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Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   13 girls are building their lives in the district's only blind girls' school.

Mahendragarh-Narnaul News: जिले के एकमात्र नेत्रहीन कन्या विद्यालय में अपना जीवन संवार रहीं 13 लड़कियां

Wed, 07 Jan 2026 01:08 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 07 Jan 2026 01:08 AM IST
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13 girls are building their lives in the district's only blind girls' school.
अरविन्द तक्षक
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नारनौल। मूल रूप रेवाड़ी के सीहा गांव के रहने वाले मदन लाल शर्मा देख पाने में असमर्थ थे। उन्होंने अपनी इस पीड़ा को समझते हुए नारनौल के मोहल्ला खड़खड़ी में साल 1976 में लड़कियों के लिए अंध विद्यालय की नींव रखी। अब तक इस विद्यालय से सैकड़ों लड़कियां शिक्षित व आत्मनिर्भर बनकर निकल चुकी हैं। इनमें से कई लड़कियां सरकारी पदों पर भी आसीन हैं।

फिलहाल 13 लड़कियां ले रही शिक्षा
इस नेत्रहीन अंधविद्यालय में फिलहाल 13 लड़कियां शिक्षा ग्रहण करने के साथ घर के कामों में भी दक्ष हो रही हैं। इनमें स्नातक प्रथम वर्ष में कविता, 12वीं में अश्विनी व अन्नूबाई, 11वीं में गंगा, 10वीं में रवीना, 7वीं में अंशु, छठी में माही, चौथी में श्वेता व अन्नू, तीसरी में ईशिका व पूजा व पहली कक्षा में भव्या पढ़ाई कर रही है।
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स्कूल में ही रहने खाने का प्रबंध

इस विद्यालय में ही लड़कियों का हॉस्टल हैं और यहीं पर रसोई में उनके लिए खाना बनाया जाता है। लड़कियों के लिए यहां पर रहना व खाना बिलकुल मुफ्त होता है। लड़कियों को स्कूल कॉलेज लाने ले जाने का जिम्मा भी स्कूल स्टाफ का ही है।
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डोनेशन से चलता है स्कूल
यह स्कूल डोनेशन के पैसों से चलता है। आपकों बता दें कि शहर के समाजसेवी, संगठनों, राजनीति से जुड़े लोगों, व्यापारियों व सरकारी अधिकारियों द्वारा यहां समय समय पर स्कूल के लिए डोनेशन दिया जाता है। कई दानदाता ऐसे भी हैं जो हर माह अपनी श्रद्धा अनुसार चंदा देते रहते हैं।

बॉक्स.
ब्रेल लिपि के माध्यम से पढ़ना सिखाती हैं शिक्षिका कांता

विद्यालय की शिक्षिका कांता ने बताया कि वे बच्चों को ब्रेल लिपि के माध्यम से पढ़ना सिखाती हैं। इसके साथ ही जो बच्चियां संगीत में रुचि रखती हैं, उनको संगीत भी सिखाती हैं। वह बच्चियों को खाना पकाने में भी दक्ष बना रही हैं ताकि वे किसी पर आश्रित न रहें।


वर्जन

आमजन से अपील है कि जो बच्ची देख पाने में सक्षम नहीं है, उसे 4 से 5 साल की उम्र में ही विद्यालय में दाखिला दिलाएं ताकि बच्ची छोटी उम्र में ब्रेल लिपी से पढ़ना सीख सके और कामयाब बन सके। -कांता गांधी, शिक्षिका, अंध विद्यालय, नारनौल।
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