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नगर परिषद द्वारा बनाए जा रहे डिवाइडरों का कार्य अधर में लटका
Updated Tue, 19 Dec 2017 10:17 PM IST
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डिवाइडरों का कार्य अधर में लटका
नारनौल। शहर की सुंदरता को ग्रहण लगा रहे बदहाल होते डिवाइडरों का नए सिरे से निर्माण करने के लिए नगर परिषद ने मार्च माह में एक योजना बनाई थी। इसके तहत करीब नौ लाख रुपये से शहर के हीरो होंडा चौक से रेवाड़ी रोड तक के टूटे डिवाइडरों को नये सिरे से बनाकर उनके बीचोबीच हरे पेड़ पौधे लगाकर ग्रीन बेल्ट बनाई जानी थी। नगर परिषद ने इसका काम भी शुरू करवा दिया था। इतना ही नहीं हीरो होंडा चौक से महावीर चौक तक के डिवाइडर का निर्माण भी हो चुका है, लेकिन नारनौल-झुंझुनूू सड़क मार्ग नेशनल हाईवे नंबर-11 में शामिल होने के बाद इसके रख-रखाव की जिम्मेवारी संबंधित विभाग फरीदाबाद को सौंप दी गई। इसके बाद संबंधित विभाग ने उसकी अनुमति के बिना नेशनल हाइवे पर कोई भी कार्य नहीं करने देने की बात कहते हुए डिवाइडरों के निर्माण कार्य पर रोक लगा दी। इसके बाद से करीब छह माह से डिवाइडरों का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। इससे शहर की सुंदरता को ग्रहण लग रहा है। वहीं इन डिवाइडरों के बीचोबीच लावारिस पशु बैठे रहते हैं। इनसे अचानक वाहनों के सामने आने का खतरा बना रहता है। हालांकि नगर परिषद ने डिवाइडरों का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए संबंधित विभाग को लिखित रूप से अनुमति भी मांगी है, लेकिन अभी तक अनुमति नहीं मिल पाई है। ऐसे में करीब नौ लाख रुपये की योजना अधर में लटक गई है।
डिवाइडरों की बीच बननी थी ग्रीन बेल्ट
नगर परिषद नारनौल शहर के रेवाडी रोड से हीरो होंडा चौक तक के टूटकर बिखर चुके डिवाइडरों को नए सिरे से बनाने की योजना तैयार की थी। इसमें डिवाइडरों के दोनों ओर जाली लगाकर बीचोबीच पौधे लगाकर ग्रीन बेल्ट तैयार होनी थी ताकि शहर में वाहनों द्वारा होने वाले वायु प्रदूषण को भी कम किया जा सके। इसके साथ-साथ डिवाइडरों पर फैंसी स्ट्रीट लाइटें भी लगानी थी, परंतु विभागीय मंजूरी नहीं मिलने से कार्य अधर में लटक गया है।
नौ लाख रुपये से होना था डिवाइडरों का पुनर्निर्माण
हीरो होंडा चौक से रेवाडी रोड पर मोड़ावाल मंदिर तक बने डिवाइडरों को नए सिरे से बनाने के लिए नगर परिषद नारनौल द्वारा करीब नौ लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। इसका एक हिस्सा हीरो होंडा चौक से महावीर चौक तक डिवाइडर का निर्माण किया भी जा चुका है, लेकिन उक्त मार्ग को नेशनल हाईवे घोषित किए जाने के कारण यह निर्माण कार्य बिना विभाग की अनुमति के नहीं हो पा रहा है।
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7 जुलाई को विभाग ने लिया हाईवे को अपने अंडर
स्थानीय विभागीय अधिकारियों के अनुसार नारनौल-झुंझुनू सड़क मार्ग नेशनल हाइवे घोषित होने के साथ ही इसकी देखरेख व निर्माण कार्य का जिम्मा 7 जुलाई से पीडब्ल्यूडी विभाग फरीदाबाद ने अपने अंडर ले लिया है। अब यही विभाग नेशनल हाइवे नंबर-11 पर किसी प्रकार निर्माण कार्य करवाने की अनुमति दे सकता है।
विभाग से लेनी पड़ती है अनुमति
नेशनल हाईवे पर अन्य किसी विभाग की ओर से किसी प्रकार का कोई कार्य करने के लिए विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है। नेशनल हाईवे विभाग की अनुमति के बिना वह कोई कार्य नहीं कर सकता है। यह तक की स्थानीय पीडब्ल्यूडी विभाग भी कोई कार्य नहीं करवा सकता है। नेशनल हाइवे के रख-रखाव की पूरी जिम्मेवारी संबंधित विभाग की ही होती है।-विभागीय अनुमति नहीं मिलने के कारण कई माह से डिवाइडरों का निर्माण कार्य अटका पड़ा था, लेकिन अब विभागीय अनुमति मिल चुकी है। जल्द ही डिवाइडरों का निर्माण कार्य शुरू करवाया जाएगा।
-भारती सैनी, चेयरपर्सन नगर परिषद नारनौल।
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नारनौल। शहर की सुंदरता को ग्रहण लगा रहे बदहाल होते डिवाइडरों का नए सिरे से निर्माण करने के लिए नगर परिषद ने मार्च माह में एक योजना बनाई थी। इसके तहत करीब नौ लाख रुपये से शहर के हीरो होंडा चौक से रेवाड़ी रोड तक के टूटे डिवाइडरों को नये सिरे से बनाकर उनके बीचोबीच हरे पेड़ पौधे लगाकर ग्रीन बेल्ट बनाई जानी थी। नगर परिषद ने इसका काम भी शुरू करवा दिया था। इतना ही नहीं हीरो होंडा चौक से महावीर चौक तक के डिवाइडर का निर्माण भी हो चुका है, लेकिन नारनौल-झुंझुनूू सड़क मार्ग नेशनल हाईवे नंबर-11 में शामिल होने के बाद इसके रख-रखाव की जिम्मेवारी संबंधित विभाग फरीदाबाद को सौंप दी गई। इसके बाद संबंधित विभाग ने उसकी अनुमति के बिना नेशनल हाइवे पर कोई भी कार्य नहीं करने देने की बात कहते हुए डिवाइडरों के निर्माण कार्य पर रोक लगा दी। इसके बाद से करीब छह माह से डिवाइडरों का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। इससे शहर की सुंदरता को ग्रहण लग रहा है। वहीं इन डिवाइडरों के बीचोबीच लावारिस पशु बैठे रहते हैं। इनसे अचानक वाहनों के सामने आने का खतरा बना रहता है। हालांकि नगर परिषद ने डिवाइडरों का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए संबंधित विभाग को लिखित रूप से अनुमति भी मांगी है, लेकिन अभी तक अनुमति नहीं मिल पाई है। ऐसे में करीब नौ लाख रुपये की योजना अधर में लटक गई है।
डिवाइडरों की बीच बननी थी ग्रीन बेल्ट
नगर परिषद नारनौल शहर के रेवाडी रोड से हीरो होंडा चौक तक के टूटकर बिखर चुके डिवाइडरों को नए सिरे से बनाने की योजना तैयार की थी। इसमें डिवाइडरों के दोनों ओर जाली लगाकर बीचोबीच पौधे लगाकर ग्रीन बेल्ट तैयार होनी थी ताकि शहर में वाहनों द्वारा होने वाले वायु प्रदूषण को भी कम किया जा सके। इसके साथ-साथ डिवाइडरों पर फैंसी स्ट्रीट लाइटें भी लगानी थी, परंतु विभागीय मंजूरी नहीं मिलने से कार्य अधर में लटक गया है।
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नौ लाख रुपये से होना था डिवाइडरों का पुनर्निर्माण
हीरो होंडा चौक से रेवाडी रोड पर मोड़ावाल मंदिर तक बने डिवाइडरों को नए सिरे से बनाने के लिए नगर परिषद नारनौल द्वारा करीब नौ लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। इसका एक हिस्सा हीरो होंडा चौक से महावीर चौक तक डिवाइडर का निर्माण किया भी जा चुका है, लेकिन उक्त मार्ग को नेशनल हाईवे घोषित किए जाने के कारण यह निर्माण कार्य बिना विभाग की अनुमति के नहीं हो पा रहा है।
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7 जुलाई को विभाग ने लिया हाईवे को अपने अंडर
स्थानीय विभागीय अधिकारियों के अनुसार नारनौल-झुंझुनू सड़क मार्ग नेशनल हाइवे घोषित होने के साथ ही इसकी देखरेख व निर्माण कार्य का जिम्मा 7 जुलाई से पीडब्ल्यूडी विभाग फरीदाबाद ने अपने अंडर ले लिया है। अब यही विभाग नेशनल हाइवे नंबर-11 पर किसी प्रकार निर्माण कार्य करवाने की अनुमति दे सकता है।
विभाग से लेनी पड़ती है अनुमति
नेशनल हाईवे पर अन्य किसी विभाग की ओर से किसी प्रकार का कोई कार्य करने के लिए विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है। नेशनल हाईवे विभाग की अनुमति के बिना वह कोई कार्य नहीं कर सकता है। यह तक की स्थानीय पीडब्ल्यूडी विभाग भी कोई कार्य नहीं करवा सकता है। नेशनल हाइवे के रख-रखाव की पूरी जिम्मेवारी संबंधित विभाग की ही होती है।-विभागीय अनुमति नहीं मिलने के कारण कई माह से डिवाइडरों का निर्माण कार्य अटका पड़ा था, लेकिन अब विभागीय अनुमति मिल चुकी है। जल्द ही डिवाइडरों का निर्माण कार्य शुरू करवाया जाएगा।
-भारती सैनी, चेयरपर्सन नगर परिषद नारनौल।