिछले तीन वर्ष से महिला कॉलेज के प्राचार्य कई बार मंत्री से इस संबंध में मिल चुके हैं। पिछले वर्ष नैक टीम ने पीजी कॉलेज का दौरा किया था। इस दौरे में कॉलेज के सभी पुराने छात्रों को बुलाया गया था। इन छात्राओं में शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा एवं डिप्टी स्पीकर संतोष यादव भी थीं। इस दौरान शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने महिला कॉलेज में विज्ञान संकाय तथा पीजी कॉलेज में एमएससी मैथ, फिजिक्स तथा केमिस्ट्री कोर्स शुरू करने की घोषणा की थी। वर्तमान में दाखिलों का समय चल रहा है परंतु अभी तक कॉलेज में उक्त कोर्स शुरू नहीं हो पाए हैं।
पिछले वर्ष यह था सांइस में छात्राओं की स्थिति:
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में नॉन मेडिकल की 320 तथा मेडिकल की 80 सीटें हैं। पिछले वर्ष 103 छात्राओं का नॉन मेडिकल तथा 48 का मेडिकल में एडमिशन हुआ था। बीएससी द्वितीय वर्ष में नॉन मेडिकल में 155 तथा फाइनल ईयर में 137 छात्राएं थीं। जिन छात्राओं का पीजी कॉलेज में दाखिला नहीं हो पाता तो वे निजी कॉलेज में दाखिला लेती हैं। निजी कॉलेज में तीन वर्ष के डेढ़ लाख रुपये चार्ज करते हैं।
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एमएससी कोर्स भी नहीं हुए शुरू:
शिक्षामंत्री प्रो. शर्मा की घोषणा के बाद इसी सत्र से पीजी कॉलेज महेंद्रगढ़ में एमएससी की कक्षाएं शुरू होनी थी। सरकारी कॉलेज में एमएससी कक्षाएं नहीं होने के चलते विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए जिले से बाहर जाना पड़ता है। इससे उनको आर्थिक एवं मानसिक रूप से परेशानी उठानी पड़ती है। सबसे अधिक परेशानी छात्राओं को होती है कि उनके परिजन बाहर भेजने के लिए सहमत नहीं होते। ऐसे में छात्राओं को मजबूरी वश एमए करनी पड़ती है या फिर पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। आर्थिक रूप से संपन्न परिजन अपने बेटे एवं बेटियों को निजी कॉलेज में दाखिला दिला देते हैं। निजी कॉलेजों में दो वर्ष की लगभग डेढ़ लाख रुपये फीस ली जाती है।
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महेंद्रगढ़। केंद्र एवं प्रदेश सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान चला रही है। हकीकत ये है कि शिक्षामंत्री की गृह नगरी महेंद्रगढ़ के महिला कॉलेज में विज्ञान संकाय का कोर्स ही नहीं है। पीजी कॉलेज में सीटें कम होने के कारण बेटियों को निजी कॉलेज में दाखिला लेना पड़ता है। ये निजी कॉलेज पूरे कोर्स के लगभग डेढ़ लाख रुपये चार्ज करते हैं। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर माता-पिता अपनी बेटियों को साइंस पढ़ा ही नहीं पाते। जरुरतमंद छात्राओं को मजबूरी में विज्ञान की बजाय कॉमर्स या कला संकाय ही लेना पड़ता है। इसके अलावा कॉलेजों में एमएससी के कोर्स नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए बाहर जाना पड़ता है या फिर निजी कॉलेज का सहारा लेना पड़ता है। कॉलेज प्रशासन की ओर से इस कोर्स के लिए पूरे प्रयास किए गए हैं। तीन वर्षों से कॉलेज की इस मांग पर अभी तक शिक्षामंत्री ने मुहर नहीं लगाई है। जबकि शिक्षामंत्री पिछले वर्ष स्वयं इसकी घोषणा कर चुके हैं।
बता दें कि पिछले 20 वर्षों से महिला कॉलेज में कला एवं वाणिज्य संकाय ही चल रहे हैं। प्रो. रामबिलास शर्मा ने जब शिक्षामंत्री की शपथ ली थी तो विद्यार्थियों को लगा था कि अब क्षेत्र के कॉलेज में नए-नए कोर्स शुरू किए जा सकेंगे। पिछले तीन वर्ष से महिला कॉलेज के प्राचार्य कई बार मंत्री से इस संबंध में मिल चुके हैं। पिछले वर्ष नैक टीम ने पीजी कॉलेज का दौरा किया था। इस दौरे में कॉलेज के सभी पुराने छात्रों को बुलाया गया था। इन छात्राओं में शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा एवं डिप्टी स्पीकर संतोष यादव भी थीं। इस दौरान शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने महिला कॉलेज में विज्ञान संकाय तथा पीजी कॉलेज में एमएससी मैथ, फिजिक्स तथा केमिस्ट्री कोर्स शुरू करने की घोषणा की थी। वर्तमान में दाखिलों का समय चल रहा है परंतु अभी तक कॉलेज में उक्त कोर्स शुरू नहीं हो पाए हैं।
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पिछले वर्ष यह था सांइस में छात्राओं की स्थिति:
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में नॉन मेडिकल की 320 तथा मेडिकल की 80 सीटें हैं। पिछले वर्ष 103 छात्राओं का नॉन मेडिकल तथा 48 का मेडिकल में एडमिशन हुआ था। बीएससी द्वितीय वर्ष में नॉन मेडिकल में 155 तथा फाइनल ईयर में 137 छात्राएं थीं। जिन छात्राओं का पीजी कॉलेज में दाखिला नहीं हो पाता तो वे निजी कॉलेज में दाखिला लेती हैं। निजी कॉलेज में तीन वर्ष के डेढ़ लाख रुपये चार्ज करते हैं।
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एमएससी कोर्स भी नहीं हुए शुरू:
शिक्षामंत्री प्रो. शर्मा की घोषणा के बाद इसी सत्र से पीजी कॉलेज महेंद्रगढ़ में एमएससी की कक्षाएं शुरू होनी थी। सरकारी कॉलेज में एमएससी कक्षाएं नहीं होने के चलते विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए जिले से बाहर जाना पड़ता है। इससे उनको आर्थिक एवं मानसिक रूप से परेशानी उठानी पड़ती है। सबसे अधिक परेशानी छात्राओं को होती है कि उनके परिजन बाहर भेजने के लिए सहमत नहीं होते। ऐसे में छात्राओं को मजबूरी वश एमए करनी पड़ती है या फिर पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। आर्थिक रूप से संपन्न परिजन अपने बेटे एवं बेटियों को निजी कॉलेज में दाखिला दिला देते हैं। निजी कॉलेजों में दो वर्ष की लगभग डेढ़ लाख रुपये फीस ली जाती है।