{"_id":"5a3e84f54f1c1b95188bb875","slug":"161514046709-mahendragarh-narnaul-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नपा को किराया भुगतान नहीं कर रहे टावर संचालकों में आठ को भेजे नोटिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नपा को किराया भुगतान नहीं कर रहे टावर संचालकों में आठ को भेजे नोटिस
Updated Sat, 23 Dec 2017 10:01 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किराया नहीं देने वाले टावर संचालकों को नपा ने भेजा नोटिस
नांगल चौधरी। नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत क्षेत्र में बीएसएनएल समेत आठ मोबाइल टावर स्थापित हैं। टावरों के संचालक नपा को किराया नहीं दे रहे हैं। जिसके चलते नप अधिकारियों ने विभाग और निजी टावर संचालकों को नोटिस भेजकर बकाया अदायगी के निर्देश दिए हैं। किराया नहीं देने पर टावरों पर सील लगाने की प्रक्रिया का अल्टीमेटम दिया है।
बता दें कि नियमानुसार संचार कंपनी को टावर लगाने से पहले प्रशासनिक अनुमति लेनी होती है। इसके बाद पंचायत या निकाय को मासिक किराया भी भुगतान करना होता है। परंतु किराया अदायगी नहीं होने की शिकायत पर सरकार ने कड़ा संज्ञान लिया है। 2011 में नोटिफिकेशन जारी करके जिला उपायुक्तों को अवैध टावरों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। निर्देशानुसार महेंद्रगढ़ जिले में 5 जनवरी 2012 को अवैध टावरों के खिलाफ मुहिम शुरू की गई। बावजूद कंपनियों ने शुल्क जमा करवाना उचित नहीं समझा। इसके बाद जिले भर में वोडाफोन, रिलायंस, टाटा इंडिकॉम, एयरटेल, आइडिया कंपनी के 198 टावरों पर सील लगाई गई थी। परंतु संचालकों ने ग्रामीण टावरों की पावर रेंज बढ़ाकर कस्बे में नेटवर्क पहुंचा दिया। जिला प्रशासन की शिकायत पर बिजली निगम के अधिकारियों ने करीब 30 ग्रामीण टावरों के बिजली कनेक्शन काट दिए। अब पिछले 2-3 साल से टावर संचालक दोबारा सक्रिय हो गए हैं। नांगल चौधरी में कई निजी टॉवर संचालकों ने सील तोड़कर नेटवर्क प्रसारण शुरू कर दिया है, वहीं बीएसएनएल भी किराया देने को तैयार नहीं है। नपा प्रशासन ने संचालकों को नोटिस भेजकर विभिन्न औपचारिकताएं पूरी करने तथा चार्ज अदायगी के निर्देश दिए हैं। परंतु अभी तक एक भी संचालक की फाइल जमा नहीं हुई है।
पंचायत और निकाय की हिस्सेदारी निर्धारित
विभागीय जानकारी के मुताबिक संबंधित टावर कंपनी से एक लाख धरोहर राशि, इसके बाद 10 हजार रुपये सालाना किराया वसूलने का प्रावधान है। इस शुल्क में 75 प्रतिशत नगर पालिका या पंचायत, 15 प्रतिशत पंचायत समिति तथा 10 प्रतिशत हिस्सा जिला परिषद का शामिल रहेगा। टावर स्थापित करने से पहले कंपनी को पंचायत एवं निकाय से अनुमति लेनी होगी।
विज्ञापन
नांगल चौधरी में आठ निजी टॉवर संचालकों को नोटिस भेजे गए हैं, लेकिन अभी तक कोई भी फाइल जमा करवाने नहीं पहुंचा है। बोर्ड की मीटिंग में सीलबंदी कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
राजेश कौशिक, कनिष्ठ अभियंता नपा
विज्ञापन
नांगल चौधरी। नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत क्षेत्र में बीएसएनएल समेत आठ मोबाइल टावर स्थापित हैं। टावरों के संचालक नपा को किराया नहीं दे रहे हैं। जिसके चलते नप अधिकारियों ने विभाग और निजी टावर संचालकों को नोटिस भेजकर बकाया अदायगी के निर्देश दिए हैं। किराया नहीं देने पर टावरों पर सील लगाने की प्रक्रिया का अल्टीमेटम दिया है।
बता दें कि नियमानुसार संचार कंपनी को टावर लगाने से पहले प्रशासनिक अनुमति लेनी होती है। इसके बाद पंचायत या निकाय को मासिक किराया भी भुगतान करना होता है। परंतु किराया अदायगी नहीं होने की शिकायत पर सरकार ने कड़ा संज्ञान लिया है। 2011 में नोटिफिकेशन जारी करके जिला उपायुक्तों को अवैध टावरों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। निर्देशानुसार महेंद्रगढ़ जिले में 5 जनवरी 2012 को अवैध टावरों के खिलाफ मुहिम शुरू की गई। बावजूद कंपनियों ने शुल्क जमा करवाना उचित नहीं समझा। इसके बाद जिले भर में वोडाफोन, रिलायंस, टाटा इंडिकॉम, एयरटेल, आइडिया कंपनी के 198 टावरों पर सील लगाई गई थी। परंतु संचालकों ने ग्रामीण टावरों की पावर रेंज बढ़ाकर कस्बे में नेटवर्क पहुंचा दिया। जिला प्रशासन की शिकायत पर बिजली निगम के अधिकारियों ने करीब 30 ग्रामीण टावरों के बिजली कनेक्शन काट दिए। अब पिछले 2-3 साल से टावर संचालक दोबारा सक्रिय हो गए हैं। नांगल चौधरी में कई निजी टॉवर संचालकों ने सील तोड़कर नेटवर्क प्रसारण शुरू कर दिया है, वहीं बीएसएनएल भी किराया देने को तैयार नहीं है। नपा प्रशासन ने संचालकों को नोटिस भेजकर विभिन्न औपचारिकताएं पूरी करने तथा चार्ज अदायगी के निर्देश दिए हैं। परंतु अभी तक एक भी संचालक की फाइल जमा नहीं हुई है।
विज्ञापन
पंचायत और निकाय की हिस्सेदारी निर्धारित
विभागीय जानकारी के मुताबिक संबंधित टावर कंपनी से एक लाख धरोहर राशि, इसके बाद 10 हजार रुपये सालाना किराया वसूलने का प्रावधान है। इस शुल्क में 75 प्रतिशत नगर पालिका या पंचायत, 15 प्रतिशत पंचायत समिति तथा 10 प्रतिशत हिस्सा जिला परिषद का शामिल रहेगा। टावर स्थापित करने से पहले कंपनी को पंचायत एवं निकाय से अनुमति लेनी होगी।
विज्ञापन
नांगल चौधरी में आठ निजी टॉवर संचालकों को नोटिस भेजे गए हैं, लेकिन अभी तक कोई भी फाइल जमा करवाने नहीं पहुंचा है। बोर्ड की मीटिंग में सीलबंदी कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
राजेश कौशिक, कनिष्ठ अभियंता नपा