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जिले के अस्पतालों में डॉक्टरों के 135 पद स्वीकृत, 56 खाली
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अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़।
- फोटो : Narnol
जिले में डॉक्टरों की कमी से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही है। जिला अस्पताल समेत पीएचसी व सीएचसी पर भी डॉक्टरों की कमी है। ऐसे में लोगों को मजबूरन निजी अस्पतालों में उपचार कराना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर जिला अस्पताल को एक और झटका लगा है। फिजिशियन डॉ. सुरेंद्र मित्तल ने अस्पताल प्रबंधन को कार्य छोड़ने के लिए नोटिस दे दिया है। जिले के अस्पतालों में डॉक्टरों के 135 पद स्वीकृत हैं। इसमें 79 भरे हुए जबकि 56 खाली है।
जिला अस्पताल में भी डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ऐसे में ओपीडी के साथ इमरजेंसी सेवा भी प्रभावित होती है। यदि किसी डॉक्टर ने किसी कार्यवश अवकाश ले लिया तो मरीजों का दर्द और बढ़ जाता है। डॉक्टरों की कमी के कारण अस्पताल प्रबंधन ने रिटायर्ड डॉक्टरों (कंसलटेंट) की सेवाएं ले रहा हैं लेकिन इससे भी मरीजों को राहत नहीं मिलती है। हाल में एक कंसलटेंट मरीजों की जांच कर रहा था कि उसकी तबीयत खराब हो गई। अस्पताल का फिजिशियन अवकाश पर था ऐसे में निजी अस्पताल में उपचार कराना पड़ा। अस्पताल में पुरुषों के अलावा महिलाओं को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। अस्पताल में दो ही नियमित महिला डॉक्टर हैं। ऐसे में गायनी वार्ड में भी मरीजों की संख्या अधिक होने पर डॉक्टरों पर दबाव होता है। ऐसे में सभी मरीजों को एक ही ओपीडी में डॉक्टर देखते हैं। इससे गंभीर बीमारी के मरीजों को परेशानी होती है।
दर्जा 200 बेड का, संसाधन नाममात्र
जिला अस्पताल को अब 200 बेड का दर्जा मिला गया है लेकिन संसाधन सौ बेड़ पूरे उपलब्ध नहीं है। अस्पताल में त्वचा व कैंसर के अलावा अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। दूसरा अस्पताल में आईसीयू की भी सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गंभीर मरीजों को अस्पताल में उपचार मिलना मुश्किल होता है। स्वाइन फ्लू जैसे मरीजों के लिए निजी अस्पताल की सेवाएं लेनी पड़ती है। जिला अस्पताल पर जिले के साथ राजस्थान से भी काफी मरीज उपचार के लिए आते हैं। इससे ओडीपी के साथ गायनी वार्ड भी महिला मरीजों की संख्या काफी रहती हैं। नारनौल जिला मुख्यालय 100 से 200 बिस्तरों का अस्पताल होने के बाद भी जरूरी संसाधनों में बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। लिहाजा इसका खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ा रहा है। अस्पताल की रोजाना की ओपीडी करीब 900 से 1200 तक होती है। दूसरी ओर गायनी वार्ड में भी मरीजों का दबाव रहता है। डिप्टी एमएस डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि जिला अस्पताल में नियमित रुप से दो एमबीबीएस महिला डॉक्टर हैं। फील्ड से चार महिला डॉक्टरों को डेपुटेशन पर लगाया गया है। इमरजेंसी सेवाओं के लिए पांच निजी महिला डॉक्टरों की सेवाएं ली जा रही है। जिससे सिजेरियन केस में दिक्कतें न आए।
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जीएच नारनौल में डॉक्टरों के 42 पद स्वीकृत
सिविल सर्जन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जीएच नारनौल में डॉक्टरों के 42 पद स्वीकृत हैं। इसमें से 18 कार्यरत है जबकि 24 पद खाली हैं। इसी प्रकार एसडीएच महेंद्रगढ़ में 11 में नौ भरे हुए हैं। सीएचसी सतनाली में सात में तीन भरे हुए है जबकि चार खाली है। सीएचसी अटेली में आठ में दो, सीएचसी नांगल चौधरी में सात में पांच, सीएचसी नांगल सिरोही में सात में चार, सीएचसी सेहलंग में आठ में से एक, सीएचसी कनीना में सात में पांच डॉक्टर कार्यरत हैं। पीएचसी भोजावास में दो डॉक्टरों के पद स्वीकृत है, लेकिन कोई नहीं है। इसके आलावा पीएचसी सिहमा, सिरोही बहाली, अंतरी, बामनवास, मंडाना, बिगोपुर, बहलाकलां व पीएचसी छिलरो में दो-दो डॉक्टरों के पद है और भरे हुए हैं।
फिजिशियन डॉ. सुरेंद्र ने दिया काम छोड़ने का नोटिस
जिला अस्पताल के इकलौते फिजिशियन डॉ. सुरेंद्र मित्तल ने काम छोड़ने को लेकर अस्पताल प्रबंधन को नोटिस दे दिया है। ऐसे में एक माह बाद अस्पताल में फिजिशियन डॉक्टर भी उपलब्ध नहीं होगा। डॉ. सुरेंद्र ने कहा कि अपनी स्वेच्छा से कार्य छोड़ने के लिए नोटिस दिया है। दूसरी ओर डिप्टी एमएस डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि बुधवार को डॉ. सुरेंद्र मित्तल ने नोटिस दिया है। इसे आगे भेजा जाएगा। सूत्रों के अनुसार सोमवार को राज्यमंत्री ओपी यादव ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। इसमें डॉ. सुरेंद्र मित्तल को गैर हाजिर बताया गया था। जबकि, डॉ. सुरेंद्र मित्तल के नाम पर 146 से उपर की ओपीडी की पर्ची बनी थी और मरीजों को देख रहे थे। अस्पताल में मरीजों को देखते हुए उन्हें गैरहाजिर बता दिया गया। सूत्रों के अनुसार इससे आहत डॉक्टर ने कार्य छोड़ने का मन बना लिया।
अस्पताल में डेपुटेशन व कंसलटेंट की मदद से मरीजों को सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही है। एनएचएम के तहत एक स्त्री रोग विशेषज्ञ समेत दो और डॉक्टर मिले हैं। इसके साथ ही चार पीएचसी/सीएचसी से डॉक्टरों को डेपुटेशन पर लगाया गया है। -डॉ.राजेश कुमार, डिप्टी एमएस जीएच नारनौल
अभी सीएमओ का कार्य संभाला है। इस बारे में निदेशालय से डॉक्टरों की डिमांड की जाएगी। जिससे अस्पतालों में जरुरी सेवाएं मरीजों को मिल सके। -डॉ. अशोक कुमार, सीएमओ नारनौल
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जिला अस्पताल में भी डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ऐसे में ओपीडी के साथ इमरजेंसी सेवा भी प्रभावित होती है। यदि किसी डॉक्टर ने किसी कार्यवश अवकाश ले लिया तो मरीजों का दर्द और बढ़ जाता है। डॉक्टरों की कमी के कारण अस्पताल प्रबंधन ने रिटायर्ड डॉक्टरों (कंसलटेंट) की सेवाएं ले रहा हैं लेकिन इससे भी मरीजों को राहत नहीं मिलती है। हाल में एक कंसलटेंट मरीजों की जांच कर रहा था कि उसकी तबीयत खराब हो गई। अस्पताल का फिजिशियन अवकाश पर था ऐसे में निजी अस्पताल में उपचार कराना पड़ा। अस्पताल में पुरुषों के अलावा महिलाओं को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। अस्पताल में दो ही नियमित महिला डॉक्टर हैं। ऐसे में गायनी वार्ड में भी मरीजों की संख्या अधिक होने पर डॉक्टरों पर दबाव होता है। ऐसे में सभी मरीजों को एक ही ओपीडी में डॉक्टर देखते हैं। इससे गंभीर बीमारी के मरीजों को परेशानी होती है।
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दर्जा 200 बेड का, संसाधन नाममात्र
जिला अस्पताल को अब 200 बेड का दर्जा मिला गया है लेकिन संसाधन सौ बेड़ पूरे उपलब्ध नहीं है। अस्पताल में त्वचा व कैंसर के अलावा अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। दूसरा अस्पताल में आईसीयू की भी सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गंभीर मरीजों को अस्पताल में उपचार मिलना मुश्किल होता है। स्वाइन फ्लू जैसे मरीजों के लिए निजी अस्पताल की सेवाएं लेनी पड़ती है। जिला अस्पताल पर जिले के साथ राजस्थान से भी काफी मरीज उपचार के लिए आते हैं। इससे ओडीपी के साथ गायनी वार्ड भी महिला मरीजों की संख्या काफी रहती हैं। नारनौल जिला मुख्यालय 100 से 200 बिस्तरों का अस्पताल होने के बाद भी जरूरी संसाधनों में बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। लिहाजा इसका खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ा रहा है। अस्पताल की रोजाना की ओपीडी करीब 900 से 1200 तक होती है। दूसरी ओर गायनी वार्ड में भी मरीजों का दबाव रहता है। डिप्टी एमएस डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि जिला अस्पताल में नियमित रुप से दो एमबीबीएस महिला डॉक्टर हैं। फील्ड से चार महिला डॉक्टरों को डेपुटेशन पर लगाया गया है। इमरजेंसी सेवाओं के लिए पांच निजी महिला डॉक्टरों की सेवाएं ली जा रही है। जिससे सिजेरियन केस में दिक्कतें न आए।
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जीएच नारनौल में डॉक्टरों के 42 पद स्वीकृत
सिविल सर्जन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जीएच नारनौल में डॉक्टरों के 42 पद स्वीकृत हैं। इसमें से 18 कार्यरत है जबकि 24 पद खाली हैं। इसी प्रकार एसडीएच महेंद्रगढ़ में 11 में नौ भरे हुए हैं। सीएचसी सतनाली में सात में तीन भरे हुए है जबकि चार खाली है। सीएचसी अटेली में आठ में दो, सीएचसी नांगल चौधरी में सात में पांच, सीएचसी नांगल सिरोही में सात में चार, सीएचसी सेहलंग में आठ में से एक, सीएचसी कनीना में सात में पांच डॉक्टर कार्यरत हैं। पीएचसी भोजावास में दो डॉक्टरों के पद स्वीकृत है, लेकिन कोई नहीं है। इसके आलावा पीएचसी सिहमा, सिरोही बहाली, अंतरी, बामनवास, मंडाना, बिगोपुर, बहलाकलां व पीएचसी छिलरो में दो-दो डॉक्टरों के पद है और भरे हुए हैं।
फिजिशियन डॉ. सुरेंद्र ने दिया काम छोड़ने का नोटिस
जिला अस्पताल के इकलौते फिजिशियन डॉ. सुरेंद्र मित्तल ने काम छोड़ने को लेकर अस्पताल प्रबंधन को नोटिस दे दिया है। ऐसे में एक माह बाद अस्पताल में फिजिशियन डॉक्टर भी उपलब्ध नहीं होगा। डॉ. सुरेंद्र ने कहा कि अपनी स्वेच्छा से कार्य छोड़ने के लिए नोटिस दिया है। दूसरी ओर डिप्टी एमएस डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि बुधवार को डॉ. सुरेंद्र मित्तल ने नोटिस दिया है। इसे आगे भेजा जाएगा। सूत्रों के अनुसार सोमवार को राज्यमंत्री ओपी यादव ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। इसमें डॉ. सुरेंद्र मित्तल को गैर हाजिर बताया गया था। जबकि, डॉ. सुरेंद्र मित्तल के नाम पर 146 से उपर की ओपीडी की पर्ची बनी थी और मरीजों को देख रहे थे। अस्पताल में मरीजों को देखते हुए उन्हें गैरहाजिर बता दिया गया। सूत्रों के अनुसार इससे आहत डॉक्टर ने कार्य छोड़ने का मन बना लिया।
अस्पताल में डेपुटेशन व कंसलटेंट की मदद से मरीजों को सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही है। एनएचएम के तहत एक स्त्री रोग विशेषज्ञ समेत दो और डॉक्टर मिले हैं। इसके साथ ही चार पीएचसी/सीएचसी से डॉक्टरों को डेपुटेशन पर लगाया गया है। -डॉ.राजेश कुमार, डिप्टी एमएस जीएच नारनौल
अभी सीएमओ का कार्य संभाला है। इस बारे में निदेशालय से डॉक्टरों की डिमांड की जाएगी। जिससे अस्पतालों में जरुरी सेवाएं मरीजों को मिल सके। -डॉ. अशोक कुमार, सीएमओ नारनौल