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नारनौल अस्पताल भवन को इलाज की दरकार
Updated Tue, 26 Dec 2017 09:57 PM IST
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अस्पताल की जर्जर इमारत में मरीजों का इलाज
नारनौल। क्षेत्र की सबसे बड़ी तीन मंजिला नागरिक अस्पताल की जर्जर इमारत की मरम्मत नहीं हो पा रही है। नारनौल के नागरिक अस्पताल की इमारत का कुछ हिस्सा आजादी से पहले का बना हुआ है तो कुछ आजादी से बाद का होने के कारण इसमें कई जगह दरारें आ गई हैं। वहीं इमारत की छत का प्लास्टर भरभरा कर गिरने लगा है। प्लास्टर के अलावा कई जगह पर लेंटर भी गिरना शुरू हो गया है। इसमें लेंटर के अंदर लगे लोहे के सरिये भी दिखाई देने लगे हैं। इसके साथ फर्श पर लगी टाइल्स भी उखड़ने लगी हैं। पुरानी इमारत में अभी भी मरीजों का देखा जाता है। वहीं पुरानी इमारत के एक हिस्से में प्रशासनिक भवन भी है। यहां की हालात इस इमारत से भी दयनीय है। इस भवन में रोज प्लास्टर गिरने की घटनाएं होती रहती हैं। इससे विभाग के कर्मचारी व अधिकारी भी सहमे हुए हैं।
इमारत निर्माण को काफी वर्ष बीत चुके हैं। विभाग की ओर से इस इमारत को जर्जर घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद यहां पर जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र सहित अन्य आवश्यक कागजी कार्यों विभिन्न विभाग चल रहे हैं। नारनौल स्थित जिला मुख्यालय पर 25 नवंबर 1970 को 100 बेड के अस्पताल का उद्घाटन किया गया था। इसके बाद से यहां पर मरीजों को देखा जाने लगा। परंतु 2005-06 में आई बाढ़ के बाद इस पुरानी बिल्डिंग को खतरनाक घोषित करते हुए इसमें मरीजों को देखना व अन्य कार्य बंद कर साथ लगती दूसरी बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिए गए थे, परंतु दो माह बाद फिर से यहां पर काम होने लग गए। अब हालात यह है कि इस इमारत की छत का प्लास्टर व लेंटर कई बार गिर चुका है। वहीं कई जगह गिरने की कगार पर है। इसके साथ ही इमारत की दीवारों में दरारें आई हुई हैं और कई जगह से अंडरग्राउंड लाइनों से पानी टपकता रहता है। इसके बावजूद यहां पर स्वास्थ्य विभाग के कई अन्य विभागों का काम होता है। इसके अलावा जच्चा-बच्चा वार्ड भी इसी पुरानी इमारत में स्थित है। जहां दिन-रात मरीजों को आना-जाना लगा रहता है। जबकि अन्य मरीज का भी दिन के समय अस्पताल में जमावड़ा लगा रहता है। उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नारनौल प्रवास के दौरान विधायक की मांग पर नारनौल के नागरिक अस्पताल को 100 से 200 बेड करने की घोषणा की थी।
कौन-कौन से विभाग हैं इस इमारत में
इस पुरानी इमारत में फिलहाल टीका विभाग, मरहम पट्टी कक्ष, ब्लड व यूरिन सैंपल कक्ष, दंत विभाग, अल्ट्रासाउंड केंद्र, ब्लड बैंक, एक्स-रे, मैटरन विभाग अभी चल रहे हैं। इसके साथ ही चिकित्सक भी इसी इमारत में बैठकर मरीजों की जांच करते हैं।
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दूसरी इमारत का भी है यही हाल
नागरिक अस्पताल के पूर्व की ओर मुख्य द्वार के पास बने प्रशासनिक भवन की इमारत का भी यही हाल है। इस इमारत का निर्माण 1967 में हुआ था। सही रख-रखाव नहीं होने के कारण यह इमारत भी धीरे-धीरे जर्जर होनी शुरू हो गई। जर्जर होने के साथ प्रशासनिक भवन की छत व प्लास्टर भी गिरने लगे हैं। इससे इस भवन में काम करने वाले कर्मचारी सहमे हुए रहते हैं। इस इमारत में कैश ब्रांच, डीआईओ ब्रांच, फैमिली प्लानिंग विभाग, जन्म व मृत्यु पंजीकरण विभाग के कार्यालय के अलावा पुलिस चौकी भी इसी बिल्डिंग में बनाई गई है। जहां भी अस्पताल के कर्मियों के अलावा रोजाना सैकड़ों लोग आते-जाते हैं।
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अस्पताल में कई जगह छतों से प्लास्टर निकाला हुआ है। इससे लेंटर के सरिये भी दिखाई देने लगे हैं। इसके अलावा इमारत की दीवारों में भी दरारें आई हुई हैं। इससे हादसा होने का भय बना रहता है।
-सोहनलाल
नागरिक अस्पताल की इमारत काफी पुरानी और जर्जर हो चुकी है। प्रथम तल कुछ ठीकठाक पर परंतु दूसरी व तीसरी मंजिल की हालात काफी दयनीय है।
-प्रेमचंद जैन
बारिश के मौसम में इमारत की छतों में पानी टपकता रहता है। वहीं शौचालय का भी बहुत बुरा हाल हो रहा है। अस्पताल की इमारत की जल्द से जल्द मरम्मत होनी चाहिए।
-गणपतराम सैनी
नागरिक अस्पताल की इमारत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। सरकार व प्रशासन को जल्द इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। अन्यथा कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
-बाल किशन
नागरिक अस्पताल इमारत की देखरेख का कार्य लोक निर्माण विभाग करता है। लोक निर्माण विभाग ने जर्जर इमारत का निरीक्षण किया था, लेकिन इमारत को जर्जर घोषित करने के बारे में उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई है। विभाग की जानकारी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-इंद्रजीत सिंह धनखड़, सिविल सर्जन, नारनौल नागरिक अस्पताल
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नारनौल। क्षेत्र की सबसे बड़ी तीन मंजिला नागरिक अस्पताल की जर्जर इमारत की मरम्मत नहीं हो पा रही है। नारनौल के नागरिक अस्पताल की इमारत का कुछ हिस्सा आजादी से पहले का बना हुआ है तो कुछ आजादी से बाद का होने के कारण इसमें कई जगह दरारें आ गई हैं। वहीं इमारत की छत का प्लास्टर भरभरा कर गिरने लगा है। प्लास्टर के अलावा कई जगह पर लेंटर भी गिरना शुरू हो गया है। इसमें लेंटर के अंदर लगे लोहे के सरिये भी दिखाई देने लगे हैं। इसके साथ फर्श पर लगी टाइल्स भी उखड़ने लगी हैं। पुरानी इमारत में अभी भी मरीजों का देखा जाता है। वहीं पुरानी इमारत के एक हिस्से में प्रशासनिक भवन भी है। यहां की हालात इस इमारत से भी दयनीय है। इस भवन में रोज प्लास्टर गिरने की घटनाएं होती रहती हैं। इससे विभाग के कर्मचारी व अधिकारी भी सहमे हुए हैं।
इमारत निर्माण को काफी वर्ष बीत चुके हैं। विभाग की ओर से इस इमारत को जर्जर घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद यहां पर जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र सहित अन्य आवश्यक कागजी कार्यों विभिन्न विभाग चल रहे हैं। नारनौल स्थित जिला मुख्यालय पर 25 नवंबर 1970 को 100 बेड के अस्पताल का उद्घाटन किया गया था। इसके बाद से यहां पर मरीजों को देखा जाने लगा। परंतु 2005-06 में आई बाढ़ के बाद इस पुरानी बिल्डिंग को खतरनाक घोषित करते हुए इसमें मरीजों को देखना व अन्य कार्य बंद कर साथ लगती दूसरी बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिए गए थे, परंतु दो माह बाद फिर से यहां पर काम होने लग गए। अब हालात यह है कि इस इमारत की छत का प्लास्टर व लेंटर कई बार गिर चुका है। वहीं कई जगह गिरने की कगार पर है। इसके साथ ही इमारत की दीवारों में दरारें आई हुई हैं और कई जगह से अंडरग्राउंड लाइनों से पानी टपकता रहता है। इसके बावजूद यहां पर स्वास्थ्य विभाग के कई अन्य विभागों का काम होता है। इसके अलावा जच्चा-बच्चा वार्ड भी इसी पुरानी इमारत में स्थित है। जहां दिन-रात मरीजों को आना-जाना लगा रहता है। जबकि अन्य मरीज का भी दिन के समय अस्पताल में जमावड़ा लगा रहता है। उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नारनौल प्रवास के दौरान विधायक की मांग पर नारनौल के नागरिक अस्पताल को 100 से 200 बेड करने की घोषणा की थी।
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कौन-कौन से विभाग हैं इस इमारत में
इस पुरानी इमारत में फिलहाल टीका विभाग, मरहम पट्टी कक्ष, ब्लड व यूरिन सैंपल कक्ष, दंत विभाग, अल्ट्रासाउंड केंद्र, ब्लड बैंक, एक्स-रे, मैटरन विभाग अभी चल रहे हैं। इसके साथ ही चिकित्सक भी इसी इमारत में बैठकर मरीजों की जांच करते हैं।
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दूसरी इमारत का भी है यही हाल
नागरिक अस्पताल के पूर्व की ओर मुख्य द्वार के पास बने प्रशासनिक भवन की इमारत का भी यही हाल है। इस इमारत का निर्माण 1967 में हुआ था। सही रख-रखाव नहीं होने के कारण यह इमारत भी धीरे-धीरे जर्जर होनी शुरू हो गई। जर्जर होने के साथ प्रशासनिक भवन की छत व प्लास्टर भी गिरने लगे हैं। इससे इस भवन में काम करने वाले कर्मचारी सहमे हुए रहते हैं। इस इमारत में कैश ब्रांच, डीआईओ ब्रांच, फैमिली प्लानिंग विभाग, जन्म व मृत्यु पंजीकरण विभाग के कार्यालय के अलावा पुलिस चौकी भी इसी बिल्डिंग में बनाई गई है। जहां भी अस्पताल के कर्मियों के अलावा रोजाना सैकड़ों लोग आते-जाते हैं।
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अस्पताल में कई जगह छतों से प्लास्टर निकाला हुआ है। इससे लेंटर के सरिये भी दिखाई देने लगे हैं। इसके अलावा इमारत की दीवारों में भी दरारें आई हुई हैं। इससे हादसा होने का भय बना रहता है।
-सोहनलाल
नागरिक अस्पताल की इमारत काफी पुरानी और जर्जर हो चुकी है। प्रथम तल कुछ ठीकठाक पर परंतु दूसरी व तीसरी मंजिल की हालात काफी दयनीय है।
-प्रेमचंद जैन
बारिश के मौसम में इमारत की छतों में पानी टपकता रहता है। वहीं शौचालय का भी बहुत बुरा हाल हो रहा है। अस्पताल की इमारत की जल्द से जल्द मरम्मत होनी चाहिए।
-गणपतराम सैनी
नागरिक अस्पताल की इमारत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। सरकार व प्रशासन को जल्द इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। अन्यथा कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
-बाल किशन
नागरिक अस्पताल इमारत की देखरेख का कार्य लोक निर्माण विभाग करता है। लोक निर्माण विभाग ने जर्जर इमारत का निरीक्षण किया था, लेकिन इमारत को जर्जर घोषित करने के बारे में उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई है। विभाग की जानकारी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-इंद्रजीत सिंह धनखड़, सिविल सर्जन, नारनौल नागरिक अस्पताल