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केवीके महेंद्रगढ़ु को मिला राष्ट्रीय स्तर पर ए ग्रेड
Updated Fri, 15 Jun 2018 12:56 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़।
स्वायत्त संस्थान राष्ट्रीय श्रम अर्थशास्त्र अनुसंधान एवं विकास संस्थान द्वारा 2017 में करवाई गई सर्वें में कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर ‘ए’ ग्रेड मिला है। इस सर्वे में 662 कृषि विज्ञान केंद्रों की रैंकिंग मूल्यांकन सर्वेक्षण किया गया था, जिनमें महेंद्रगढ़ केवीके को ‘ए’ श्रेणी में रखा गया। इसके अलावा जोन-2 (जोधपुर) के अधीन कार्य कर रहे 61 केंद्रों में 7वीं रैंक हासिल की। केवीके महेंद्रगढ़ ने स्थापना के बाद पहली बार ‘ए’ ग्रेड हासिल किया है। केंद्र के स्टाफ सदस्य ‘ए’ ग्रेड मिलने पर खुश हैं और उन्होंने इसका श्रेय केंद्र की वरिष्ठ संयोजिका डॉ. सुधा छिक्कारा को दिया।
केवीके की वरिष्ठ संयोजिका डॉ. सुधा छिक्कारा ने बताया कि नीति आयोग के अंतर्गत आने वाला स्वायत संस्थान राष्ट्रीय श्रम अर्थशास्त्र अनुसंधान एवं विकास संस्थान (एनआईएलईआरडी) ने 2017 में केवीके की सेवाओं की प्रभावकारिता की जांच के लिए एक रैंकिंग सर्वेक्षण करवाया था। प्रत्येक केवीके से गत पांच वर्षों के आंकड़े लिए गए थे। इन आंकड़ों पर आधारित अंकों के बाद ए, बी, सी और डी ग्रेड दिए गए हैं।
यह था सर्वेक्षण का उद्देश्य:
डॉ. सुधा ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र के मूल्यांकन के लिए मापदंडों को विकसित करना था। साथ ही केवीके के कार्यों में बाधा या बढ़ावा देने वाले कारकों को पहचानना और केवीके के स्तर पर सुधार करना था। इसके अलावा विभिन्न मापदंडों के लिए ए, बी, सी, और डी श्रेणी में रखा था।
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इस आधार पर मिले ग्रेड
उक्त संस्थान द्वारा सर्वेक्षण के दौरान चार चीजें जांची गई, जिनके अलग-अलग नंबर निर्धारित किए गए। केवीके का बुनियादी ढांचा कैसा है। इसके 15 प्रतिशत नंबर निर्धारित किए गए। प्रौद्योगिकी मूल्यांकन, परिष्करण, प्रसार एवं प्रशिक्षण के 35 प्रतिशत अंक, केवीके द्वारा करवाई गतिविधियों का प्रभाव 30 प्रतिशत अंक और संबंधित कार्य एवं सम्मान के 20 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए थे।
केवीके करती है प्रति वर्ष 30 से 35 प्रशिक्षण कार्यक्रम:
डॉ. सुधा ने बताया कि केंद्र में प्रति वर्ष 30 से 35 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। प्रशिक्षण में महिलाओं, ग्रामीण, युवाओं, किसानों को विभिन्न गतिविधियां करवाकर प्रशिक्षण दिया जाता है। बेरोजगार युवकों को मधुमक्खी पालन, वर्मी कम्पोस्ट, स्प्रे तकनीक कौशल, खुंब उत्पादन, दूध और दूध उत्पादों की मार्केटिंग आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई, अचार बनाना, खाद्य परीक्षण, हस्त कला आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा किसानों को नई तकनीक के बारे में जानकारी दी जाती है। साथ ही परंपरागत खेती के साथ-साथ वैज्ञानिक खेती के बारे में भी बताया जाता है।
दस वर्षों में 900 किसानों एवं 500 महिलाओं को दी जा चुकी है ट्रेनिंग
कृषि विज्ञान केंद्र पिछले दस वर्षों के जिले के 173 गांवों के 900 को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अलावा 500 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को विभिन्न कौशलों में निपुण कर आत्म निर्भर बनाया जा चुका है। इस संस्थान से प्रशिक्षण लेकर गांव बवानियां बनारसी एवं माजरा खुर्द निवासी अनीता विगत वर्ष गोवा में आयोजित प्रदर्शन में भाग ले चुकी हैं। इन दोनों ने हैंडी क्राफ्ट एवं अचार की प्रदर्शन की थी।
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महेंद्रगढ़।
स्वायत्त संस्थान राष्ट्रीय श्रम अर्थशास्त्र अनुसंधान एवं विकास संस्थान द्वारा 2017 में करवाई गई सर्वें में कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर ‘ए’ ग्रेड मिला है। इस सर्वे में 662 कृषि विज्ञान केंद्रों की रैंकिंग मूल्यांकन सर्वेक्षण किया गया था, जिनमें महेंद्रगढ़ केवीके को ‘ए’ श्रेणी में रखा गया। इसके अलावा जोन-2 (जोधपुर) के अधीन कार्य कर रहे 61 केंद्रों में 7वीं रैंक हासिल की। केवीके महेंद्रगढ़ ने स्थापना के बाद पहली बार ‘ए’ ग्रेड हासिल किया है। केंद्र के स्टाफ सदस्य ‘ए’ ग्रेड मिलने पर खुश हैं और उन्होंने इसका श्रेय केंद्र की वरिष्ठ संयोजिका डॉ. सुधा छिक्कारा को दिया।
केवीके की वरिष्ठ संयोजिका डॉ. सुधा छिक्कारा ने बताया कि नीति आयोग के अंतर्गत आने वाला स्वायत संस्थान राष्ट्रीय श्रम अर्थशास्त्र अनुसंधान एवं विकास संस्थान (एनआईएलईआरडी) ने 2017 में केवीके की सेवाओं की प्रभावकारिता की जांच के लिए एक रैंकिंग सर्वेक्षण करवाया था। प्रत्येक केवीके से गत पांच वर्षों के आंकड़े लिए गए थे। इन आंकड़ों पर आधारित अंकों के बाद ए, बी, सी और डी ग्रेड दिए गए हैं।
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यह था सर्वेक्षण का उद्देश्य:
डॉ. सुधा ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र के मूल्यांकन के लिए मापदंडों को विकसित करना था। साथ ही केवीके के कार्यों में बाधा या बढ़ावा देने वाले कारकों को पहचानना और केवीके के स्तर पर सुधार करना था। इसके अलावा विभिन्न मापदंडों के लिए ए, बी, सी, और डी श्रेणी में रखा था।
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इस आधार पर मिले ग्रेड
उक्त संस्थान द्वारा सर्वेक्षण के दौरान चार चीजें जांची गई, जिनके अलग-अलग नंबर निर्धारित किए गए। केवीके का बुनियादी ढांचा कैसा है। इसके 15 प्रतिशत नंबर निर्धारित किए गए। प्रौद्योगिकी मूल्यांकन, परिष्करण, प्रसार एवं प्रशिक्षण के 35 प्रतिशत अंक, केवीके द्वारा करवाई गतिविधियों का प्रभाव 30 प्रतिशत अंक और संबंधित कार्य एवं सम्मान के 20 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए थे।
केवीके करती है प्रति वर्ष 30 से 35 प्रशिक्षण कार्यक्रम:
डॉ. सुधा ने बताया कि केंद्र में प्रति वर्ष 30 से 35 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। प्रशिक्षण में महिलाओं, ग्रामीण, युवाओं, किसानों को विभिन्न गतिविधियां करवाकर प्रशिक्षण दिया जाता है। बेरोजगार युवकों को मधुमक्खी पालन, वर्मी कम्पोस्ट, स्प्रे तकनीक कौशल, खुंब उत्पादन, दूध और दूध उत्पादों की मार्केटिंग आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई, अचार बनाना, खाद्य परीक्षण, हस्त कला आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा किसानों को नई तकनीक के बारे में जानकारी दी जाती है। साथ ही परंपरागत खेती के साथ-साथ वैज्ञानिक खेती के बारे में भी बताया जाता है।
दस वर्षों में 900 किसानों एवं 500 महिलाओं को दी जा चुकी है ट्रेनिंग
कृषि विज्ञान केंद्र पिछले दस वर्षों के जिले के 173 गांवों के 900 को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अलावा 500 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को विभिन्न कौशलों में निपुण कर आत्म निर्भर बनाया जा चुका है। इस संस्थान से प्रशिक्षण लेकर गांव बवानियां बनारसी एवं माजरा खुर्द निवासी अनीता विगत वर्ष गोवा में आयोजित प्रदर्शन में भाग ले चुकी हैं। इन दोनों ने हैंडी क्राफ्ट एवं अचार की प्रदर्शन की थी।