{"_id":"5999d9064f1c1ba7158b47b2","slug":"141503254790-mahendragarh-narnaul-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आसमान से बादल गायब, सवा लाख हेक्टेयर फसलों पर संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आसमान से बादल गायब, सवा लाख हेक्टेयर फसलों पर संकट
Updated Mon, 21 Aug 2017 12:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आसमान से बादल गायब, सवा लाख हेक्टेयर फसलों पर संकट
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। जिले में खड़ी खरीफ की एक लाख 24 हजार 100 हेक्टेयर फसल पर बारिश न होने के कारण संकट के बादल मंडारने लगे हैं। इस बार जिला में बारिश के सीजन श्रावण मास में केवल 59 एमएम ही बारिश हुई है। इस मौसम में आमतौर पर 150 से 200 एमएम बारिश हो जाती है। लोगों को भाद्र मास में बारिश होने का अनुमान था, मगर अब आधा भाद्रपद जाने के बाद भी बारिश नहीं हुई है। इस वजह से खरीफ की फसल पर संकट आ गया है। यदि अब भी बारिश नहीं हुई तो खरीफ के साथ आने वाले रबी की फसल के लिए भी खतरा बढ़ जाएगा। इससे किसानों को नुकसान होगा। खरीफ की फसल में बारानी क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान होना शुरू हो गया है। सिंचित फसल भी खराब होने लगी है। दो-तीन दिन से पड़ रही तेज धूप ने फसलों को सुखाना शुरू कर दिया है।
जिला महेंद्रगढ़ में भूजल स्तर बहुत ही खतरनाक स्थिति में है। इसलिए यह क्षेत्र डार्क जोन में शामिल किया गया है। यहां भूजल स्तर 1500 फुट तक गिर गया है। कहीं-कहीं तो पानी इससे भी ज्यादा गहराई में है। प्रदेश का अंतिम जिला होने के कारण यहां नहरों में भी कम पानी आता है। नांगल चौधरी के अनेक गांवों और दोहान क्षेत्र में नहरी पानी बहुत ही मुश्किल से पहुंचता है। वह भी सिंचाई करने के लिए नहीं, बल्कि पीने के लिए ही दिया जाता है। ऐसे में यहां के किसान पूरी तरह बारिश पर निर्भर हैं। इस बार भगवान की मेहर नहीं हुई और कम बारिश होने के कारण यहां के किसानों की फसल बरबाद होने लगी है। यहां के किसान मुख्य रूप से खरीफ के मौसम की फसलें बाजरा, ग्वार और कपास प्रमुख हैं। इसके अलावा सतनाली क्षेत्र में सब्जियों और दाल आदि भी की जाती हैं। ये फसलें इस बार बारिश बेहद कम होने के कारण खराब होने लगी हैं। यदि तीन-चार दिन में बारिश नहीं हुई तो फसल पूरी बर्बाद हो जाएंगी।
सवा लाख हेक्टेयर में हैं इस बार फसल
जिला में इस बार कुल 1 लाख 24 हजार 100 हेक्टेयर पर खरीफ की फसल उगाई गई है। इनमें सबसे ज्यादा रकबा बाजरे की फसल का है। कृषि विभाग के अनुसार यहां 72050 हेक्टेयर में बाजरे की फसल बोई गई है। 37750 हेक्टेयर में ग्वार और 12300 हेक्टेयर में कपास की फसल बोई गई है। इनमें से आधे से ज्यादा फसल बारानी क्षेत्र में है। यह अब बारिश के अभाव में सूखने लगी है।
विज्ञापन
एक अगस्त के बाद नहीं हुई बारिश
इस बार बारिश के मौसम में बादल कई दिनों तक छाए रहे, मगर महेंद्रगढ़ और कनीना के कुछ क्षेत्रों को छोड़ दिया जाए तो जिले के नारनौल, अटेली, नांगल चौधरी और गोद बलाहा क्षेत्र में बारिश नहीं हुई। यहां अंतिम बार बारिश एक अगस्त को हुई थी। इस कारण इस क्षेत्र की फसल सूख रही है।
दो-तीन दिन से पड़ रही धूप ने निकाला दम
दो-तीन दिन से पड़ रही भयंकर धूप ने क्षेत्र की फसलों का दम निकाल दिया है। क्षेत्र में दो-तीन दिन से तेज धूप पड़ रही है। बादल न होने के कारण इस धूप की वजह से बाजरा और ग्वार की फसल जलने लगी है। तापमान भी फिर से 37 डिग्री के पार पहुंच गया है।
50 प्रतिशत से भी कम हुई बारिश
इस बार बारिश औसत से 50 प्रतिशत तक कम हुई है। सामान्य तौर पर श्रावण मास या मानसून में यहां 200 एमएम बारिश होती है, मगर जिले में इस बार श्रावण मास में केवल 59 एमएम बारिश ही रिकार्ड की गई है। इस कारण फसल ज्यादा खराब होने लगी हैं।
रबी की फसल में भी पड़ेगा फर्क
बारिश कम होने के कारण रबी की फसल में भी फर्क पड़ेगा। आमतौर पर रबी की फसल अक्टूबर में बोई जाती है। मानसून के समय बारिश अच्छी होने से रबी की फसल की बुआई के समय तक जमीन गिली रहती है। इससे सरसों की फसल अच्दी उगती है। इस बार बारिश कम होने के कारण रबी की फसल पर भी असर पड़ेगा।
मई और जून माह में हुई थी बारिश
इस बार मई और जून माह में मानसून पूर्व बारिश हुई थी। इसमें जून माह में सबसे ज्यादा 28 जून को 68 एमएम और मई माह में सबसे ज्यादा 29 मई को 55 एमएम बारिश दर्ज की गई थी।
किस माह हुई कितनी बरसात
जिला स्तर पर
मई 69 एमएम
जून 137 एमएम
जुलाई 56 एमएम
अगस्त 45 एमएम
नोट-आंकड़े पीजी कॉलेज में लगे मीटर के आधार पर हैं।
फसल का रकबा
फसल हेक्टेयर
बाजरा 72050
ग्वार 37750
कपास 12300
ग्वार की फसल में लगने लगा रोग
किसान राजेंद्र सिंह, रामकिशन, जयसिंह, मुकेश कुमार, सुरेश कुमार आदि ने बताया कि बारिश के अभाव में फसलों को नुकसान हो रहा है। जिस फसल में फल आना चाहिए था, उसमें फल के स्थान पर गांठें बनने लगी हैँ। तेला और चंपा का रोग शुरू हो गया है।
ग्रामीणों की आजीविका खरीफ सीजन की फसल पर निर्भर है। 80 प्रतिशत फसल नष्ट होने से किसानों की कमर टूट गई है। किसानों को जबरदस्त नुकसान हो रहा है।
- भीमसिंह शेहरावत, किसान
क्षेत्र में कृषि बोरवेल सूख चुके हैं। सिंचाई के अन्य विकल्प नहीं होने के कारण किसान बर्बादी के कगार पर हैं। सरकार को गांव स्तर पर नहरी पानी पहुंचाना होगा।
-राजेंद्र प्रसाद, पूर्व सरपंच
बारिश के अभाव में खरीफ की फसल तबाह हो चुकी है। सरकार को तुरंत विशेष गिरदावरी करानी चाहिए, ताकि पीड़ित किसानों को आर्थिक सहायता मिल सके।
- कृष्ण सिंह
खरीफ की फसल नष्ट होने से खाद्यान्न, अनाज और पशुचारे की किल्लत रहेगी। इससे ग्रामीणों का पशुपालन व्यवसाय प्रभावित होगा। सरकार को समाधान के प्रयास करना चाहिए।
- विकास यादव
अभी सर्वे कर आंकलन किया जाएगा कि फसल खराब हो रही है या नहीं। वैसे तापमान बढ़ने के कारण बाजरे की फसल को नुकसान होने की संभावना है। कपास की फसल के बचाव के लिए हम कैंप लगाकर किसानों को जागरूक करेंगे।
-डॉ. संजय यादव, उपमंडल कृषि अधिकारी
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। जिले में खड़ी खरीफ की एक लाख 24 हजार 100 हेक्टेयर फसल पर बारिश न होने के कारण संकट के बादल मंडारने लगे हैं। इस बार जिला में बारिश के सीजन श्रावण मास में केवल 59 एमएम ही बारिश हुई है। इस मौसम में आमतौर पर 150 से 200 एमएम बारिश हो जाती है। लोगों को भाद्र मास में बारिश होने का अनुमान था, मगर अब आधा भाद्रपद जाने के बाद भी बारिश नहीं हुई है। इस वजह से खरीफ की फसल पर संकट आ गया है। यदि अब भी बारिश नहीं हुई तो खरीफ के साथ आने वाले रबी की फसल के लिए भी खतरा बढ़ जाएगा। इससे किसानों को नुकसान होगा। खरीफ की फसल में बारानी क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान होना शुरू हो गया है। सिंचित फसल भी खराब होने लगी है। दो-तीन दिन से पड़ रही तेज धूप ने फसलों को सुखाना शुरू कर दिया है।
जिला महेंद्रगढ़ में भूजल स्तर बहुत ही खतरनाक स्थिति में है। इसलिए यह क्षेत्र डार्क जोन में शामिल किया गया है। यहां भूजल स्तर 1500 फुट तक गिर गया है। कहीं-कहीं तो पानी इससे भी ज्यादा गहराई में है। प्रदेश का अंतिम जिला होने के कारण यहां नहरों में भी कम पानी आता है। नांगल चौधरी के अनेक गांवों और दोहान क्षेत्र में नहरी पानी बहुत ही मुश्किल से पहुंचता है। वह भी सिंचाई करने के लिए नहीं, बल्कि पीने के लिए ही दिया जाता है। ऐसे में यहां के किसान पूरी तरह बारिश पर निर्भर हैं। इस बार भगवान की मेहर नहीं हुई और कम बारिश होने के कारण यहां के किसानों की फसल बरबाद होने लगी है। यहां के किसान मुख्य रूप से खरीफ के मौसम की फसलें बाजरा, ग्वार और कपास प्रमुख हैं। इसके अलावा सतनाली क्षेत्र में सब्जियों और दाल आदि भी की जाती हैं। ये फसलें इस बार बारिश बेहद कम होने के कारण खराब होने लगी हैं। यदि तीन-चार दिन में बारिश नहीं हुई तो फसल पूरी बर्बाद हो जाएंगी।
विज्ञापन
सवा लाख हेक्टेयर में हैं इस बार फसल
जिला में इस बार कुल 1 लाख 24 हजार 100 हेक्टेयर पर खरीफ की फसल उगाई गई है। इनमें सबसे ज्यादा रकबा बाजरे की फसल का है। कृषि विभाग के अनुसार यहां 72050 हेक्टेयर में बाजरे की फसल बोई गई है। 37750 हेक्टेयर में ग्वार और 12300 हेक्टेयर में कपास की फसल बोई गई है। इनमें से आधे से ज्यादा फसल बारानी क्षेत्र में है। यह अब बारिश के अभाव में सूखने लगी है।
विज्ञापन
एक अगस्त के बाद नहीं हुई बारिश
इस बार बारिश के मौसम में बादल कई दिनों तक छाए रहे, मगर महेंद्रगढ़ और कनीना के कुछ क्षेत्रों को छोड़ दिया जाए तो जिले के नारनौल, अटेली, नांगल चौधरी और गोद बलाहा क्षेत्र में बारिश नहीं हुई। यहां अंतिम बार बारिश एक अगस्त को हुई थी। इस कारण इस क्षेत्र की फसल सूख रही है।
दो-तीन दिन से पड़ रही धूप ने निकाला दम
दो-तीन दिन से पड़ रही भयंकर धूप ने क्षेत्र की फसलों का दम निकाल दिया है। क्षेत्र में दो-तीन दिन से तेज धूप पड़ रही है। बादल न होने के कारण इस धूप की वजह से बाजरा और ग्वार की फसल जलने लगी है। तापमान भी फिर से 37 डिग्री के पार पहुंच गया है।
50 प्रतिशत से भी कम हुई बारिश
इस बार बारिश औसत से 50 प्रतिशत तक कम हुई है। सामान्य तौर पर श्रावण मास या मानसून में यहां 200 एमएम बारिश होती है, मगर जिले में इस बार श्रावण मास में केवल 59 एमएम बारिश ही रिकार्ड की गई है। इस कारण फसल ज्यादा खराब होने लगी हैं।
रबी की फसल में भी पड़ेगा फर्क
बारिश कम होने के कारण रबी की फसल में भी फर्क पड़ेगा। आमतौर पर रबी की फसल अक्टूबर में बोई जाती है। मानसून के समय बारिश अच्छी होने से रबी की फसल की बुआई के समय तक जमीन गिली रहती है। इससे सरसों की फसल अच्दी उगती है। इस बार बारिश कम होने के कारण रबी की फसल पर भी असर पड़ेगा।
मई और जून माह में हुई थी बारिश
इस बार मई और जून माह में मानसून पूर्व बारिश हुई थी। इसमें जून माह में सबसे ज्यादा 28 जून को 68 एमएम और मई माह में सबसे ज्यादा 29 मई को 55 एमएम बारिश दर्ज की गई थी।
किस माह हुई कितनी बरसात
जिला स्तर पर
मई 69 एमएम
जून 137 एमएम
जुलाई 56 एमएम
अगस्त 45 एमएम
नोट-आंकड़े पीजी कॉलेज में लगे मीटर के आधार पर हैं।
फसल का रकबा
फसल हेक्टेयर
बाजरा 72050
ग्वार 37750
कपास 12300
ग्वार की फसल में लगने लगा रोग
किसान राजेंद्र सिंह, रामकिशन, जयसिंह, मुकेश कुमार, सुरेश कुमार आदि ने बताया कि बारिश के अभाव में फसलों को नुकसान हो रहा है। जिस फसल में फल आना चाहिए था, उसमें फल के स्थान पर गांठें बनने लगी हैँ। तेला और चंपा का रोग शुरू हो गया है।
ग्रामीणों की आजीविका खरीफ सीजन की फसल पर निर्भर है। 80 प्रतिशत फसल नष्ट होने से किसानों की कमर टूट गई है। किसानों को जबरदस्त नुकसान हो रहा है।
- भीमसिंह शेहरावत, किसान
क्षेत्र में कृषि बोरवेल सूख चुके हैं। सिंचाई के अन्य विकल्प नहीं होने के कारण किसान बर्बादी के कगार पर हैं। सरकार को गांव स्तर पर नहरी पानी पहुंचाना होगा।
-राजेंद्र प्रसाद, पूर्व सरपंच
बारिश के अभाव में खरीफ की फसल तबाह हो चुकी है। सरकार को तुरंत विशेष गिरदावरी करानी चाहिए, ताकि पीड़ित किसानों को आर्थिक सहायता मिल सके।
- कृष्ण सिंह
खरीफ की फसल नष्ट होने से खाद्यान्न, अनाज और पशुचारे की किल्लत रहेगी। इससे ग्रामीणों का पशुपालन व्यवसाय प्रभावित होगा। सरकार को समाधान के प्रयास करना चाहिए।
- विकास यादव
अभी सर्वे कर आंकलन किया जाएगा कि फसल खराब हो रही है या नहीं। वैसे तापमान बढ़ने के कारण बाजरे की फसल को नुकसान होने की संभावना है। कपास की फसल के बचाव के लिए हम कैंप लगाकर किसानों को जागरूक करेंगे।
-डॉ. संजय यादव, उपमंडल कृषि अधिकारी