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सरसों उठान में देरी से आढ़ती परेशान,सोसाइटी के सचिव को दिया ज्ञापन
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नारनौल। नई अनाजमंडी में सरसों उठान कार्य में देरी से होने से आढ़तियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि धूप में सरसों होने से प्रति बैग सरसों का वजन कम हो रहा है। इससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। अभी मंडी में करीब 60 हजार बैग सरसों रखी हुई हैं।
नई अनाजमंडी में सरसों की खरीद बंद हो चुकी है। लेकिन, अभी तक पहले की खरीदी गई सरसों उठान नहीं हो सका है। ऐसे में आढ़तियों को सरसों की निगरानी करनी पड़ रही है। आढ़ती रामजी मित्तल, नितेश कुमार, विजय लाल, सतीश कुमार, राजीव कुमार, कैलाश चंद्र व महेश कुमार ने बताया कि सरसों का सही समय पर उठान न होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि सरसों खरीद के दस दिन बाद भी उठान पूरा नहीं हो सका है। जिससे सरसों का वजन कम हो रहा है। रामजी ने कहा कि आढ़तियों को रात में सरसों की चौकीदारी करनी पड़ रही है। द खाद्यान्न एसोसिएशन के प्रधान अशोक यादव ने कहा कि सरकार द्वारा आढ़तियों को एक बैग पर 18 रुपये मिलता है। इसमें सरसों की वजन कराने समेत अन्य खर्च शामिल है। उन्होंने कहा कि एक बैग में यदि एक किलो सरसों कम हो गई तो उन्हें 40 रुपये का नुकसान हो रहा है। उनका कहना है कि माल उठान के लिए सोसाइटी, हैफेड व ट्रांसपोर्टर जिम्मेदार है। यादव ने कहा कि सरसों के वजन कम होने के लिए आढ़ती जिम्मेदार नहीं है। आढ़तियों ने इसे लेकर शनिवार को सोसाइटी के सचिव रामेश्वर को ज्ञापन सौंपा है। इससे पहले आढ़ती मामले को डीसी के सामने उठा चुके हैं। हैफेड के जीएम देशराज ने कहा कि जिले के सरसों के गोदाम भर चुके हैं। अन्य जिलों में सरसों को भेजी जा रही है। इससे सरसों के उठान में देरी हो रही है।
नई अनाजमंडी में सरसों की खरीद बंद हो चुकी है। लेकिन, अभी तक पहले की खरीदी गई सरसों उठान नहीं हो सका है। ऐसे में आढ़तियों को सरसों की निगरानी करनी पड़ रही है। आढ़ती रामजी मित्तल, नितेश कुमार, विजय लाल, सतीश कुमार, राजीव कुमार, कैलाश चंद्र व महेश कुमार ने बताया कि सरसों का सही समय पर उठान न होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि सरसों खरीद के दस दिन बाद भी उठान पूरा नहीं हो सका है। जिससे सरसों का वजन कम हो रहा है। रामजी ने कहा कि आढ़तियों को रात में सरसों की चौकीदारी करनी पड़ रही है। द खाद्यान्न एसोसिएशन के प्रधान अशोक यादव ने कहा कि सरकार द्वारा आढ़तियों को एक बैग पर 18 रुपये मिलता है। इसमें सरसों की वजन कराने समेत अन्य खर्च शामिल है। उन्होंने कहा कि एक बैग में यदि एक किलो सरसों कम हो गई तो उन्हें 40 रुपये का नुकसान हो रहा है। उनका कहना है कि माल उठान के लिए सोसाइटी, हैफेड व ट्रांसपोर्टर जिम्मेदार है। यादव ने कहा कि सरसों के वजन कम होने के लिए आढ़ती जिम्मेदार नहीं है। आढ़तियों ने इसे लेकर शनिवार को सोसाइटी के सचिव रामेश्वर को ज्ञापन सौंपा है। इससे पहले आढ़ती मामले को डीसी के सामने उठा चुके हैं। हैफेड के जीएम देशराज ने कहा कि जिले के सरसों के गोदाम भर चुके हैं। अन्य जिलों में सरसों को भेजी जा रही है। इससे सरसों के उठान में देरी हो रही है।
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