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टिक-टॉक प्रेमी भी बोले- देश पहले टिक-टॉक बाद में

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jun 2020 10:24 PM IST
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youth suport to government for chines apps
भारत सरकार द्वारा 59 चाइनीज मोबाइल एप्लीकेशन बैन करने के फैसले की युवा वर्ग दिल से सराहना कर रहा है। टिक-टॉक से लेकर यूसी ब्राउजर सहित प्रचलित 59 मोबाइल एप ने बेशक लोगों के ऑनलाइन काम को पहले से सरल किया हो या खुद को साबित करने के लिए एक नया प्लेटफार्म प्रदान किया हो, लेकिन जहां देशहित की बात आई वहां सभी ने एकजुटता दिखाते हुए सरकार के इस फैसले की सराहना की। युवाओं ने यह आवाज भी उठाई है कि इन चाइनीज एप की तरह देश से चाइनीज प्रोडक्ट भी पूरी तरह से बैन हो जाने चाहिए। हमें स्वदेशी को बढ़ावा देकर भारत को आत्मनिर्भर बनाना होगा।
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टिकटॉक पर 10के फॉलोअर, लेकिन फिर भी बेन होनी की खुशी : महक
चाइनीज एप टिकटॉक की एक्टिव यूजर महक माल्यान ने कहा कि उसके टिकटॉक पर 10 हजार फॉलोअर्स हैं, फिर भी उन्हें टिकटॉक बेन होने का अफसोस न हो करके खुशी है। हमारे लिए देश है पहले है चाइनीज एप बाद में। अब तक बहुत सी बातें ऐसी सामने आईं, जिससे यह पता चला कि बहुत सी चाइनीज एप हमारे फोन में रहकर हमारा डाटा चुराता है। इस लिहाज से यह एप कब की बंद हो जानी चाहिए थी।
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चाइनीज प्रोडक्ट पर भी लगे पाबंदी : प्रमिला
प्रमिला ने कहा कि भारत में चाइनीज प्रोडक्ट ने अपना बहुत बड़ा बाजार स्थापित किया हुआ है। चाइनीज एप के मुकाबले इन प्रोडक्ट की टर्न ओवर निकाली जाए तो एप से कई करोड़ों के फायदे में निकलेगी। यदि सरकार एप बंद कर चाइना बाजार को आर्थिक तौर पर झटका देने की सोच रही है तो इसके साथ-साथ देश में धड़ल्ले से बिक रहे चाइनीज प्रोडक्ट पर भी पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दे।
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पब्जी गेम पर भी लगे पाबंदी : सचिन
सचिन कौशिक ने कहा कि सरकार द्वारा जिन 59 एप की लिस्ट जारी की गई है, उनमें पब्जी एप भी शामिल होनी चाहिए थी। पब्जी गेम से लोग सोशल लाइफ से बिल्कुल कट चुके हैं। वह खुद इस ऑनलाइन गेम का एडिक्ट रह चुका है। इस दौरान उसने महसूस किया कि गेम का एडिक्ट होने से उनके स्वभाव में बदलाव आने लगा है, जोकि एक गंभीर विषय है। इसलिए उसने पब्जी को डिलीट कर दिया। अब उसके मोबाइल में कोई भी चाइनीज एप नहीं है। वह दूसरों को भी सलाह दे रहे हैं कि इस प्रकार की गेम से दूरी बनाकर रखें।
टिक-टॉक ने बिगाड़ दी थी युवाओं की आदत : पूर्णिमा
पूर्णिमा ने कहा कि टिक-टॉक, वीमेट और वीचैट जैसी बहुत से एप ने युवाओं की आदतों को बिगाड़ कर रख दिया था। युवा अपने सारे कामकाज छोड़ सारा दिन इस एप में व्यस्त रहते थे। इतना ही नहीं सारा दिन इनके इस्तेमाल से उनमें सहनशक्ति भी बिल्कुल खत्म होती जा रही थी। इन्होंने अपनी एक अलग की दुनिया बना ली थी। अब यह एप बंद होंगी तो वह फिर से लोगों के साथ मिलेंगे जुलेंगे जिससे उनका मानसिक विकास होगा।
देश के बहुत से लोगों को भी होगा नुकसान : आरती
आरती ने कहा कि अगर बात भारत की करें तो चीन के लिए यह एक बड़ा मार्केट हैं। यहां के लोग हेलो, लाइकी, वीगो, टिकटॉक, यूसी ब्राउजर जैसे एप को खूब इस्तेमाल करते हैं, जिससे चीन की काफी कमाई होती है। हालांकि, इन एप के जरिए बहुत सारे भारतीयों को भी नौकरी मिली हुई है और बहुत सारे लोगों के लिए ये एप कमाई का जरिया भी बन चुके हैं। लोग अपने वीडियो बनाकर उनके जरिए पैसे कमा रहे हैं। यानी चीन के साथ-साथ भारत के बहुत से लोगों को भी इससे बड़ा नुकसान होगा।

भारत सबसे बड़ा ऐप बाजार : हिमानी जांगड़ा
असिस्टेंट प्रोफेसर हिमानी जांगड़ा ने कहा कि एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 80 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास स्मार्ट फोन हैं। बीते साल दुनियाभर में सबसे ज्यादा एप भारत में इंस्टॉल किए गए थे। आंकड़ों के मुताबिक शुरुआती तीन महीने में ही 4.5 अरब से ज्यादा एप डाउनलोड किए गए, जिनमें सबसे ज्यादा टिकटॉक था। अब भारत सरकार ने सोमवार को चीन के 59 चर्चित एप पर प्रतिबंध लगाकर चीन के नापाक इरादों को जवाब देने के लिए वर्चुअल स्ट्राइक की है। टिकटॉक की बात करें तो दुनियाभर में इसके दो अरब से ज्यादा यूजर हैं, इनमें सबसे ज्यादा करीब 30 फीसदी भारतीय हैं। इसके बाद चीन और अमेरिका में इसके यूजर हैं। इस ऐप की कुल कमाई का 10 फीसदी केवल भारत से होता था, जोकि बेन होने बंद हो जाएगा।
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